The Railway Servants (Discipline and Appeal) Rules 1968 in Hindi: पूरी जानकारी (2026)

भारतीय रेलवे (Indian Railways) में अनुशासन बनाए रखने के लिए The Railway Servants Rules 1968 (रेलवे सेवक नियम 1968) को लागू किया गया है। इसे रेलवे की भाषा में संक्षेप में D&A Rules 1968 या DAR Rules भी कहा जाता है।

चाहे आप भारतीय रेल के एक जिम्मेदार कर्मचारी हों, किसी यूनियन के सदस्य हों, या फिर रेलवे विभागीय परीक्षा (Railway LDCE/GDCE Exam) की तैयारी कर रहे उम्मीदवार हों—इन नियमों की गहरी समझ होना आपके लिए अनिवार्य है। इस व्यापक ब्लॉग पोस्ट में हम DAR नियमों के विधिक इतिहास, संवैधानिक सुरक्षा, प्रमुख प्राधिकारियों, निलंबन, लघु व दीर्घ दंड (Minor & Major Penalties) और सभी मानक प्रपत्रों (Standard Forms SF-1 से SF-14) की बारीकियों को विस्तार से समझेंगे।


The Railway Servants Rules 1968

The Railway Servants Rules 1968: अनुशासन का महत्व और विधिक इतिहास

भारतीय रेलवे चौबीसों घंटे सातों दिन काम करने वाला एक संवेदनशील संगठन है। यहाँ एक छोटी सी मानवीय लापरवाही या वित्तीय अनियमितता बड़े हादसों या राजस्व के नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए, अनुशासन केवल नियमों की किताब नहीं बल्कि सुरक्षित रेल संचालन की रीढ़ है।

The Railway Servants (Discipline and Appeal) Rules, 1968 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 309 (Article 309) के परंतुक (Proviso) के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करके बनाया गया था। यह नियम 1 अक्टूबर 1968 से पूरी भारतीय रेल में प्रभावी रूप से लागू हैं। यह नियम स्पष्ट करते हैं कि विभागीय जांच का उद्देश्य किसी कर्मचारी को परेशान करना नहीं, बल्कि सच्चाई का पता लगाना और सुधारात्मक कदम उठाना है।


2. संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 310 और 311 की कानूनी ढाल

रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार के अधीन सिविल पदों पर कार्य करते हैं। इसलिए, उन्हें भारत के संविधान द्वारा कुछ विशेष सुरक्षा उपाय (Safeguards) प्रदान किए गए हैं। DAR Rules 1968 पूरी तरह से संविधान के अनुच्छेद 310 और 311 पर आधारित हैं:

  • अनुच्छेद 310 – प्रसादपर्यंत का सिद्धांत (Doctrine of Pleasure): इस अनुच्छेद के अनुसार, रेलवे कर्मचारी राष्ट्रपति के “प्रसादपर्यंत” (During the Pleasure of the President) अपना पद धारण करते हैं। अर्थात, केंद्रीय अनुशासन पर अंतिम और सर्वोच्च नियंत्रण राष्ट्रपति का होता है।
  • अनुच्छेद 311(1) – नियुक्ति प्राधिकारी की सुरक्षा (Appointing Authority Safeguard): किसी भी रेल सेवक को उसकी नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी (Appointing Authority) से निचले स्तर के किसी भी अधीनस्थ (Subordinate) अधिकारी द्वारा नौकरी से हटाया (Removal) या बर्खास्त (Dismissal) नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता है, तो वह आदेश अदालत में तुरंत रद्द हो जाता है।
  • अनुच्छेद 311(2) – उचित अवसर का सिद्धांत (Reasonable Opportunity): किसी भी कर्मचारी को बिना किसी निष्पक्ष विभागीय जांच (Inquiry) के नौकरी से निकाला नहीं जा सकता या उसका डिमोशन (Reduction in Rank) नहीं किया जा सकता। जांच के दौरान कर्मचारी को दो अधिकार मिलने अनिवार्य हैं:
    1. उसके खिलाफ लगे आरोपों (Charges) की स्पष्ट लिखित जानकारी देना।
    2. उन आरोपों के खिलाफ अपनी सफाई और सबूत पेश करने का ‘उचित अवसर’ (Reasonable Opportunity) देना।

3. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice)

रेलवे DAR प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर टिकी हुई है। प्राचीन काल में नीतिशास्त्री ‘चाणक्य’ और महाभारत काल में ‘महात्मा विदुर’ ने भी कहा था कि सजा हमेशा अपराध के अनुपात में (Exact dose of punishment) और पूरी व्यवस्थित जांच के बाद ही होनी चाहिए।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस.आर. सिन्हा (CJI S.R. Sinha) ने प्रशासनिक जांचों के लिए तीन बुनियादी स्वर्णिम नियम बताए हैं, जिन्हें किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:

  1. कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में जज नहीं हो सकता (Nemo Judex In Causa Sua): जिस अधिकारी का कर्मचारी से कोई व्यक्तिगत विवाद रहा हो, या जो उस मामले में गवाह या शिकायतकर्ता हो, वह उस मामले का जांच अधिकारी (Inquiry Officer) या अनुशासनात्मक प्राधिकारी नहीं बन सकता।
  2. दूसरे पक्ष को भी सुनो (Audi Alteram Partem): किसी भी रेल सेवक को बिना उसका पक्ष सुने (Right to be heard) दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एकतरफा या गुप्त जांच के आधार पर दी गई सजा अवैध होती है।
  3. सकारण आदेश (Speaking Order): अनुशासनात्मक प्राधिकारी जब भी अपना अंतिम फैसला सुनाएगा, तो उसे लिखित में यह बताना होगा कि उसने कर्मचारी को किस सबूत के आधार पर दोषी माना है और उसका बचाव क्यों खारिज किया गया। इसे विधिक भाषा में ‘Speaking Order’ कहा जाता है।

विधिक सूत्र: प्रशासनिक कानून में यह माना गया है कि “न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए (Justice should not only be done, it should also appear to have been done).” ये सिद्धांत इतने पवित्र हैं कि विधिक विशेषज्ञ इनकी तुलना गीता, बाइबल या कुरान के पवित्र शब्दों से करते हैं।

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4. अनुशासनात्मक नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी (Authorities under DAR)

विभागीय कार्रवाई के दौरान The Railway Servants (Discipline and Appeal) Rules 1968 के तहत ‘सक्षम प्राधिकारी’ (Competent Authority) का निर्धारण पद के आधार पर होता है:

  • 4.1 नियुक्ति प्राधिकारी (Appointing Authority): वह अधिकारी जो उस सेवा/ग्रेड में नियुक्तियां करने के लिए अधिकृत है जिसमें कर्मचारी कार्यरत है, या जिसने वास्तव में कर्मचारी को सेवा में नियुक्त किया था। (विशेष परिस्थिति – यदि कोई कर्मचारी किसी अन्य केंद्रीय विभाग से डेपुटेशन पर रेलवे में लगातार सेवा में है, तो उसके मूल विभाग और रेलवे के प्राधिकारियों में से जो भी सर्वोच्च (Highest) होगा, वही सक्षम माना जाएगा)।
  • 4.2 अनुशासनात्मक प्राधिकारी (Disciplinary Authority): वह अधिकारी जो नियमों के तहत कर्मचारी पर लघु या दीर्घ दंड लगाने के लिए कानूनी रूप से सक्षम है। एक जूनियर अधिकारी जो केवल मामूली दंड (Minor Penalty) देने के लिए सक्षम है, वह भी चार्जशीट जारी कर सकता है; लेकिन यदि जांच के बाद उसे लगे कि अपराध बड़ा है और मेजर पेनल्टी की जरूरत है, तो वह स्वयं फैसला न लेकर केस को उच्च सक्षम प्राधिकारी (Higher Competent Authority) को फॉरवर्ड कर देगा।
  • 4.3 जांच प्राधिकारी (Inquiry Authority / IO): Disciplinary Authority द्वारा नामांकित वह अधिकारी जो गवाहों के बयान और सबूतों की विधिक जांच करता है। शर्त यह है कि जांच अधिकारी का रैंक कभी भी आरोपित कर्मचारी से कम नहीं होना चाहिए।
  • 4.4 डिफेंस हेल्पर (Defence Counsel / Helper): आरोपित कर्मचारी की मदद के लिए रेलवे का ही कोई अन्य सेवारत कर्मचारी, सेवानिवृत्त रेल सेवक या मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन का पदाधिकारी ‘डिफेंस हेल्पर’ बन सकता है। प्रतिबंध: कोई भी बाहरी पेशेवर एडवोकेट या कानूनी व्यवसायी (Legal Practitioner) सामान्य विभागीय जांच मेंथ डिफेंस हेल्पर नहीं बन सकता।

