अगर आप Indian Railway की Track Machines Engine की पूरी जानकारी ढूंढ रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं। भारतीय रेलवे का नाम आते ही हमारे दिमाग में लंबी मालगाड़ियां, सुपरफास्ट वंदे भारत या फिर गरजते हुए लोकोमोटिव्स (जैसे WAG-9, WAG-12 या WAP-7) की तस्वीर सामने आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन पटरियों पर ये ट्रेनें 130 से 160 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं, उन्हें सुरक्षित और मेंटेन कौन रखता है?
जी हां, यह काम करती हैं भारतीय रेलवे की रीढ़ कही जाने वाली Engineering Track Machines। जब ये महाकाय मशीनें कंक्रीट के भारी-भरकम स्लीपर्स को खिलौनों की तरह उठाकर ट्रैक को दुरुस्त करती हैं, तो हर रेल फैन, रेल कर्मचारी और ट्रैक मशीन इंजीनियर के दिल में एक ही सवाल आता है—इन मशीनों में इतनी ताकत आती कहां से है?
आज हम नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (NCR) के ऑफिशियल डेटा, IRTM (Indian Railways Track Machines) Manual Chapter 12 और रेलवे के नवीनतम करेक्शन स्लिप के हवाले से इन मशीनों का सबसे बड़ा राज खोलने जा रहे हैं। आज हम बात करेंगे इन मशीनों के ‘दिल’ यानी इनके Diesel Engines की।
टॉर्क और हॉर्सपावर का विज्ञान: Understanding the Track Machines Engine
ट्रैक मशीन की ताकत को समझने के लिए हमें सबसे पहले दो जादुई शब्दों को समझना होगा, जो किसी भी इंजन की जान होते हैं: टॉर्क (Torque) और हॉर्सपावर (Horsepower)।
1. टॉर्क (Torque) क्या होता है?
सरल शब्दों में कहें तो टॉर्क का मतलब है “घुमाने वाली ताकत” (Twisting Force)।
- जब कोई मशीन अपनी जगह पर खड़ी होती है और उसे भारी कंक्रीट स्लीपर को ज़मीन से ऊपर उठाना होता है, या ट्रैक के नीचे जमे पत्थरों को कटर चेन से उखाड़ना होता है, तब इंजन को रफ्तार की नहीं, बल्कि झटके से भारी वजन उठाने या दबाने वाली ताकत की जरूरत होती है। इसी ताकत को टॉर्क कहते हैं।
- ट्रैक मशीनों के इंजन कम आरपीएम (Low RPM – जैसे 1800 से 2100) पर ही अपना पूरा टॉर्क दे देते हैं, ताकि मशीन धीमी रफ्तार में भी भारी से भारी काम कर सके।
2. हॉर्सपावर (Horsepower – Hp) क्या होता है?
हॉर्सपावर का मतलब है “काम करने की रफ्तार” (Rate of Doing Work)।
- टॉर्क जहाँ सिर्फ ताकत दिखाता है, वहीं हॉर्सपावर यह दिखाता है कि वह ताकत कितनी जल्दी और कितनी तेजी से काम कर सकती है।
- उदाहरण के लिए, एक भारी कंक्रीट स्लीपर को दबाने के लिए टॉर्क चाहिए, लेकिन 1 घंटे में लगातार 1000 स्लीपर्स को फटाफट दबाते हुए आगे बढ़ने के लिए हाई हॉर्सपावर की जरूरत होती है।
🤔 कैसे डिसाइड होता है कि किस मशीन को कितने Hp का इंजन चाहिए?
यह कोई अंदाज़े का खेल नहीं है। किसी भी ट्रैक मशीन को कितने हॉर्सपावर की जरूरत है, यह तीन मुख्य बातों पर निर्भर करता है:
- मशीन का खुद का वजन (Dead Weight): 09-32 CSM या BCM जैसी मशीनें 60 से 80 टन भारी होती हैं। इन्हें एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से खुद दौड़ाने के लिए भारी पावर चाहिए।
- हाइड्रोलिक पंपों की संख्या (Hydraulic Load): इन मशीनों में पहिए घुमाने से लेकर टैंपिंग टूल्स को वाइब्रेट करने तक का 90% काम हाइड्रोलिक ऑयल प्रेशर से होता है। जितने ज्यादा हाइड्रोलिक पंप होंगे, इंजन पर उतना लोड पड़ेगा और उतना ही बड़ा इंजन चाहिए होगा।
- वर्किंग एनवायरनमेंट (Working Resistance): बैलास्ट क्लीनिंग मशीन (BCM) को ट्रैक के नीचे दबी गिट्टियों को काटकर बाहर निकालना होता है, जिसमें बहुत ज्यादा फ्रिक्शन (घर्षण) होता है। इसलिए इन्हें सबसे भारी इंजन चाहिए।
कौन डिसाइड करता है यह पावर?
