Indian Railway Leave Rules
भारतीय रेलवे में आज हम जिन छुट्टियों का लाभ उठा रहे हैं, उनकी असली शुरुआत कब हुई थी? आज से दशकों पहले, ब्रिटिश काल के दौरान रेल कर्मचारियों के लिए छुट्टियां बहुत ही जटिल और सीमित हुआ करती थीं। देश आज़ाद होने के बाद, भारत सरकार और रेलवे बोर्ड ने यह महसूस किया कि रेल कर्मचारियों की कठिन ड्यूटी को देखते हुए नियमों को आसान और अधिक कल्याणकारी बनाना बेहद ज़रूरी है
, 1 फरवरी 1949 को पहली बार आधिकारिक तौर पर ‘उदारकृत अवकाश नियम’ (Liberalised Leave Rules) लागू किए गए। इन नए नियमों का मुख्य मकसद कर्मचारियों को लंबी बीमारी, बच्चों के जन्म, पढ़ाई और परिवार के साथ समय बिताने के लिए अधिक उदारता (रियायत) से छुट्टियां देना था। तब से लेकर आज तक, इन नियमों में समय-समय पर कई बड़े और आधुनिक बदलाव किए गए हैं, लेकिन इस पूरी व्यवस्था की असल नींव साल 1949 में ही रखी गई थी।
रेलवे विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए छुट्टियों के क्या कायदे-कानून हैं, इसकी पूरी जानकारी रेलवे की स्थापना नियमावली (स्थापना कोड) में दी गई है। इसे सरकारी दफ्तरों में उदारकृत अवकाश नियमों के नाम से भी जाना जाता है।
यदि आप एक रेल कर्मचारी हैं, या रेलवे में आने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन बातों को विस्तार से जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। अक्सर सही जानकारी न होने के कारण कई कर्मचारी अपनी हक की छुट्टियां सही समय पर नहीं ले पाते या रिटायरमेंट के समय छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे (लीव एनकैशमेंट) में बड़ा वित्तीय नुकसान उठा बैठते हैं।
1: रेलवे छुट्टियों की बुनियादी शर्तें और जरूरी बातें
रेलवे में कोई भी छोटी या बड़ी छुट्टी अप्लाई करने से पहले हर एक कर्मचारी को उन बुनियादी शर्तों का पता होना चाहिए, जिन पर पूरा रेलवे प्रशासन काम करता है।
क्या रेलवे में छुट्टी पाना कर्मचारी का जन्मसिद्ध अधिकार है?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर रेलवे दफ्तरों और स्टेशनों पर सबसे ज्यादा बहस होती है। कई कर्मचारियों को लगता है कि उनके खाते में छुट्टियां जमा हैं, तो बड़े बाबू या अधिकारी उसे मना नहीं कर सकते। लेकिन रेलवे प्रशासन के कायदे इस बात को पूरी तरह साफ करते हैं।
- प्रशासन का अंतिम फैसला: रेलवे के नियमों के मुताबिक, छुट्टी को कभी भी एक कानूनी अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता। यदि रेलवे में काम का दबाव बहुत ज्यादा है (जैसे दिवाली, छठ पूजा या गर्मियों की स्पेशल ट्रेनों का सीजन), तो आपका विभाग आपके छुट्टी के आवेदन को सीधे नामंजूर (Refuse) कर सकता है।
- छुट्टी के बीच से वापस बुलाना: मान लीजिए आपकी 10 दिन की छुट्टी मंजूर हो चुकी है और आप अपने घर पर आराम कर रहे हैं? लेकिन अचानक स्टेशन या डिपो में कोई आपातकालीन स्थिति आ जाती है या स्टाफ की भारी कमी हो जाती है, तो प्रशासन जनहित में आपकी छुट्टी बीच में ही रद्द करके आपको तुरंत ड्यूटी पर वापस बुला सकता है।
- कर्मचारियों के हक में सुरक्षा कवच: इस कड़े नियम में कर्मचारियों के लिए भी एक बहुत बड़ी राहत दी गई है। कोई भी अधिकारी अपनी मर्जी से आपकी छुट्टी का प्रकार नहीं बदल सकता। उदाहरण के लिए, यदि किसी पॉइंट्समैन ने अपने घर में शादी के लिए ‘औसत वेतन पर छुट्टी’ (LAP) अप्लाई की है, तो अधिकारी उसकी छुट्टी मंजूर या नामंजूर तो कर सकता है, लेकिन वह अपनी मर्जी से यह नहीं कह सकता कि “मैं तुम्हारी LAP मंजूर नहीं करूँगा, इसकी जगह तुम्हारी हाफ-पे लीव (LHAP) काट रहा हूँ।” छुट्टी का स्वरूप बदलने का अधिकार केवल कर्मचारी के पास है। जब तक कर्मचारी खुद लिखित में इसकी मांग न करे, अधिकारी इसमें बदलाव नहीं कर सकता।
नौकरी से हटने, अचानक इस्तीफा देने या बर्खास्तगी पर छुट्टियों का क्या होता है?
जब कोई कर्मचारी रेलवे की नौकरी छोड़ता है या उसे किसी कारणवश हटाया जाता है, तो उसके छुट्टियों के खाते (Leave Account) पर इसका सीधा असर पड़ता है।
- नौकरी से बर्खास्तगी (Dismissal or Removal): यदि किसी रेल कर्मचारी को किसी गंभीर अनुशासनहीनता या विभागीय जांच के तहत नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है या सेवा से हटा दिया जाता है, तो उसके खाते में बची हुई सभी छुट्टियां उसी दिन पूरी तरह से समाप्त (Lapse) हो जाती हैं। उन बची हुई छुट्टियों के बदले कर्मचारी या उसके परिवार को कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलता।
- साधारण इस्तीफा (Ordinary Resignation): यदि कोई कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के कारण अचानक नौकरी से इस्तीफा दे देता है, तो उसकी भी बची हुई छुट्टियां सामान्यतः समाप्त मान ली जाती हैं (रिटायरमेंट के विशेष नियमों को छोड़कर)।
‘तकनीकी इस्तीफा’ (Technical Resignation) का बड़ा फायदा
मान लीजिए सुरेश जी रेलवे में ग्रुप सी के पद पर काम कर रहे हैं। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने एक अन्य सरकारी परीक्षा पास कर ली और उन्हें किसी दूसरे केंद्रीय मंत्रालय में बड़ा पद मिल गया।
यदि सुरेश जी रेलवे से साधारण इस्तीफा देकर चले जाते हैं, तो उनकी रेलवे की बची हुई मान लीजिए 100 दिन की छुट्टियां पूरी तरह जीरो हो जाएंगी।
लेकिन अगर सुरेश जी ने नए फॉर्म को भरते समय ही अपने रेलवे विभाग को सूचित किया था और वे अब उचित माध्यम (Proper Channel) से अपना ‘तकनीकी इस्तीफा’ (Technical Resignation) जमा करते हैं, तो रेलवे के नियमों के तहत उनकी छुट्टियां खत्म नहीं होंगी। रेलवे प्रशासन उनकी बची हुई सभी छुट्टियों को उनके नए सरकारी विभाग के खाते में ट्रांसफर कर देगा। इससे कर्मचारी को एक भी छुट्टी का नुकसान नहीं होता।
गैर-कानूनी हड़ताल पर जाने का छुट्टियों और नौकरी पर क्या असर पड़ता है?