5. निलंबन (Suspension) और उसके विधिक प्रभाव

कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा भ्रम यह होता है कि निलंबन एक सजा है। रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार—निलंबन कोई दंड नहीं है (Suspension is NOT a penalty)। यह केवल एक प्रशासनिक कदम है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए SF-1 फॉर्म जारी किया जाता है।

5.1 निलंबन की परिस्थितियाँ

एक रेल सेवक को निम्नलिखित तीन स्थितियों में सस्पेंड किया जा सकता है:

  1. जब उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई विचारधीन (Contemplated) या लंबित (Pending) हो।
  2. जब वह राज्य/देश के हितों के प्रतिकूल या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाए।
  3. जब उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला जांच, पूछताछ या अदालत में ट्रायल के अधीन हो।

5.2 माना गया निलंबन (Deemed Suspension – SF-2)

कुछ परिस्थितियों में प्रशासन को निलंबन का आदेश जारी करने की भी आवश्यकता नहीं होती, कानूनन कर्मचारी को स्वतः निलंबित मान लिया जाता है:

  • 48 घंटे का नियम: यदि कोई कर्मचारी किसी आपराधिक या अन्य मामले में 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत या जेल में रहता है।
  • अदालती सजा का नियम: यदि किसी कर्मचारी को अदालत द्वारा दोषी ठहराकर 48 घंटे से अधिक के कारावास की सजा सुनाई जाती है और प्रशासन उसे तत्काल नौकरी से बर्खास्त नहीं करता है।
  • सजा रद्द होने पर (Rule 5.1): यदि किसी कर्मचारी की बर्खास्तगी (Dismissal) या सेवा से हटाने (Removal) की सजा को किसी अपील प्राधिकारी या न्यायालय (Court of Law) द्वारा किसी तकनीकी कमी के कारण रद्द (Set aside/Void) कर दिया जाता है और प्रशासन उसी मामले में आगे की जांच (Further Inquiry) करने का निर्णय लेता है, तो कर्मचारी मूल बर्खास्तगी की तारीख से ही लगातार ‘माना गया निलंबन’ (Deemed Suspension) के अधीन रहेगा।

5.3 निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance – SF-3)

निलंबन के दौरान कर्मचारी को सैलरी नहीं मिलती, बल्कि SF-3 फॉर्म के तहत आधे औसत वेतन पर छुट्टी वेतन (Leave Salary on Half Average Pay – LHAP) और उस पर बनने वाले डीए के बराबर निर्वाह भत्ता दिया जाता है।

  • अनिवार्य छूट: इस भत्ते में से भविष्य निधि (PF), कोर्ट अटैचमेंट (कुर्की) और सरकारी जुर्माने की कटौती कभी नहीं की जा सकती।
  • अनिवार्य कटौतियाँ: मकान किराया (HRA), बिजली-पानी शुल्क, आयकर और स्टेशन डेबिट की कटौती अवश्य की जाएगी।
  • कर्मचारी की इच्छा पर कटौती: एलआईसी प्रीमियम, स्कूल फीस या कोऑपरेटिव सोसाइटी का बकाया कर्मचारी के लिखित अनुरोध पर ही काटा जा सकता है।