भारतीय रेलवे में यह पूरी तरह RDSO (Research Designs and Standards Organisation, Lucknow) और Railway Board की ट्रैक मशीन डायरेक्टोरेट मिलकर डिसाइड करती है। जब भी कोई नई मशीन विदेशों (जैसे Plasser & Theurer, Austria या Loram, USA) से मंगवाई जाती है, तो RDSO भारत की भौगोलिक स्थिति, गर्मी और लोड के हिसाब से इंजन की हॉर्सपावर की Technical Specifications तय करता है।
⚠️ कम या ज्यादा हॉर्सपावर का इंजन लगाने से क्या होगा?
इंजीनियरिंग में संतुलन सबसे जरूरी है। अगर हम नियमों से हटकर छोटा या बड़ा इंजन लगा दें, तो क्या होगा?
यदि कम हॉर्सपावर (Under-powered) का इंजन यूज़ करेंगे:
- इंजन का दम फूटना: हाइड्रोलिक प्रेशर लोड बढ़ते ही इंजन का आरपीएम (RPM) अचानक गिर जाएगा और इंजन बंद (Stall) हो जाएगा।
- मेंटेनेंस का खर्च बढ़ना: इंजन हमेशा अपनी क्षमता से 100% ऊपर काम करेगा, जिससे पिस्टन, रिंग और गियरबॉक्स जल्दी खराब होंगे।
- फ्यूल कंजम्पशन बढ़ना: कम ताकत होने के कारण इंजन को ज्यादा तेल खींचना पड़ेगा, जिससे डीजल की भारी बर् खपत होगी।
- काम की रफ्तार धीमी होना: जो ब्लॉक 2 घंटे में खत्म होना चाहिए, वह मशीन की धीमी स्पीड के कारण 4 घंटे खींच जाएगा, जिससे ट्रेनें लेट होंगी।
यदि ज्यादा हॉर्सपावर (Over-powered) का इंजन यूज़ करेंगे:
- डीजल की बर्बादी: बिना जरूरत के बहुत बड़ा इंजन लगाने से मशीन जब खाली खड़ी (Idle) होगी, तब भी बहुत ज्यादा डीजल पी जाएगी।
- मशीन का वजन बढ़ना: ज्यादा हॉर्सपावर का इंजन आकार में बड़ा और भारी होता है, जिससे मशीन का एक्सेल लोड (Axle Load) बढ़ जाएगा, जो ट्रैक के लिए सुरक्षित नहीं है।
- गियरबॉक्स टूटना: यदि इंजन बहुत ज्यादा ताकत पैदा करेगा और आगे की मशीनरी या गियरबॉक्स उस ताकत को झेलने के लिए डिज़ाइन नहीं हैं, तो गियरबॉक्स के दांत (Teeth) टूट जाएंगे।
❄️ एयर-कूल्ड (Air-Cooled) बनाम वॉटर-कूल्ड (Water-Cooled) इंजन: कौन सा बेस्ट है?