रेलवे देश की लाइफलाइन है, इसलिए यहाँ बिना बताए काम रोकने या हड़ताल पर जाने को लेकर कानून बहुत कड़े हैं।
- सर्विस में रुकावट (Break in Service): यदि कुछ कर्मचारी बिना किसी कानूनी नोटिस के या तय प्रक्रियाओं के खिलाफ जाकर अचानक गैर-कानूनी हड़ताल पर चले जाते हैं, तो प्रशासन उनकी सेवा में ‘ब्रेक’ (रूकावट) मान लेता है। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि हड़ताल से पहले की गई उनकी पूरी नौकरी का सीनियरिटी लाभ खतरे में पड़ जाता है।
- किस हड़ताल में जा सकते हैं (कानूनी): केवल वही हड़ताल सुरक्षित है जिसका नोटिस मान्यता प्राप्त रेलवे यूनियन (जैसे AIRF/NFIR) ने पूरी कानूनी प्रक्रिया और स्ट्राइक बैलेट कराकर प्रशासन को एडवांस में दिया हो। इसमें नौकरी जाने या सर्विस ब्रेक का खतरा नहीं होता।
किस हड़ताल में नहीं जा सकते (गैर-कानूनी): बिना यूनियन के फैसले के, बिना किसी एडवांस लिखित नोटिस के, या अचानक कुछ कर्मचारियों द्वारा मिलकर काम बंद (Tool Down/Pen Down) कर देना पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसमें तुरंत ‘सर्विस में ब्रेक’ लग सकता है।
नोटिस किसको और कैसे देना होता है: हड़ताल पर जाने से कम से कम 14 दिन पहले (और 6 हफ्ते से अधिक पुराना न हो) यूनियन को लिखित रूप में महाप्रबंधक (General Manager – GM) या रेलवे प्रशासन के सक्षम अधिकारी को आधिकारिक स्ट्राइक नोटिस सौंपना अनिवार्य होता है। - ‘डायस-नॉन’ (Dies-non) का व्यावहारिक मतलब: यह एक प्रशासनिक शब्द है जिसका सीधा मतलब होता है—”वह दिन जो गिनती में नहीं है।” यदि प्रशासन कर्मचारियों के पिछले अच्छे रिकॉर्ड को देखते हुए थोड़ी ढील देता है और नौकरी से नहीं निकालता, तो हड़ताल के उन दिनों को ‘डायस-नॉन’ घोषित कर दिया जाता है।
- नुकसान क्या होता है? डायस-नॉन वाले दिनों का कर्मचारी को कोई वेतन नहीं मिलता। साथ ही, वे दिन कर्मचारी की कुल सर्विस में से घटा दिए जाते हैं, जिससे भविष्य में मिलने वाले पेंशन लाभ और छमाही में मिलने वाली नई छुट्टियों के बैलेंस पर सीधा और बुरा असर पड़ता है।
क्या छुट्टी के बीच में उसका प्रकार बदला जा सकता है?
यह नियम रेल कर्मचारियों को एक विशेष लचीलापन (Flexibility) देता है, जो कई बार बहुत मददगार साबित होता है।
- बदलाव का नियम: मान लीजिए किसी कर्मचारी ने अपने निजी काम के लिए 15 दिन की साधारण छुट्टी ली थी। लेकिन छुट्टी पर जाने के दो दिन बाद ही वह अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अब कर्मचारी चाहता है कि उसकी यह छुट्टी मेडिकल लीव में बदल जाए ताकि उसकी साधारण छुट्टियां बच सकें।
- शर्त क्या है? नियमों के अनुसार, कर्मचारी ड्यूटी पर वापस लौटने से पहले सक्षम अधिकारी को उचित मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ नया आवेदन देकर अपनी पुरानी छुट्टी को मेडिकल लीव में बदलवा सकता है।
- सबसे बड़ा पेंच: एक बार कर्मचारी ने अपनी छुट्टी की अवधि पूरी कर ली और वापस आकर दफ्तर में ड्यूटी जॉइन (Resume Duty) कर ली, उसके बाद वह अपनी पुरानी छुट्टियों के प्रकार को बदलने का दावा नहीं कर सकता। जो भी बदलाव होना है, वह छुट्टी पर रहने के दौरान ही होना चाहिए।
छुट्टियों को आपस में मिलाने और वीकेंड (Sundays) को जोड़ने के क्या नियम हैं?
रेलवे के नियमों के अनुसार, कर्मचारी अपने खाते में जमा अलग-अलग प्रकार की लंबी छुट्टियों (जैसे साधारण छुट्टी and हाफ-पे लीव) को एक साथ मिलाकर (Combine करके) एक लंबी छुट्टी ले सकता है।
- कैजुअल लीव (CL) का सख्त नियम: आकस्मिक अवकाश यानी कैजुअल लीव (Casual Leave) को तकनीकी रूप से लंबी छुट्टियों की श्रेणी में नहीं माना जाता, बल्कि इसे ड्यूटी से एक छोटी रियायती अनुपस्थिति माना जाता है। इसलिए, CL को कभी भी LAP या मेडिकल लीव जैसी लंबी छुट्टियों के साथ मिलाकर नहीं लिया जा सकता। यदि आप CL ले रहे हैं, तो उसके तुरंत आगे या पीछे आप लंबी छुट्टियां नहीं जोड़ सकते।
- छुट्टियों को आगे या पीछे जोड़ना (Prefix & Suffix): यह नियम कर्मचारियों को अपनी छुट्टियों को और लंबा बनाने की सुविधा देता है। छुट्टी शुरू होने से ठीक पहले आने वाले रविवार या त्योहार को आगे जोड़ना ‘प्रिफिक्स’ कहलाता है, और छुट्टी खत्म होने के ठीक बाद आने वाले सरकारी अवकाश को पीछे जोड़ना ‘सफिक्स’ कहलाता है।
- उदाहरण: मान लीजिए सोमवार से लेकर शुक्रवार तक (5 दिन) आपने छुट्टी ली है। चूंकि शनिवार और रविवार को दफ्तर बंद रहता है, तो आप अपनी 5 दिन की छुट्टी के पीछे उन 2 दिनों को ‘सफिक्स’ के रूप में जोड़ सकते हैं। इससे आप पूरे 7 दिन बाहर रह सकते हैं, लेकिन आपके खाते से केवल 5 दिन की ही छुट्टी कटेगी।
क्या छुट्टी के दौरान बाहर कोई दूसरा काम या बिजनेस किया जा सकता है?
कई कर्मचारियों के मन में यह विचार आता है कि जब हम 2 या 3 महीने की लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं, तो क्यों न बाहर कोई प्राइवेट काम या पार्ट-टाइम बिजनेस करके एक्स्ट्रा कमाई कर ली जाए। रेलवे के नियम इस पर पूरी तरह से रोक लगाते हैं।
- पूर्ण प्रतिबंध: कोई भी रेल कर्मचारी, जब तक वह छुट्टी पर है (चाहे वह बिना वेतन की छुट्टी पर ही क्यों न हो), भारत सरकार की लिखित और विशेष मंजूरी के बिना बाहर कोई भी कमर्शियल नौकरी, प्राइवेट व्यापार या कंसल्टेंसी का काम नहीं कर सकता।
- यदि कोई कर्मचारी इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो इसे गंभीर कदाचार माना जाता है और उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
- नोट: इस नियम का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप छुट्टी लेकर अपने निजी काम जैसे ज़मीन की रजिस्ट्री, बैंक खाता खुलवाना, पासपोर्ट बनवाना या कोर्ट के काम नहीं कर सकते। प्रतिबंध केवल बाहर से पैसा कमाने, प्राइवेट नौकरी या नया बिजनेस शुरू करने पर है।”
कोई कर्मचारी लगातार अधिकतम कितने समय तक छुट्टी पर रह सकता है?