5.5 सेवा शर्तों पर निलंबन का प्रभाव

  • मुख्यालय (HQ): कर्मचारी का अंतिम ड्यूटी स्टेशन ही उसका मुख्यालय रहता है। बिना अनुमति वह HQ नहीं छोड़ सकता। इस दौरान वह कोई अन्य निजी व्यापार या नौकरी नहीं कर सकता।
  • पदोन्नति और सीलबंद लिफाफा (Sealed Cover Procedure): निलंबित कर्मचारी का प्रमोशन रोक दिया जाता है। हालांकि, वह विभागीय परीक्षा (LDCE) में बैठ सकता है। उसका रिजल्ट सीलबंद लिफाफे (Sealed Cover) में रख दिया जाता है, जो जांच में निर्दोष साबित होने के बाद ही खोला जाता है।
  • वीआरएस और लीव: निलंबन के दौरान कोई भी छुट्टी (Leave) स्वीकृत नहीं की जाती। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या इस्तीफा (Resignation) सामान्यतः स्वीकार नहीं होता, जब तक कि वह जनहित में न हो।
  • यात्रा भत्ता (TA): यदि निलंबित कर्मचारी की विभागीय जांच उसके गृह मुख्यालय से दूर किसी बाहरी स्टेशन पर आयोजित की जाती है, तो उसे नियमानुसार यात्रा भत्ता और पास/पीटीओ प्रदान किया जा सकता है।
  • नियमितीकरण (Regularization): यदि कर्मचारी पूरी तरह दोषमुक्त (Fully Exonerated) होता है, तो निलंबन अवधि को ‘ऑन-ड्यूटी’ माना जाता है और पूरा वेतन मिलता है। यदि उसे ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) मिलता है, तो उसे ड्यूटी नहीं माना जाता, लेकिन कर्मचारी के अनुरोध पर उसे छुट्टियों (Leave) में बदला जा सकता है। इससे सेवा में कोई व्यवधान (Break in Service) नहीं आता और पेंशन के लिए अर्हक सेवा गिनी जाती है।

6. लघु दंड (Minor Penalties – SF-11) बनाम दीर्घ दंड (Major Penalties – SF-5)

रेलवे में किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई करने से पहले The Railway Servants Rules 1968 के तहत तय की गई प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है।

रेलवे सेवक (अनुशासन और अपील) नियम, 1968 के नियम 6 के तहत दंडों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

6.1 लघु दंड (Minor Penalties – कुल 6 प्रकार)

इसके लिए SF-11 चार्जशीट दी जाती है और यह एक संक्षिप्त प्रक्रिया है। इसमें शामिल हैं:

  1. निंदा (Censure): सेवा रिकॉर्ड में दर्ज होने वाली औपचारिक लिखित चेतावनी।
  2. पदोन्नति रोकना (Withholding of Promotion): एक निश्चित अवधि के लिए प्रमोशन पर रोक।
  3. आर्थिक नुकसान की वसूली (Recovery from Pay): लापरवाही से रेलवे को हुए नुकसान की सैलरी से रिकवरी।
  4. पास/पीटीओ रोकना (Withholding of Passes/PTOs): रेलवे पास की सुविधाओं पर अस्थाई रोक।
  5. निचले स्टेज पर अवनति (Reduction to Lower Stage): अधिकतम 3 वर्ष के लिए समय-वेतनमान में एक स्टेज नीचे करना (बिना संचयी प्रभाव के और पेंशन प्रभावित किए बिना)।
  6. वेतन वृद्धि रोकना (Withholding of Increments): वार्षिक इंक्रीमेंट को रोकना (यह स्पष्ट करना होगा कि यह संचयी प्रभाव ‘With Cumulative Effect’ के साथ है या नहीं)।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अपवाद (WIT vs WIP): भले ही चार्जशीट SF-11 (माइनर) की हो, लेकिन यदि सजा 3 वर्ष से अधिक अवधि के लिए वेतन वृद्धि रोकने (WIT) की हो, या संचयी प्रभाव के साथ वेतन वृद्धि रोकने (WIP) की हो, या इससे पेंशन प्रभावित हो रही हो; तो मेजर पेनल्टी की तरह विस्तृत औपचारिक जांच (Detailed Enquiry) कराना अनिवार्य (Mandatory) होता है।