रेलवे की लिस्ट में दोनों तरह के इंजनों का उपयोग होता है:
- एयर-कूल्ड इंजन (Air-Cooled – जैसे जर्मनी का Deutz Engine): इनमें रेडिएटर या कूलेंट नहीं होता। एक भारी ब्लोअर पंखा सीधे हवा से इंजन को ठंडा करता है। यह बैलास्ट क्लीनिंग मशीन (BCM) के लिए सबसे बेस्ट है। क्योंकि गिट्टी छानते समय उड़ने वाली धूल वॉटर-कूल्ड इंजन के रेडिएटर को चोक (Choke) कर देती है, जिससे पानी उबलने लगता है। एयर-कूल्ड में यह खतरा नहीं होता।
- वॉटर-कूल्ड इंजन (Water-Cooled – जैसे Cummins/Caterpillar): इनमें कूलेंट और पानी के जरिए इंजन ठंडा होता है। यह 700 से 1200 Hp के भारी इंजनों के लिए बेस्ट है, क्योंकि यह इंजन के तापमान को एकदम सटीक और समान बनाए रखता है, जिससे इंजन लंबे समय तक बिना गर्म हुए भारी टॉर्क दे पाता है।
Indian Railway Track Machines Engine Master Database
श्रेणी 1: टैंपिंग और स्टेबलाइजिंग मशीनें (Tamping & Stabilizing Fleet)
ये मशीनें पटरियों के नीचे कंक्रीट स्लीपर्स के बीच गिट्टियों की पैकिंग का काम करती हैं और इनमें भारी-भरकम Track Machines Engine का उपयोग होता है।
ध्यान दें (Must Read): नीचे दी गई तालिका में शामिल सभी Track Machines Engine का डेटा पूरी तरह से प्रामाणिक है। यदि आप रेलवे परीक्षा या शेड मेंटेनेंस की तैयारी कर रहे हैं, तो यह सूची आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित होने वाली है!
| सीरियल | मशीन का नाम (Machine Name) | मॉडल नंबर (Model No) | हॉर्सपावर (Horse Power) | आरपीएम (RPM) | निर्माता (Make) | इंजन संख्या (No. of Engine) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | WST Plasser (08-32) | NTA 855 L | 375 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 2 | WST Imported (09-32C) | NTA 855 L | 375 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 3 | Tamping Express Plasser | KTA-1150 L & NTA-855 | 473 Hp & 360 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 2 (डबल पावर) |
| 4 | WST Kakgapatnam (Without flat car) | QSM11 | 305 Hp | @ 1900 rpm | Cummins | 1 |
| 5 | WST SAN | QSM11 | 360 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 6 | UNIMAT 4S Plasser | KTA-1150 L | 468 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 7 | UNIMAT MFI Plasser | KTA-1150 L | 469 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 8 | MPT-UNIMAT 275 SH MFI Plasser | QSN-14L | 405 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 9 | UNIMAT COM-M Plasser | NTA 855 L-BC | 335 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 10 | CSM (New) Plasser | KTA-1150 L | 473 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 11 | DGS Plasser (Track Stabilizer) | KTA-1150 L | 473 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 12 | DTE (New) Plasser (Dynamic Tamping) | C18 | 700 Hp | @ 2100 rpm | Caterpillar | 1 |
| 13 | CSM (Old) Plasser | TBD 232 V12 | 473 Hp | @ 2000 rpm | MWM Greaves | 1 |
ऊपर दी गई तालिका में आपने प्रमुख टैंपिंग और स्टेबलाइजिंग Track Machines Engine की पूरी सूची देखी।
भारतीय रेलवे की पहली 2 स्लीपर कूटने वाली मशीन: Duomatic 08-32 का इतिहास और सच
श्रेणी 2: बैलास्ट क्लीनिंग, शोल्डर और रेगुलेटिंग मशीनें (Ballast Cleaning & Screening Fleet) में प्रयोग होने वाले Track Machines Engine
इनका काम ट्रैक के नीचे जमी धूल को छानना है और इस हैवी ड्यूटी काम के लिए सबसे शक्तिशाली Track Machines Engine की आवश्यकता होती है।