यह नियम उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो बिना बताए सालों-साल गायब रहते हैं या विदेश चले जाते हैं।
- 5 वर्ष की आखिरी सीमा: देश के राष्ट्रपति की विशेष और असाधारण मंजूरी के बिना, कोई भी रेल कर्मचारी लगातार 5 वर्ष से अधिक अवधि तक किसी भी प्रकार की छुट्टी पर नहीं रह सकता।
- इसमें आपकी साधारण छुट्टियां, मेडिकल लीव और बिना वेतन की छुट्टियां सब कुछ जोड़कर देखा जाता है। यदि कोई कर्मचारी लगातार 5 साल तक ड्यूटी पर नहीं लौटता है, तो यह मान लिया जाता है कि उसने अपनी मर्जी से इस्तीफा दे दिया है और उसका नाम रेलवे के रिकॉर्ड से हमेशा के लिए काट दिया जाता है।
छुट्टी की प्रक्रिया, कड़े दफ्तर कानून और मेडिकल लीव की बारीक शर्तें
अब हम बात करेंगे उस व्यावहारिक प्रक्रिया (Practical Process) की, जिससे हर रेल कर्मचारी को अपनी नौकरी के दौरान गुजरना पड़ता है। छुट्टी कैसे अप्लाई होती है, दफ्तर में उसका हिसाब कैसे रखा जाता है और बीमारी के दौरान क्या पेचीदगियां आती हैं !
रेलवे में छुट्टी अप्लाई करने और मंजूर होने का असली पैमाना क्या है?
जब भी किसी रेल कर्मचारी को छुट्टी की जरूरत होती है, तो वह सिर्फ मौखिक या ज़ुबानी कहकर दफ्तर से गायब नहीं हो सकता। उसके लिए एक व्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई है।
- अग्रिम सूचना का नियम: बहुत जरूरी आपातकालीन स्थितियों (जैसे अचानक परिवार में कोई हादसा या गंभीर बीमारी) को छोड़कर, सामान्य दिनों में कर्मचारी को अपनी छुट्टी शुरू होने की तारीख से कम से कम 2 महीने पहले दफ्तर में लिखित या ऑनलाइन आवेदन देना होता है। इसे तकनीकी तौर पर ‘फॉर्म-11’ के माध्यम से जमा किया जाता है। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि आपके इंचार्ज आपकी अनुपस्थिति के दौरान ट्रेनों के संचालन या दफ्तर के काम को संभालने के लिए किसी दूसरे कर्मचारी की ड्यूटी (Roster Arrangement) समय रहते तय कर सकें।
- “इसे तकनीकी तौर पर ‘फॉर्म-11’ (Standard Form-11) के माध्यम से या ऑनलाइन HRMS पोर्टल के ज़रिए जमा किया जाता है।”
- छुट्टी मंजूर करते समय अधिकारी क्या देखते हैं? मान लीजिए एक ही स्टेशन या डिपो में 5 अलग-अलग कर्मचारियों ने एक ही त्योहार (जैसे दिवाली या छठ पूजा) पर घर जाने के लिए छुट्टी मांग ली है। चूंकि रेलवे एक पब्लिक ट्रांसपोर्ट है, इसलिए सबको एक साथ छुट्टी नहीं दी जा सकती। ऐसी स्थिति में सक्षम अधिकारी कर्मचारियों का पुराना रिकॉर्ड देखता है। जैसे— किस कर्मचारी ने पिछले त्योहार पर ड्यूटी की थी, किसकी घरेलू जरूरत कितनी गंभीर है, और किसने पिछले कई महीनों से कोई छुट्टी नहीं ली है। इन सब बातों को तौलकर ही अधिकारी प्राथमिकता तय करता है।
दफ्तर में आपकी छुट्टियों का हिसाब-किताब कौन रखता है?
आपकी कितनी छुट्टियां बची हैं और उनका लेखा-जोखा कैसे होता है, इसके लिए भी कड़े नियम हैं।
- लीव अकाउंट का रखरखाव: हर रेल कर्मचारी (चाहे वह ग्रुप ए, बी, सी या डी का हो) का एक व्यक्तिगत ‘लीव अकाउंट’ (छुट्टियों का खाता) पर्सनल डिपार्टमेंट (Personnel Branch) या ऑनलाइन एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर मेंटेन किया जाता है। इसमें आपकी एक-एक छुट्टी का पूरा हिसाब दर्ज होता है।
- छुट्टियों का वेरिफिकेशन: जब भी आप किसी लंबी छुट्टी के लिए अप्लाई करते हैं, तो आपका फॉर्म सीधे बड़े अधिकारी के पास साइन होने नहीं जाता। वह पहले लीव क्लर्क या एकाउंट्स विभाग के पास जाता है। वे आपके रिकॉर्ड को चेक करके फॉर्म पर एक वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट लिखते हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि आपके खाते में वाकई उतनी छुट्टियां बची हैं जितनी आपने मांगी हैं। इसके बाद ही अधिकारी अंतिम मंजूरी देता है।
क्या प्रशासन छुट्टी पर चल रहे कर्मचारी को वापस बुला सकता है?
यह नियम पूरी तरह से रेलवे अनुशासन और आपातकालीन स्थितियों से जुड़ा हुआ है।
- ड्यूटी पर वापस बुलाना (Recall to Duty): मान लीजिए कोई मुख्य टिकट निरीक्षक (CTI) 20 दिन की मंजूरशुदा छुट्टी लेकर अपने गांव गया हुआ है। लेकिन अचानक रेलवे में कोई बड़ी वीआईपी मूवमेंट आ जाती है या स्टाफ की भारी कमी हो जाती है, तो सक्षम अधिकारी कर्मचारी को छुट्टी के बीच में ही वापस ड्यूटी पर लौटने का आधिकारिक आदेश जारी कर सकता है।
- कर्मचारी को मिलने वाली विशेष रियायतें: चूंकि कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना प्रशासनिक जरूरत के लिए बीच में बुलाया जा रहा है, इसलिए रेलवे उसे कुछ विशेष लाभ देता है:
- गांव से वापस ड्यूटी स्टेशन तक आने का जो भी यात्रा समय (Journey Time) होगा, वह उसकी छुट्टी में से नहीं काटा जाएगा, बल्कि उसे ‘ऑन ड्यूटी’ माना जाएगा।
- वापस आने के लिए उसे नियमानुसार फ्री रेलवे पास या यात्रा भत्ता (TA) दिया जाता है।
गंभीर अनुशासनहीनता या जांच के दौरान छुट्टी का नियम
रेलवे के नियमों में यह साफ कर दिया गया है कि किन हालातों में कर्मचारी को छुट्टी देने पर पूरी तरह बैन रहता है।
- छुट्टी कब नहीं दी जा सकती: यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी या अनुशासनहीनता का मामला चल रहा है, और विभाग ने उसे नौकरी से बर्खास्त करने या हटाने का अंतिम मन बना लिया है, तो उस कर्मचारी को किसी भी कीमत पर कोई छुट्टी मंजूर नहीं की जा सकती। ऐसी स्थिति में उसका लीव अकाउंट तुरंत फ्रीज कर दिया जाता है ताकि वह कानूनी कार्रवाई से बच न सके।
छुट्टी से वापस लौटने और फिटनेस साबित करने का कायदा क्या है?