6.2 दीर्घ दंड (Major Penalties – कुल 5 प्रकार)

रेलवे में किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई करने से पहले The Railway Servants Rules 1968 के तहत तय की गई प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है।

इसके लिए SF-5 बड़ी चार्जशीट दी जाती है और पूरी औपचारिक विधिक जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें शामिल हैं:

  1. वेतनमान में निचले स्तर पर लाना (Reduction to a lower stage): संचयी प्रभाव (Cumulative Effect) के साथ वेतन कटौती, जिससे भविष्य के इंक्रीमेंट और पेंशन स्थायी रूप से कम हो जाते हैं।
  2. पद, ग्रेड या सेवा में डिमोशन (Reduction to a Lower Grade/Post): कर्मचारी का पद छोटा करना और एक निश्चित अवधि तक पुराने पद पर वापस जाने पर रोक (Bar to Promotion) लगाना।
  3. अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement): नौकरी से समय-पूर्व जबरन रिटायर करना (इसमें सहानुभूति के आधार पर आंशिक या पूरी पेंशन मिलती है)।
  4. सेवा से हटाया जाना (Removal from Service): नौकरी से निकालना, लेकिन यह कर्मचारी को भविष्य में किसी अन्य सरकारी नौकरी पाने के लिए अयोग्य नहीं ठहराता।
  5. सेवा से बर्खास्तगी (Dismissal from Service): रेलवे का सबसे कठोर दंड। इसके बाद कर्मचारी भविष्य में जीवनभर के लिए किसी भी सरकारी नौकरी के लिए पूरी तरह अयोग्य (Disqualified) हो जाता है।

7. ये कार्रवाइयाँ दंड (Penalty) नहीं हैं (Rule 5.9)

रेलवे बोर्ड के नियम 5.9 के अनुसार निम्नलिखित प्रशासनिक कार्रवाइयों को भूलकर भी DAR दंड नहीं समझा जाना चाहिए:

  • आवश्यक विभागीय परीक्षा पास न कर पाने पर वेतन वृद्धि का रोका जाना।
  • दक्षता बार (Efficiency Bar) पार न कर पाना।
  • चयन समिति (DPC) द्वारा उपयुक्त न पाए जाने पर पदोन्नति न होना (Non-Promotion due to unsuitability)।
  • प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि के दौरान या उसके अंत में उपयुक्त न पाए जाने पर मूल निम्न पद पर वापस भेजा जाना (Reversion)।
  • किसी अन्य विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी को उसके मूल विभाग में वापस भेजना (Repatriation)।
  • प्रशासनिक नियमों (जैसे FR 56(j) या नियम 1802) के तहत जनहित में की गई समय-पूर्व सेवानिवृत्ति (Premature Retirement)।
  • शारीरिक या मेडिकल अयोग्यता (Physical Unfitness) के कारण सेवामुक्त (Discharge) किया जाना।

मुख्य रूप से The Railway Servants Rules 1968 का उद्देश्य रेलवे विभाग में अनुशासन, निष्पक्षता और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है।


8. बड़ी चार्जशीट (SF-5) की चरणबद्ध विधिक जांच प्रक्रिया

जब किसी कर्मचारी को SF-5 मिलता है, तो जांच निम्नलिखित विधिक चरणों से होकर गुजरती है:

  1. SF-5 चार्जशीट जारी करना: अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा विस्तृत आरोप पत्र जारी करना और विधिक दस्तावेजों का निरीक्षण करने देना।
  2. बनाव का लिखित बयान: कर्मचारी को अपनी सफाई में लिखित जवाब (Statement of Defence) प्रस्तुत करने का अवसर देना।
  3. जांच अधिकारी की नियुक्ति: यदि कर्मचारी आरोपों को स्वीकार नहीं करता, तो निष्पक्ष जांच के लिए इंक्वायरी ऑफिसर (IO) नियुक्त करना।
  4. प्रारंभिक सुनवाई (Preliminary Hearing): जांच अधिकारी द्वारा अतिरिक्त दस्तावेज और डिफेंस हेल्पर की अनुमति देना और गवाहों के लिए विधिक कैलेंडर तय करना।
  5. गवाहों का परीक्षण व जिरह (Cross-examination): पहले अभियोजन (प्रशासन) के गवाहों के बयान और कर्मचारी द्वारा उनसे जिरह। फिर बचाव पक्ष के गवाहों का परीक्षण।
  6. अंतिम लिखित विवरण (Briefs): दोनों पक्षों द्वारा अपनी अंतिम लिखित दलीलें दाखिल करना।
  7. जांच रिपोर्ट (Inquiry Report) सौंपना: जांच अधिकारी द्वारा निष्कर्ष तैयार कर फाइल अनुशासनात्मक प्राधिकारी को सौंपना।
  8. रिपोर्ट की कॉपी कर्मचारी को देना: अंतिम फैसले से पहले कर्मचारी को रिपोर्ट की कॉपी देना (आमतौर पर 15 दिन का समय प्रतिवेदन के लिए)।
  9. अंतिम विधिक निर्णय: अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा रिपोर्ट पर विचार कर दंड लगाने का नोटिस (NIP) जारी करना (ग्रुप ए मामलों में अंतिम आदेश से पहले UPSC से परामर्श अनिवार्य)।
  • एकपक्षीय जांच (Ex-parte Inquiry – Rule 5.12): यदि आरोपित कर्मचारी बार-बार बुलाए जाने के बाद भी जांच में सहयोग नहीं करता और जानबूझकर अनुपस्थित रहता है, तो जांच अधिकारी एकतरफा या एकपक्षीय जांच (Ex-parte) आगे बढ़ा सकता है। अपवाद: यदि कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार है और उसने रेलवे डॉक्टर का सिकनेस मेडिकल सर्टिफिकेट (Sickness Medical Certificate) भेजा है, तो एकपक्षीय जांच करना पूरी तरह अवैध होगा।

9. बिना जांच सीधे सजा देने के विशेष नियम (Rule 14)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत रेलवे बोर्ड के नियम 14 (Rule 14) के अंतर्गत प्रशासन को तीन विशेष परिस्थितियों में बिना किसी विभागीय जांच के सीधे कर्मचारी को बर्खास्त या सेवामुक्त करने की असाधारण शक्ति मिलती है:

  1. नियम 14(i) – अदालती दोषसिद्धि: जब कर्मचारी को किसी आपराधिक मामले में अदालत द्वारा सजा (Criminal Conviction) सुना दी गई हो।
  2. नियम 14(ii) – जांच असंभव होना: जब अनुशासनात्मक प्राधिकारी लिखित में यह ठोस कारण दर्ज करे कि गवाहों को खतरा होने या किसी अन्य कारण से जांच कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है (Not reasonably practicable)।
  3. नियम 14(iii) – राष्ट्रीय सुरक्षा: जब भारत के राष्ट्रपति (President of India) संतुष्ट हों कि देश की सुरक्षा के हित में खुली जांच कराना उचित नहीं है।

10. कैजुअल लेबर और गैर-आधिकारिक गतिविधियाँ (Special Rules)

  • कैजुअल लेबर (Casual Labour – Rule 5.14): सामान्य दैनिक श्रमिकों पर DAR नियम लागू नहीं होते, लेकिन यदि उन्होंने अस्थायी दर्जा (Temporary Status) प्राप्त कर लिया है, तो उन पर ये नियम पूरी तरह प्रभावी हो जाते हैं। किसी भी मामले में उन्हें हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) देना वांछनीय है।
  • गैर-आधिकारिक गतिविधियां (Rule 5.17): यदि कोई रेल कर्मचारी ड्यूटी से अलग रेलवे मनोरंजन क्लब (Recreation Clubs), रेलवे कोऑपरेटिव बैंक/सोसाइटी या स्टाफ कैंटीन में किसी पद पर रहते हुए फंड का वित्तीय गबन (Mis-appropriation of funds) या हेराफेरी करता है, तो भी उसके खिलाफ रेलवे DAR Rules के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