| सीरियल | मशीन का नाम (Machine Name) | मॉडल नंबर (Model No) | हॉर्सपावर (Horse Power) | आरपीएम (RPM) | निर्माता (Make) | इंजन संख्या (No. of Engine) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | BCM Gemac | QSK19-C500-S30 | 500 Hp | @ 2000 rpm | Cummins | 2 (Total 1000 Hp) |
| 2 | SBCM Plasser | VTA 1710 L | 737 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 3 | SBCM / KSC-600 | VT 28-P | 800 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 4 | BRM PBR 400R Plasser | NT 855 L | 240 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 5 | BRM USP 2000 SWS Plasser | KTA-1150 L | 469 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 6 | BRM Gemac | BF12L513C | 359 Hp | @ 2300 rpm | Cummins | 1 |
| 7 | BCM RM-80 Plasser | BF12L513C | 453 Hp | @ 2100 rpm | Deutz | 2 (Total 906 Hp) |
| 8 | BCM RM-76 Plasser | BF12L513C | 396 Hp | @ 2300 rpm | Deutz | 1 |
| 9 | BCM Plasser | BF8M-1015CP | 335 Hp | @ 2100 rpm | Deutz | 2 |
| 10 | BCM RM 80-92U Plasser | BF12L513C | 453 Hp | @ 2300 rpm | Deutz | 2 |
| 11 | SBCM Plasser | C-18 | 700 Hp | @ 2100 rpm | Caterpillar | 1 |
| 12 | SBCM CRCC | C-18 | 765 Hp | @ 2100 rpm | Caterpillar | 1 |
| 13 | HOBCM Plasser | C27 | 783 Hp | @ 1900 rpm | Caterpillar | 2 (Total 1566 Hp) |
| 14 | SBCM, FRM-80 Plasser | TBD 234 V12 | 470 Hp | @ 2300 rpm | MWM Greaves | 1 |
बैलास्ट क्लीनिंग फ्लीट का प्रत्येक Track Machines Engine भारी धूल और कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए बनाया जाता है।
श्रेणी 3: रेल ग्राइंडिंग, मिलिंग और हैवी-ड्यूटी मशीनें (Rail Grinding & Milling Monsters)
पटरियों की घिसाई करने वाले इन मॉन्स्टर्स को चलाने के लिए मल्टीपल Track Machines Engine का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल किया जाता है।
| सीरियल | मशीन का नाम (Machine Name) | मॉडल नंबर (Model No) | हॉर्सपावर (Horse Power) | आरपीएम (RPM) | निर्माता (Make) | इंजन संख्या (No. of Engine) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | RGM-96 Stone Loram | QST 30 G5 | 1207 Hp | @ 1800 rpm | Cummins | 4 (Total 4828 Hp) |
| 2 | RGM-72 Stone Loram | QST 30 G5 | 1207 Hp | @ 1800 rpm | Cummins | 3 (Total 3621 Hp) |
| 3 | SRGM Loram | QST 30 G5 | 1207 Hp | @ 1800 rpm | Cummins | 1 |
| 4 | SRGM Harsco | C27 V-12 | 1105 Hp | @ 1800 rpm | Caterpillar | 1 |
| 5 | RMM Linsinger | C32 | 895 Kw (~1200 Hp) | @ 1800 rpm | Caterpillar | 1 |
| 6 | TRT Harsco (Track Relaying Train) | QSX15 | 450 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 7 | TRT (Old) Harsco | NTA-855 C | 360 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
रेल ग्राइंडिंग और मिलिंग मॉन्स्टर्स का Track Machines Engine हाई-टॉर्क जेनरेट करने में सबसे आगे माना जाता है।
श्रेणी 4: यूटिलिटी व्हीकल्स, क्रेन और स्वदेशी गाड़ियां (UTVs & Light Fleet)
सामान ढोने, क्रेन ऑपरेट करने और छोटे मेंटेनेंस कार्यों के लिए इनका उपयोग होता है।
| सीरियल | मशीन का नाम (Machine Name) | मॉडल नंबर (Model No) | हॉर्सपावर (Horse Power) | आरपीएम (RPM) | निर्माता (Make) | इंजन संख्या (No. of Engine) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | UTV Phooltas | NTA 855 L | 400 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 2 | UTV BHEL | NTA 855 L | 400 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 3 | UTV BEML | NTA 855 L | 400 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 4 | UTV SAN | NTA 855 L | 400 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 5 | BRM Hubei Sida | QSNT-C360-S30 | 361 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 1 |