छुट्टी पूरी होने के बाद दफ्तर में दोबारा एंट्री करने के भी कुछ कानूनी नियम हैं।
- मंजूरी से पहले वापसी नहीं: कोई भी कर्मचारी अपनी मंजूर की गई छुट्टी की अवधि समाप्त होने से पहले अपनी मर्जी से अचानक आकर ड्यूटी जॉइन नहीं कर सकता, जब तक कि उसका कंट्रोलिंग ऑफिसर उसे इसकी लिखित अनुमति न दे दे।
- मेडिकल फिटनेस का सख्त नियम: यह सबसे जरूरी नियम है। यदि कोई रेल कर्मचारी चिकित्सा आधार (Medical Certificate) पर छुट्टी पर गया था, तो वह सीधे आकर अपनी सीट पर नहीं बैठ सकता। ड्यूटी जॉइन करने से पहले उसे डॉक्टर द्वारा जारी किया गया ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ जमा करना होगा। डॉक्टर जब तक लिखित में यह प्रमाणित नहीं करेगा कि कर्मचारी अब पूरी तरह स्वस्थ है और काम का बोझ संभालने के लायक है, तब तक प्रशासन उसे ड्यूटी पर नहीं लेता।
चिकित्सा आधार (Medical Certificate) पर छुट्टी लेने की बारीक शर्तें
रेलवे में बीमारी के नाम पर फर्जी छुट्टियां लेने या छुट्टियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए रेलवे बोर्ड ने बहुत ही कड़े और स्पष्ट नियम बनाए हैं।
- सिक मेमो (Sick Memo) की व्यवस्था: यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान बीमार होता है, तो पहली प्राथमिकता यह है कि वह रेलवे अस्पताल या रेलवे हेल्थ यूनिट के डॉक्टर के पास जाए। वहां से मिलने वाले ‘सिक मेमो’ के आधार पर उसकी छुट्टी आसानी से मंजूर हो जाती है।
- प्राइवेट डॉक्टर का सर्टिफिकेट कब मान्य होगा? मान लीजिए कोई कर्मचारी छुट्टी लेकर अपने दूरदराज के गांव गया हुआ है, जहां आसपास कोई रेलवे अस्पताल नहीं है। वहां वह अचानक गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह किसी स्थानीय रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (प्राइवेट डॉक्टर) से इलाज करा सकता है। लेकिन ड्यूटी पर वापस आने पर उसे उस प्राइवेट डॉक्टर के पर्चे, मेडिकल सर्टिफिकेट और फिटनेस सर्टिफिकेट को बहुत ही साफ-सुथरे तरीके से आधिकारिक फॉर्मेट में जमा करना होगा।
व्यावहारिक केस स्टडी: “छुट्टियों के पीक सीजन में विशेष कड़ाई” Indian Railway Leave Rules
मान लीजिए गर्मियों की छुट्टियों (1 अप्रैल से 30 जून) और दिवाली/छठ पूजा के समय ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं होती। इस दौरान हर रेल कर्मचारी पर काम का भारी दबाव होता है। कई बार कुछ कर्मचारी इस दबाव से बचने के लिए अपने गांव के किसी प्राइवेट डॉक्टर से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा लेते हैं और घर बैठ जाते हैं।
इस चालाकी को रोकने के लिए रेलवे नियमों के तहत प्रशासन को विशेष शक्तियां दी गई हैं। प्रशासन एक आधिकारिक आदेश जारी कर सकता है कि इस ‘पीक सीजन’ के दौरान किसी भी ग्रुप सी या डी कर्मचारी द्वारा जमा किए गए प्राइवेट डॉक्टर के मेडिकल सर्टिफिकेट को सीधे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ऐसी स्थिति में क्या होता है? कर्मचारी को उस जिले के सरकारी सिविल सर्जन या जिला अस्पताल के डॉक्टर से अपने सर्टिफिकेट को री-वेरिफाई (Re-verify) कराने को कहा जा सकता है, या फिर रेलवे अपने किसी मेडिकल ऑफिसर को कर्मचारी के घर भेजकर उसकी बीमारी की औचक जांच (Surprise Check) करवा सकता है।
यदि कर्मचारी कभी ठीक न होने वाली स्थिति में हो (Permanently Incapacitated Staff)
कई बार नौकरी के दौरान किसी गंभीर हादसे या पुरानी लाइलाज बीमारी के कारण ऐसी स्थिति बन जाती है कि कर्मचारी अब कभी भी काम करने के लायक नहीं रह जाता।
- 12 महीने की विशेष राहत: यदि रेलवे की अधिकृत मेडिकल अथॉरिटी या मेडिकल बोर्ड लिखित में यह रिपोर्ट दे देता है कि इस कर्मचारी के भविष्य में कभी भी ठीक होने या ड्यूटी पर लौटने की कोई उम्मीद नहीं है, तो प्रशासन उसे सीधे नौकरी से बाहर नहीं फेंकता। उसे उसके खाते में बची हुई छुट्टियों के आधार पर अधिकतम 12 महीने (1 साल) तक की विशेष छुट्टी दी जा सकती है ताकि उसका परिवार अचानक वित्तीय संकट में न आए। जब यह छुट्टियां समाप्त हो जाती हैं, तब उसे सम्मानपूर्वक इनवैलिड पेंशन पर रिटायर कर दिया जाता है।
- “क्या ड्यूटी के दौरान चोट (Injury on Duty) लगने पर भी यही नियम है?”
- “नहीं, ड्यूटी के दौरान दुर्घटना होने पर WRIIL (Hospital Leave) के तहत कर्मचारी को पूरी सैलरी के साथ तब तक छुट्टी मिलती है जब तक वह पूरी तरह ठीक न हो जाए। यदि वह पूरी तरह अपाहिज हो जाता है, तो उसे नौकरी से निकालने के बजाय Alternative Post (वैकल्पिक नौकरी) पर पूरी सैलरी के साथ रखा जाता है।”
यदि कर्मचारी दफ्तर आने की स्थिति में भी न रहे तो क्या होगा? – अगर ऑन-ड्यूटी दुर्घटना के कारण कर्मचारी पूरी तरह बिस्तर पर आ जाए, तो भी रेलवे उसकी सैलरी बंद नहीं करता। उसे सुपरन्यूमरेरी पोस्ट पर रखकर पूरी सैलरी दी जाती है या फिर उसे इनवैलिड पेंशन देकर उसके परिवार के किसी एक सदस्य (बेटे/बेटी) को तुरंत रेलवे में अनुकंपा नौकरी दी जाती है।
“क्या सभी विभागों के लिए नियम एक समान हैं? – अस्पताल में भर्ती रहने तक सभी रेलकर्मियों (RPF, Engg, Workshop, Personnel) को पूरी सैलरी मिलती है। लेकिन डिस्चार्ज के बाद RPF के नॉन-गजेटेड जवानों को बिना किसी समय सीमा के पूरी जिंदगी (रिकवरी तक) फुल सैलरी मिलती है, जबकि अन्य स्टाफ को 6 महीने फुल पे और फिर मुआवजा कानून का लाभ मिलता है। ऑन-ड्यूटी दुर्घटना में जिम्मेदारी कभी खत्म नहीं होती, परिवार को अनुकंपा नौकरी या वैकल्पिक पद की गारंटी मिलती है।
- मेडिकली डी-कैटेगरीज़ कर्मचारी (Medically Decategorised Staff): मान लीजिए कोई लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) है, जिसकी आंखों की जांच (आई-टेस्ट) होती है। जांच में डॉक्टर पाते हैं कि उसकी आंखों की रोशनी ट्रेन चलाने के लिए अनफिट (Unfit) हो चुकी है, लेकिन वह किसी दफ्तर में बैठकर क्लर्क का काम या टेबल-जॉब करने के लिए पूरी तरह फिट है। ऐसे कर्मचारी को ‘मेडिकली डी-कैटेगरीज़’ घोषित कर दिया जाता है। जब तक रेलवे प्रशासन उस ड्राइवर के लिए उसके पुराने वेतन और ग्रेड के बराबर की कोई दूसरी वैकल्पिक पोस्ट (Alternative Post) नहीं ढूंढ लेता, तब तक उसे एक विशेष छुट्टी पर रखा जाता है और उसे पूरा वेतन दिया जाता है। इससे कर्मचारी की नौकरी और उसका पूरा वेतन दोनों सुरक्षित रहते हैं।
- “बीमारी का नाटक (Malingering) करने पर सीधी बर्खास्तगी: कई बार कर्मचारी कठिन ड्यूटी से बचने के लिए आई-टेस्ट में चालाकी करने की कोशिश करते हैं। लेकिन रेलवे मेडिकल बोर्ड आधुनिक मशीनों से इसकी बारीक जांच करता है। यदि कोई कर्मचारी जानबूझकर टेस्ट फेल करने का नाटक करता पाया जाता है, तो उसे ‘मैलिंगरिंग’ का दोषी मानकर डीएआर (DAR) नियमों के तहत सीधे नौकरी से निकाला (Dismiss) जा सकता है।”
LAP और LHAP छुट्टियों का पूरा गणित और छमाही क्रेडिट के नियम
अब हम बात करेंगे उन दो सबसे मुख्य छुट्टियों की, जो हर रेल कर्मचारी के खाते में नियमित रूप से जुड़ती हैं। इन्हें ‘औसत वेतन पर छुट्टी’ (LAP) और ‘अर्ध-औसत वेतन पर छुट्टी’ (LHAP) कहा जाता है। इनका हिसाब-किताब थोड़ा गणितीय है, आइए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
औसत वेतन पर छुट्टी (LAP) क्या है और यह खाते में कैसे जुड़ती है?