11. अपील, पुनरीक्षण और समीक्षा (Appeal, Revision & Review)

प्रशासनिक निर्णयों में त्रुटियों को सुधारने के लिए कर्मचारियों को तीन विधिक उपचार दिए गए हैं:

  • 11.1 अपील (Appeal – Rule 24): सजा का आदेश (NIP) मिलने के 45 दिनों के भीतर कर्मचारी अपने से ठीक उच्च अधिकारी (Appellate Authority) के पास अपील कर सकता है। अपील मर्यादित भाषा में और व्यक्तिगत नाम से होनी चाहिए। कर्मचारी के अनुरोध पर उसे व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) का मौका दिया जा सकता है। अपील अधिकारी सजा को रद्द (Set aside) कर सकता है, कम (Reduce) कर सकता है, बरकरार (Confirm) रख सकता है या बढ़ा (Enhance) सकता है। (सजा बढ़ाने से पहले कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य है)। सामान्यतः कोई दूसरी अपील नहीं होती, केवल बर्खास्त ग्रुप डी कर्मचारियों को छोड़कर।
  • 11.2 पुनरीक्षण (Revision – Rule 25): अपील का निपटारा होने के बाद सजा बढ़ाने के लिए 6 महीने और सजा कम/रद्द करने के लिए 1 वर्ष के भीतर पुनरीक्षण (Revision) दायर किया जा सकता है। पुनरीक्षण प्राधिकारी कभी भी जेएजी (JAG Grade) अधिकारी से नीचे के रैंक का नहीं होना चाहिए। विशेष प्रावधान के तहत, नौकरी से निकाले गए ग्रुप सी और डी के कर्मचारी अपील खारिज होने के 45 दिनों के भीतर सीधे जीएम (GM), डीआरएम (DRM) या वरिष्ठतम एसएजी (SAG) अधिकारी के पास विशेष रिवीजन आवेदन दे सकते हैं।
  • 11.3 समीक्षा (Review – Rule 25A): जब पूरा मामला बंद हो चुका हो और कोई ऐसा नया तथ्य या सबूत (New Fact) सामने आए जो पहले उपलब्ध नहीं था, तो भारत के राष्ट्रपति (President of India) अपने स्वविवेक (Suo-motu) से किसी भी समय मामले की समीक्षा कर सकते हैं।

12. रेलवे DAR के सभी 14 मानक प्रपत्रों (Standard Forms) की मास्टर लिस्ट

रेलवे परीक्षाओं (LDCE Exams) में सीधे फॉर्म नंबर और उसका उपयोग पूछा जाता है। इसे कंठस्थ करने के लिए नीचे दी गई मास्टर तालिका को देखें:

मानक प्रपत्र संख्या (Standard Form No.)विधिक उपयोग और प्रशासनिक उद्देश्य (Administrative Purpose)
SF-1सामान्य निलंबन का आदेश जारी करना (Order of Suspension)
SF-2मान लिए गए निलंबन का औपचारिक आदेश (Order of Deemed Suspension)
SF-3निलंबन के दौरान निर्वाह भत्ता स्वीकृत करने का प्रमाण पत्र (Subsistence Allowance)
SF-4निलंबन आदेश को रद्द करना या कर्मचारी की बहाली (Revocation of Suspension)
SF-5बड़े दंड लगाने के लिए विस्तृत आरोप पत्र (Charge Sheet for Major Penalty)
SF-6जांच अधिकारी को केस के गोपनीय दस्तावेज/अभिलेख सौंपने का आदेश
SF-7विधिक जांच अधिकारी की नियुक्ति का आदेश (Appointment of Inquiry Officer)
SF-8जांच में सहायता के लिए प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति (Presenting Officer)
SF-9इस फॉर्म को रेलवे बोर्ड द्वारा हटा दिया गया है (Deleted/Discontinued)
SF-10एक से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ संयुक्त कार्यवाही का आदेश (Common Proceedings)
SF-10aसंयुक्त कार्यवाही के मामलों में मुख्य जांच अधिकारी (E.O.) की नियुक्ति
SF-10bसंयुक्त कार्यवाही के मामलों में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी (P.O.) की नियुक्ति
SF-11लघु दंड लगाने के लिए संक्षिप्त आरोप पत्र (Charge Sheet for Minor Penalty)
SF-11bलघु दंड (SF-11) के तहत विशेष परिस्थितियों में विस्तृत जांच शुरू करने का आदेश
SF-11cपहले से जारी मेजर चार्जशीट (SF-5) को माइनर पेनल्टी में संशोधित/डाउनग्रेड करना
SF-12नियम 14(i) के तहत (अदालती सजा होने पर) बिना जांच सीधे कार्रवाई का विधिक ज्ञापन
SF-13सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति
SF-14सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों के खिलाफ जारी होने वाला विशिष्ट आरोप पत्र