| 6 | RBMV-01-B Phooltas | NTA-855 R | 285 Hp | @ 2100 rpm | Cummins | 2 |
| 7 | TLE Simplex | HA-694 | 96 Hp | @ 2000 rpm | Kirloskar | 1 |
| 8 | PCCM colmar | TAD570-72VE | 170 Hp | @ 2300 rpm | Volvo Penta | 1 |
| 9 | RBMV-04-B Phooltas | N6 CRS | 450 Hp | @ 2200 rpm | Ashok Leyland | 2 (Total 900 Hp) |
| 10 | UTV (Phooltas) | AL690 TV5 | 450 Hp | @ 2200 rpm | Ashok Leyland | 1 |
यूटिलिटी और स्वदेशी गाड़ियों में लगा Track Machines Engine पूरी तरह से किफायती और मेंटेनेंस में आसान होता है।
हमारे पिछले ब्लॉग में हमने जाना था कि Track Machines Engine के अलावा रेलवे टैंपिंग मशीन के कौन से मुख्य काम होते हैं।
Railway Tamping Machine क्या है? 3 मुख्य काम, प्रकार, फायदे और पूरी जानकारी
✍️ निष्कर्ष (Conclusion)
तो दोस्तों, अब आप समझ गए होंगे कि रेलवे में Track Machines Engine का चयन कितना बड़ा विज्ञान है। RDSO की टीम हर मशीन के काम और उसके लोड को देखकर ही यह डिसाइड करती है कि उसमें कितने हॉर्सपावर और कौन सा कूलिंग सिस्टम (एयर या वॉटर-कूल्ड) लगाना है। इन सटीक और बाहुबली इंजनों की बदौलत ही आज हमारी भारतीय रेलवे का ट्रैक पूरी तरह से दुरुस्त और सुरक्षित रहता है।
आपके शेड या डिवीजन में इस समय कौन सा Track Machines Engine सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस दे रहा है? Cummins या Caterpillar? नीचे कमेंट में अपनी राय तुरंत साझा करें
आपको इन सभी मशीनों में से सबसे दमदार इंजन और मशीन कौन सी लगी? क्या आपके शेड में इनमें से कोई मशीन काम कर रही है? नीचे कमेंट सेक्शन में अपनी राय हमारे साथ जरूर शेयर करें! इस विस्तृत और रिसर्च-बेस्ड पोस्ट को अपने अन्य रेल दोस्तों और कर्मचारियों के साथ शेयर करना बिल्कुल न भूलें।
हमें उम्मीद है कि भारतीय रेलवे की Track Machines Engine पर आधारित यह विस्तृत और प्रामाणिक गाइड आपको पसंद आया होगा।
पाठकों की सुविधा और Track Machines Engine से जुड़े कुछ अन्य तकनीकी संशयों को दूर करने के लिए, हमने नीचे कुछ मुख्य सवाल-जवाब (FAQs) शामिल किए हैं। ये प्रश्न आपको Track Machines Engine की कार्यप्रणाली को और गहराई से समझने में मदद करेंगे
❓ अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1. भारतीय रेलवे में सबसे शक्तिशाली Track Machines Engine कौन सा है?
Ans: भारतीय रेलवे के बेड़े में सबसे शक्तिशाली इंजन RGM-96 (Rail Grinding Machine) में लगा हुआ है। इस महाकाय मशीन में 1207 Hp के 4 Cummins इंजन लगे हैं, जो कुल मिलाकर 4,828 Horsepower की भारी ताकत पैदा करते हैं।
Q2. क्या सभी रेलवे शेड्स में Track Machines Engine का मेंटेनेंस खुद किया जाता है?
Ans: जी नहीं, छोटे-मोटे मेंटेनेंस स्थानीय स्तर पर होते हैं, लेकिन इंजनों के भारी ओवरहॉलिंग (POH) और विशेष तकनीकी सुधारों के लिए इन्हें RDSO के कड़े नियमों के तहत CPOH वर्कशॉप (जैसे इलाहाबाद/प्रयागराज) भेजा जाता है।
Q3. रेलवे अपनी मशीनों में कौन-कौन से ब्रांड के Track Machines Engine का उपयोग करता है?
Ans: भारतीय रेलवे मुख्य रूप से दुनिया के सबसे भरोसेमंद ब्रांड्स जैसे Cummins, Caterpillar, Deutz (जर्मनी) और भारत के अपने स्वदेशी Ashok Leyland और Kirloskar इंजनों का उपयोग करता है।
⚠️ डिस्क्लेमर: इस ब्लॉग में दी गई सभी तकनीकी जानकारियां और आंकड़े केवल शैक्षिक (Educational) और सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से हैं। यह भारतीय रेलवे की कोई आधिकारिक (Official) वेबसाइट नहीं है। नवीनतम और सटीक नियमों के लिए कृपया रेलवे बोर्ड या RDSO के आधिकारिक दिशानिर्देशों को ही सही मानें।