रेलवे में LAP को सबसे पसंदीदा छुट्टी माना जाता है क्योंकि इस छुट्टी के दौरान कर्मचारी को उसका पूरा वेतन और भत्ते मिलते हैं। इसे आम बोलचाल में कई बार ‘अर्न्ड लीव’ (Earned Leave) भी कह दिया जाता है।
- सालाना कोटा और एडवांस क्रेडिट: हर नियमित रेल कर्मचारी को एक कैलेंडर वर्ष में कुल 30 दिन की LAP मिलती है। रेलवे प्रशासन यह 30 छुट्टियां एक साथ नहीं देता, बल्कि इन्हें साल में दो बार एडवांस (अग्रिम) के रूप में कर्मचारी के खाते में जोड़ता है। हर साल 1 जनवरी को 15 दिन और 1 जुलाई को 15 दिन कर्मचारी के छुट्टियों के खाते में जमा कर दिए जाते हैं।
- अधिकतम संचय की सीमा (300 Days Limit): एक रेल कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल के दौरान अपने खाते में अधिकतम 300 दिन की LAP ही इकट्ठा कर सकता है। 300 दिन की यह लिमिट पूरी होने के बाद ऊपर की छुट्टियां लैप्स होने का खतरा रहता है।
व्यावहारिक उदाहरण: 300 दिनों की लिमिट का ‘अस्थाई बॉक्स’ नियम
मान लीजिए विजय जी एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) हैं। 31 दिसंबर तक उनके खाते में पहले से 295 दिन की LAP जमा है। अब 1 जनवरी को नियम के मुताबिक उनके खाते में 15 दिन की नई LAP जुड़नी चाहिए। अगर इसे सीधा जोड़ें तो बैलेंस 310 हो जाएगा, जो कि 300 की अधिकतम लिमिट से ज्यादा है।
ऐसी स्थिति में रेलवे का कंप्यूटर सिस्टम क्या करता है? 1 जनवरी को मिलने वाले उन 15 दिनों को मुख्य बैलेंस में न जोड़कर एक अलग ‘अस्थाई बॉक्स’ (Separate Box) में रख देता है। जनवरी से जून के बीच यदि विजय जी कोई छुट्टी लेते हैं, तो वह पहले उस अलग रखे गए 15 दिन के एडवांस में से काटी जाएगी। यदि वह इस छमाही के दौरान कोई छुट्टी नहीं लेते, तो 30 जून की रात को उनका कुल बैलेंस वापस राउंड-ऑफ करके अधिकतम 300 दिन ही रखा जाएगा और ऊपर के 10 दिन अपने आप लैप्स हो जाएंगे।
- एक बार में मंजूरी की सीमा: कोई भी रेल कर्मचारी एक बार में लगातार अधिकतम 180 दिन की LAP ही मंजूर करा सकता है। इससे लंबी छुट्टी की अनुमति विशेष प्रशासनिक परिस्थितियों में ही मिलती है।
अर्ध-औसत वेतन पर छुट्टी (LHAP) और इसके संचय के नियम
जैसा कि इसके नाम से ही साफ है, इस छुट्टी की अवधि के दौरान कर्मचारी को उसका आधा वेतन ही मिलता है। इसे आम तौर पर लोग ‘हाफ-पे लीव’ या ‘मेडिकल लीव’ के रूप में जानते हैं क्योंकि बीमारी के समय इसका सबसे ज्यादा उपयोग होता है।
- सालाना कोटा और क्रेडिट: हर रेल कर्मचारी को प्रतिवर्ष 20 दिन की LHAP मिलती है। LAP की तरह यह भी साल में दो बार एडवांस क्रेडिट होती है—10 दिन 1 जनवरी को और 10 दिन 1 जुलाई को खाते में जुड़ते हैं।
- जमा होने की कोई सीमा नहीं: LHAP के इकट्ठा होने की कोई अधिकतम सीमा नहीं होती। यह आपके पूरे सेवाकाल में कितनी भी जमा हो सकती है (जैसे आपके खाते में 400 या 500 दिन की LHAP भी बिना किसी लैप्स के डर के सुरक्षित रह सकती है)।
- एक बार में मंजूरी की सीमा: एक बार में कोई भी कर्मचारी लगातार अधिकतम 24 महीने (2 साल) की LHAP ले सकता है। इसे कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत जरूरतों या डॉक्टर के चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर ले सकता है।
क्या रिटायरमेंट पर LHAP का पैसा मिलता है? – हां, यदि रिटायरमेंट के समय कर्मचारी के खाते में LAP (Earned Leave) 300 दिनों से कम है, तो 300 दिन की अधिकतम सीमा को पूरा करने के लिए LHAP का इस्तेमाल किया जाता है। जितने दिनों की कमी LHAP से पूरी की जाती है, उतने दिनों का आधा वेतन (Half Pay + DA) कर्मचारी को रिटायरमेंट पर नकद मिलता है।”
छमाही के बीच में नियुक्ति, इस्तीफा या रिटायरमेंट होने पर गणना कैसे होती है?
यदि कोई कर्मचारी साल की शुरुआत में न आकर छमाही के बीच में रेलवे सेवा जॉइन करता है, या बीच में ही नौकरी छोड़ देता है, तो उसे पूरे 15 दिन (LAP) या 10 दिन (LHAP) का क्रेडिट नहीं मिलता। इसके लिए आनुपातिक (Proportionate) गणना की जाती है:
- LAP के लिए ढाई दिन का नियम: यदि कोई नया कर्मचारी साल के बीच में ड्यूटी जॉइन करता है, तो उसे प्रत्येक पूर्ण कैलेंडर महीने की सेवा के लिए 2.5 (ढाई) दिन के हिसाब से गणना करके LAP दी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने 1 मार्च को नौकरी शुरू की, तो उस छमाही के बचे हुए 4 महीनों (मार्च, अप्रैल, मई, जून) के हिसाब से उसे कुल 10 दिन की LAP मिलेगी।
- LHAP के लिए गणना का नियम: इसी तरह हाफ-पे लीव के लिए प्रत्येक पूर्ण कैलेंडर महीने की सेवा के लिए 5/3 दिन प्रति महीना के हिसाब से क्रेडिट की गणना की जाती है।
- नौकरी छोड़ने या मृत्यु के मामले में: यदि कोई कर्मचारी छमाही के बीच में इस्तीफा देता है, रिटायर होता है, या सेवा के दौरान उसकी अकाल मृत्यु हो जाती है, तो उसके खाते में केवल उसी महीने के अंत तक का क्रेडिट जोड़ा जाएगा, जिस महीने तक उसने अपनी सेवा दी है। बाकी के दिनों का क्रेडिट काट लिया जाता है।
बिना वेतन की छुट्टी (EOL) या ‘डायस-नॉन’ का आने वाली छुट्टियों पर क्या असर पड़ता है?