निष्कर्ष (Conclusion)

The Railway Servants (Discipline and Appeal) Rules, 1968 भारतीय रेलवे के प्रशासनिक ढांचे को सुचारू रूप से चलाने का एक बेहतरीन विधिक उपकरण है। यह नियम जहाँ एक ओर प्रशासन को कामचोर, लापरवाह या भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की शक्ति देते हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के माध्यम से एक निर्दोष रेल सेवक को दुर्भावनापूर्ण या एकतरफा कार्रवाई से बचाने के लिए अभेद्य कानूनी सुरक्षा कवच भी प्रदान करते हैं।


FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न

Q.1 क्या सस्पेंशन (Suspension) के दौरान रेलवे पास और पीटीओ की सुविधा मिलती है?
Ans: निलंबन के दौरान कर्मचारी के नियमित पास अधिकार निलंबित रहते हैं, लेकिन गंभीर पारिवारिक या विधिक आवश्यकताओं के लिए सक्षम प्राधिकारी के विवेक पर सीमित मात्रा में विशेष पास जारी किए जा सकते हैं।

Q.2 रेलवे में SF-5 और SF-11 फॉर्म में क्या अंतर है?
Ans: SF-5 का उपयोग बड़े दंड (Major Penalty) के लिए विस्तृत चार्जशीट देने के लिए होता है जिसमें लंबी विभागीय जांच अनिवार्य है। जबकि SF-11 का उपयोग छोटे दंड (Minor Penalty) के लिए संक्षिप्त चार्जशीट देने के लिए किया जाता है।

Q.3 क्या कोई सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) किसी ग्रुप सी कर्मचारी को सस्पेंड कर सकता है?
Ans: सामान्यतः नहीं। ग्रुप सी कर्मचारियों को निलंबित करने का अधिकार जूनियर स्केल या ग्रुप बी अधिकारियों के पास होता है। वरिष्ठ पर्यवेक्षक (SSE) केवल अपने अधीन काम करने वाले भूतपूर्व ग्रुप डी कर्मचारियों को ही विशेष परिस्थितियों में निलंबित करने के लिए अधिकृत होते हैं।


महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Disclaimer):

⚠️ ध्यान दें: यह ब्लॉग पोस्ट केवल सामान्य जानकारी, शैक्षणिक उद्देश्यों (Educational Purposes) और रेलवे विभागीय परीक्षाओं (LDCE/GDCE) की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों की सहायता के लिए तैयार की गई है। इसे किसी भी प्रकार का आधिकारिक विधिक दस्तावेज (Official Legal Document) या अकाट्य प्रमाण (Proof) न माना जाए। रेलवे सेवा, अनुशासन और अपील से जुड़े नियमों में समय-समय पर रेलवे बोर्ड (Railway Board) द्वारा संशोधन और नए मास्टर सर्कुलर जारी किए जाते हैं। किसी भी विधिक विवाद, विभागीय कार्रवाई या आधिकारिक कार्य के समय केवल रेल मंत्रालय द्वारा जारी मूल ‘The Railway Servants (Discipline and Appeal) Rules, 1968’ और आधिकारिक रेलवे बोर्ड नियमों (Official Railway Rules) को ही अंतिम, प्रामाणिक और सही माना जाएगा।

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