यदि कोई कर्मचारी पिछले छह महीनों के दौरान किसी कारणवश बिना वेतन की छुट्टी (Extraordinary Leave – EOL) पर रहा हो, या उसकी ड्यूटी के कुछ दिनों को प्रशासन द्वारा ‘डायस-नॉन’ (Dies-non) घोषित किया गया हो, तो इसका सीधा असर उसकी अगली छमाही में मिलने वाली छुट्टियों पर पड़ता है।
- LAP में कटौती का नियम: पिछले छह महीनों में कर्मचारी जितने भी दिन बिना वेतन के या डायस-नॉन पर रहा है, उस कुल अवधि का 1/10वां हिस्सा उसके आने वाले 15 दिन के एडवांस क्रेडिट में से घटा दिया जाता है। (यह कटौती अधिकतम 15 दिन तक ही हो सकती है)।
- LHAP में कटौती का नियम: इसी तरह, निलंबन (Suspension) या बिना वेतन की अवधि होने पर अगले छमाही के 10 दिन के क्रेडिट में से उस अवधि का 1/18वां हिस्सा (अधिकतम 10 दिन तक) घटा दिया जाता है।
- राउंडिंग ऑफ का नियम: छुट्टियों की इस कटौती या जोड़ की गणना करते समय यदि दिनों की संख्या दशमलव (Fraction) में आती है, तो उसे नजदीकी पूरे दिन (Nearest whole day) में राउंड ऑफ कर दिया जाता है। जैसे 1.5 दिन को 2 दिन या 1.2 दिन को 1 दिन मान लिया जाता है।
रेलवे स्कूल स्टाफ (Vacation Staff) के लिए अलग नियम क्यों हैं?
रेलवे द्वारा संचालित स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों, प्रिंसिपल्स और लाइब्रेरी स्टाफ को ‘वैकेशन स्टाफ’ माना जाता है, क्योंकि उन्हें स्कूलों की लंबी गर्मियों या सर्दियों की छुट्टियां मिलती हैं। इस विशेषाधिकार के कारण उनके छुट्टियों के नियम आम कर्मचारियों से भिन्न हैं:
- सालाना केवल 10 दिन की LAP: चूंकि ये कर्मचारी स्कूल की लंबी छुट्टियों का आनंद लेते हैं, इसलिए इन्हें साल में 30 दिन के बजाय केवल 10 दिन की LAP मिलती है (5 दिन 1 जनवरी को और 5 दिन 1 जुलाई को एडवांस क्रेडिट)।
- यदि छुट्टियों में काम पर बुलाया जाए: यदि किसी शिक्षक को स्कूल की छुट्टियों (Vacation) के दौरान किसी जरूरी प्रशासनिक या सरकारी काम से ड्यूटी पर बुला लिया जाता है और वह अपनी वैकेशन का लाभ नहीं ले पाता, तो रेलवे प्रशासन उसे आम कर्मचारियों की तरह आनुपातिक आधार पर अतिरिक्त LAP का क्रेडिट देता है।
- संचय की अधिकतम सीमा: स्कूल स्टाफ के खाते में कैरी फॉरवर्ड होने वाली अधिकतम LAP की सीमा 240 दिन तय की गई है (जबकि सामान्य रेल कर्मचारियों के लिए यह सीमा 300 दिन होती है)।
परिवर्तित छुट्टी (Commuted Leave), लीव नॉट ड्यू और बिना वेतन अवकाश (EOL) के नियम
पिछले भागों में हमने देखा कि खाते में नियमित रूप से छुट्टियां कैसे जमा होती हैं। लेकिन कई बार कर्मचारियों के सामने ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जब उनका लीव बैलेंस खत्म हो जाता है या उन्हें लंबी बीमारी या उच्च शिक्षा के लिए विशेष छुट्टियों की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थितियों के लिए रेलवे बोर्ड ने कुछ विशेष अवकाश श्रेणियां बनाई हैं। आइए इनके नियमों को आसान भाषा में समझते हैं।
परिवर्तित छुट्टी (Commuted Leave) क्या है और इसका ‘डबल डेबिट’ नियम क्या है?
यह कोई अलग से मिलने वाली छुट्टी नहीं है, बल्कि आपके खाते में जमा हाफ-पे लीव (LHAP) को ही फुल-पे लीव में बदलने की एक विशेष व्यवस्था है। सामान्यतः हाफ-पे लीव में कर्मचारी का आधा वेतन कटता है, लेकिन बीमारी के समय पूरे पैसे की जरूरत होने पर कर्मचारी इस नियम का लाभ उठा सकते हैं।
- दुगनी कटौती का नियम: यदि किसी कर्मचारी को बीमारी के कारण 5 दिन की ऐसी छुट्टी चाहिए जिसमें उसकी पूरी सैलरी मिले, तो वह अपनी जमा LHAP को कम्यूट (Commute) करवा सकता है। इस स्थिति में उसे उन 5 दिनों का पूरा वेतन मिलेगा, लेकिन उसके छुट्टियों के खाते से दुगनी यानी 10 दिन की LHAP काट ली जाएगी।
- मंजूरी की शर्त: इसके लिए रेलवे के अधिकृत डॉक्टर का मेडिकल सर्टिफिकेट (चिकित्सा प्रमाणपत्र) होना अनिवार्य है। साथ ही, मंजूरी देने वाले अधिकारी को यह पक्का विश्वास होना चाहिए कि छुट्टी की अवधि समाप्त होने के बाद कर्मचारी वापस आकर अपनी ड्यूटी संभाल लेगा।
- पूरी सर्विस में कोई सीमा नहीं: चिकित्सा आधार पर कम्यूटेड लीव लेने की पूरे सेवाकाल में कोई अधिकतम सीमा नहीं होती। आपके खाते में जितनी LHAP जमा है, आप आवश्यकतानुसार उसे बदलवा सकते हैं।
- उच्च अध्ययन (Higher Studies) के लिए विशेष छूट: यदि कोई कर्मचारी जनहित में किसी मान्यता प्राप्त कोर्स या विशेष ट्रेनिंग के लिए जाना चाहता है, तो वह बिना किसी मेडिकल सर्टिफिकेट के भी अपने पूरे सेवाकाल में अधिकतम 180 दिन की LHAP को कम्यूटेड लीव (फुल-पे) में बदलवा सकता है।
ध्यान रखने योग्य कड़ा नियम (इस्तीफा देने पर वसूली): यदि कोई कर्मचारी लंबी कम्यूटेड लीव का लाभ उठाता है और छुट्टी खत्म होने के तुरंत बाद नौकरी से इस्तीफा दे देता है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले लेता है, तो रेलवे प्रशासन उससे फुल-पे और हाफ-पे के बीच के वेतन अंतर की वसूली (Recovery) करेगा। हालांकि, यदि कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या वह गंभीर स्वास्थ्य खराबी के कारण अनिवार्य रूप से रिटायर किया जाता है, तो ऐसी कोई वसूली नहीं की जाती।
देय न होने पर छुट्टी (Leave Not Due – LND) कब और किसे मिलती है?
यह रेलवे बोर्ड की तरफ से गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों के लिए एक बेहद मानवीय नियम है। मान लीजिए कोई कर्मचारी गंभीर बीमारी का शिकार हो गया है और उसकी LAP और LHAP दोनों प्रकार की छुट्टियां पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं (यानी लीव बैलेंस शून्य है)। ऐसी विकट परिस्थिति में उसे ‘लीव नॉट ड्यू’ (LND) दी जाती है।
- एडवांस लोन की तरह: यह छुट्टी एक तरह से ‘छुट्टियों के लोन’ की तरह काम करती है। सक्षम अधिकारी कर्मचारी को ऐसी छुट्टियां एडवांस में मंजूर कर देता है जो उसके खाते में मौजूद ही नहीं हैं। इस दौरान कर्मचारी को आधा वेतन मिलता रहता है। प्रशासन को यह भरोसा होना चाहिए कि ठीक होने के बाद कर्मचारी वापस आएगा और नौकरी करके इस छुट्टी को वापस अर्न (Earn) कर लेगा।
- अधिकतम सीमा: पूरे सेवाकाल के दौरान चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर अधिकतम 360 दिन की LND दी जा सकती है। एक बार में इसकी अधिकतम सीमा सामान्यतः 90 दिन से ज्यादा नहीं होती।
- भविष्य के खाते से एडजस्टमेंट: भविष्य में जब भी कर्मचारी ठीक होकर ड्यूटी पर वापस आता है और उसकी नई LHAP (हर छमाही में 10 दिन) जमा होती है, तो वह सबसे पहले इस माइनस बैलेंस (LND) को चुकाने में अपने आप कट जाती है।
- अस्थाई कर्मचारियों के लिए विशेष राहत: सामान्य नियम के मुताबिक अस्थाई कर्मचारियों को LND का लाभ नहीं मिलता। लेकिन एक विशेष मानवीय अपवाद के तहत, यदि कोई अस्थाई कर्मचारी (जिसने कम से कम 1 वर्ष की लगातार सेवा पूरी कर ली है) कैंसर, मानसिक बीमारी, कुष्ठ रोग या गंभीर टीबी (T.B.) जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित है, तो उसे भी पूरी सेवा में अधिकतम 360 दिन की Leave Not Due दी जा सकती है।
असाधारण छुट्टी (Extraordinary Leave – EOL) या बिना वेतन अवकाश के सख्त नियम
इसे रेलवे कर्मचारी आम बोलचाल में Leave Without Pay (बिना वेतन की छुट्टी) कहते हैं। इस छुट्टी की सबसे बड़ी शर्त यह है कि जितने दिन कर्मचारी ड्यूटी से बाहर रहेगा, उतने दिनों का उसे कोई भी वेतन या भत्ता नहीं दिया जाएगा।
EOL मंजूर होने की दो मुख्य परिस्थितियां:
- जब कर्मचारी के खाते में किसी भी प्रकार की कोई अन्य छुट्टी (LAP या LHAP) बची ही न हो।
- जब कर्मचारी के खाते में छुट्टियां तो बाकी हैं, लेकिन वह खुद लिखित रूप में प्रशासन से केवल बिना वेतन की छुट्टी (EOL) मंजूर करने का विशेष अनुरोध करता है।
अस्थाई कर्मचारियों (Temporary Employees) के लिए कड़ी समय-सीमा:
यदि कोई कर्मचारी नियमित या स्थाई नहीं है, तो वह अपनी मर्जी से लंबे समय तक बिना वेतन के गायब नहीं रह सकता। रेलवे बोर्ड ने इसके लिए सख्त समय-सीमा तय की है:
- अधिकतम 3 महीने: बिना किसी मेडिकल सर्टिफिकेट के सामान्य या निजी कारणों से।
- अधिकतम 6 महीने: यदि कर्मचारी ने 1 वर्ष की लगातार नौकरी पूरी कर ली है और वह अपनी बीमारी के लिए रजिस्टर्ड मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करता है।
- अधिकतम 18 महीने (1.5 साल): यदि कर्मचारी कैंसर, मानसिक बीमारी, कुष्ठ रोग या फेफड़ों की गंभीर टीबी (Tuberculosis) के इलाज के लिए लंबी छुट्टी मांग रहा है।
- अधिकतम 24 महीने (2 साल): यदि कर्मचारी ने 3 साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है और वह रेलवे के काम से जुड़ी किसी उच्च शिक्षा या विशेष तकनीकी अध्ययन (Higher Studies) के लिए जाना चाहता है।
उच्च शिक्षा के लिए सर्विस बॉन्ड भरने का नियम
मान लीजिए कोई अस्थाई कर्मचारी उच्च शिक्षा के लिए 2 साल की लंबी EOL लेता है, तो उसे रेलवे प्रशासन के साथ एक कानूनी बॉन्ड भरना होता है। इसके तहत उसे दो स्थाई रेल कर्मचारियों की गारंटी (Sureties) देनी होती है।
बॉन्ड की शर्त: पढ़ाई पूरी करके वापस आने के बाद कर्मचारी को कम से कम 3 साल तक रेलवे में अनिवार्य सेवा देनी होगी। यदि वह इस 3 साल की अवधि के भीतर नौकरी छोड़ता है या इस्तीफा देता है, तो उसकी छुट्टी के दौरान सरकार द्वारा उस पर या उसकी ट्रेनिंग पर किया गया पूरा खर्च ब्याज सहित उसके और उसके जमानतियों (Sureties) से वसूल किया जाएगा।
प्रोबेशनर्स, अप्रेंटिस (ट्रेनीज) और वर्कशॉप स्टाफ के लिए विशेष छुट्टियों के नियम
रेलवे एक ऐसा विशाल संगठन है जहाँ सीधे भर्ती हुए नए अधिकारी (Probationers), ट्रेनिंग ले रहे युवा (Apprentices) और कारखानों में चौबीसों घंटे पसीना बहाने वाले तकनीकी कारीगर (Workshop Staff) भी शामिल हैं। इन सभी की नौकरी की प्रकृति अलग होने के कारण रेलवे बोर्ड ने इनके लिए छुट्टियों के कुछ विशेष और लचीले नियम बनाए हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
नए भर्ती हुए अधिकारियों (Probationers) के लिए क्या नियम हैं?
जब कोई उम्मीदवार यूपीएससी (UPSC) या अन्य बड़ी परीक्षाओं के माध्यम से रेलवे में क्लास-1 या ग्रुप ‘ए’ अधिकारी के रूप में चुना जाता है, तो शुरुआत में उसे एक निश्चित अवधि के लिए ‘परिवीक्षाधीन’ यानी प्रोबेशन पीरियड (Probation Period) पर रखा जाता है।
- सामान्य कर्मचारियों जैसी पात्रता: प्रोबेशन पर काम कर रहे इन नए अधिकारियों को छुट्टियों के मामले में कोई अलग से कम कोटा नहीं मिलता। इन्हें भी आम नियमित रेल कर्मचारियों की तरह ही सालाना 30 दिन की LAP और 20 दिन की LHAP की पूरी पात्रता होती है।
- सेवा समाप्ति पर कड़ा नियम: इस नियम में एक पेंच है। यदि प्रोबेशनरी पीरियड के दौरान किसी अधिकारी का काम संतोषजनक नहीं पाया जाता और प्रशासन उसकी सेवा समाप्त (Terminate) करने का निर्णय लेता है, तो उसके खाते में बची हुई छुट्टियां प्रोबेशन की आखिरी तारीख से आगे नहीं बढ़ाई जा सकतीं। उसकी सेवा समाप्ति के साथ ही सारी छुट्टियां अपने आप जीरो हो जाती हैं।
रेलवे अप्रेंटिस और ट्रेनीज (Apprentices) के लिए छुट्टियों का कोटा क्या है?
रेलवे में तकनीकी काम सीखने के लिए अलग-अलग स्तर पर युवाओं को अप्रेंटिस या ट्रेनी के रूप में रखा जाता है। चूंकि ये पूरी तरह से नियमित कर्मचारी नहीं होते और इन्हें वेतन के बजाय वजीफा यानी स्टाइपेंड (Stipend) मिलता है, इसलिए इनके लिए छुट्टियां बहुत सीमित और फिक्स होती हैं। इनकी छुट्टियां साल के अंत में आगे (Carry Forward) नहीं जुड़तीं, यानी इन्हें उसी साल खत्म करना होता है।
- विशेष श्रेणी के रेलवे अप्रेंटिस (Special Class Apprentices): इन्हें बीमारी या गंभीर चिकित्सा आधार पर पूरे स्टाइपेंड के साथ एक वर्ष में अधिकतम 1 महीने (30 दिन) की छुट्टी मिल सकती है।
- अप्रेंटिस मैकेनिक्स (Apprentice Mechanics): इन्हें तकनीकी ट्रेनिंग के दौरान पूरे स्टाइपेंड के साथ एक साल में अधिकतम 16 दिन की साधारण छुट्टी मिलती है। इसके अलावा, यदि वे बीमार पड़ते हैं, तो मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर आधे स्टाइपेंड (Half Stipend) के साथ अधिकतम 20 दिन की चिकित्सा छुट्टी भी मिल सकती है।
- ट्रेड अप्रेंटिस (Trade Apprentices): कारखानों में काम सीख रहे ट्रेड अप्रेंटिस को पूरे स्टाइपेंड के साथ साल में अधिकतम 12 दिन की छुट्टी मिलती है। बीमारी के मामले में इन्हें आधे स्टाइपेंड पर अधिकतम 15 दिन की मेडिकल छुट्टी दी जा सकती है।
- ट्रेनिंग में बाधा न आने का नियम: अप्रेंटिस की छुट्टियों को लेकर प्रशासन बहुत कड़ा होता है। यदि कोई ट्रेनी बिना किसी गंभीर कारण के बार-बार छुट्टी लेता है और उसकी ट्रेनिंग का कोर हिस्सा छूट जाता है, तो सक्षम अधिकारी उसकी छुट्टी नामंजूर कर सकता है और उसकी ट्रेनिंग की अवधि को आगे बढ़ा सकता है।
कारखानों में काम करने वाले वर्कशॉप स्टाफ (Workshop Staff) के लिए विशेष व्यवस्था
रेलवे के बोगियों, इंजनों और सिग्नलों का निर्माण व मरम्मत करने वाले कारखानों (Workshops) के तकनीकी कारीगरों (Skilled Artisans), अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए छुट्टियों के नियम बहुत ही व्यावहारिक बनाए गए हैं।
- सभी मुख्य छुट्टियों की पात्रता: वर्कशॉप स्टाफ को सामान्य रेल कर्मचारियों की तरह ही LAP, LHAP, कम्यूटेड लीव और लीव नॉट ड्यू (LND) का पूरा लाभ मिलता है।
- आधे दिन की छुट्टी (Half-Day Leave) का विशेष अधिकार: वर्कशॉप कर्मचारियों के लिए सबसे बेहतरीन सुविधा आधे दिन की छुट्टी की है। कई बार कर्मचारियों को घर के छोटे-मोटे काम या बच्चों को स्कूल से लाने जैसे निजी कामों के लिए केवल 3-4 घंटे की फुर्सत चाहिए होती है। इसके लिए वे अपने पूरे वर्किंग डे के फर्स्ट हाफ (आधा दिन पहले) या सेकंड हाफ (आधा दिन बाद) के लिए आधे दिन की छुट्टी ले सकते हैं। इस दौरान उनका आधा वेतन सुरक्षित रहता है।
- सालाना सीमा: आधे दिन की छुट्टी की यह विशेष प्रशासनिक रियायत एक कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 6 बार ही इस्तेमाल कर सकता है।\
- आधे दिन की छुट्टी (Half-Day CL) का विशेष अधिकार: वर्कशॉप स्टाफ को यह सुविधा उनकी सामान्य CL (आकस्मिक अवकाश) के अंतर्गत ही मिलती है। कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपनी कुल CL में से अधिकतम 6 बार आधा-आधा दिन (0.5 CL) करके छुट्टी ले सकते हैं…
रिटायरमेंट के बाद दोबारा नौकरी पर रखे गए (Re-employed) कर्मचारियों के नियम
कई बार रेलवे के किसी विशेष प्रोजेक्ट या तकनीकी विशेषज्ञता की कमी को पूरा करने के लिए रिटायर्ड कर्मचारियों को कुछ सालों के लिए कॉन्ट्रैक्ट या दोबारा नौकरी (Re-employment) पर रख लिया जाता है।
- नए सिरे से शुरुआत: भले ही उस कर्मचारी ने रेलवे में 35-40 साल नौकरी की हो, लेकिन दोबारा काम पर रखे जाने के बाद छुट्टियों के मामले में उसे बिल्कुल एक ‘नए नवेले अस्थाई कर्मचारी’ की तरह माना जाएगा।
- उसके पिछले सेवाकाल की बची हुई कोई भी छुट्टी इस नई नौकरी के खाते में नहीं जोड़ी जाएगी। उसे नए सिरे से तय नियमों के अनुसार ही प्रति महीने के हिसाब से छुट्टियों का क्रेडिट दिया जाता है।
मातृत्व, पितृत्व और बच्चा गोद लेने पर मिलने वाली विशेष छुट्टियां
भारतीय रेलवे एक संवेदनशील और आधुनिक नियोक्ता (Employer) होने के नाते अपने कर्मचारियों के पारिवारिक और सामाजिक जीवन का भी पूरा ध्यान रखता है। जब घर में नए बच्चे का आगमन होता है, तो माता और पिता दोनों को बच्चे की देखभाल के लिए विशेष छुट्टियों की जरूरत होती है।
महिला रेल कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के क्या नियम हैं?
यह महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान शारीरिक आराम और नवजात शिशु की देखभाल के लिए दिया जाने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण अधिकार है।
- 135 दिन की लंबी छुट्टी: दो से कम जीवित बच्चों वाली किसी भी महिला रेल कर्मचारी को बच्चे के जन्म के समय अधिकतम 135 दिन (साढ़े चार महीने) की Maternity Leave मिलती है।
- सभी श्रेणियों के लिए पात्रता: यह नियम हर महिला कर्मचारी पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वह स्थाई (Permanent) हो, अस्थाई (Temporary) हो या फिर अभी रेलवे में अप्रेंटिस या ट्रेनी के रूप में काम सीख रही हो।
- पूरा वेतन सुरक्षित: इस छुट्टी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस दौरान महिला कर्मचारी को उसका पूरा मूल वेतन और महंगाई भत्ता (Full Salary) मिलता है। यह छुट्टी कर्मचारी के निजी लीव अकाउंट (LAP/LHAP) से बिल्कुल नहीं काटी जाती, यह पूरी तरह से अतिरिक्त होती है।
- गर्भपात या मिसकैरेज (Abortion) के मामले में विशेष राहत: यदि किसी महिला कर्मचारी के साथ सेवा के दौरान गर्भपात या मिसकैरेज जैसी कोई दुखद घटना घटती है, तो उसे पूरे सेवाकाल के दौरान उचित मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर अधिकतम 45 दिन का विशेष मातृत्व अवकाश मिल सकता है, ताकि वह अपने स्वास्थ्य को दोबारा ठीक कर सके।
1 साल तक की अतिरिक्त छुट्टी का सुरक्षा कवच
व्यावहारिक उदाहरण से समझिए: मान लीजिए 135 दिन का मातृत्व अवकाश पूरा होने के बाद भी बच्चे की तबीयत ठीक नहीं है या मां को बच्चे की देखभाल के लिए और समय चाहिए।
ऐसी स्थिति में महिला कर्मचारी बिना किसी मेडिकल सर्टिफिकेट (चिकित्सा प्रमाणपत्र) के अपने खाते की कम्यूटेड लीव (अधिकतम 60 दिन तक) या लीव नॉट ड्यू (LND) जैसी अन्य छुट्टियों को मातृत्व अवकाश के साथ जोड़कर लगातार 1 साल (365 दिन) तक की लंबी छुट्टी ले सकती है। प्रशासन सामान्यतः इसे नामंजूर नहीं करता।
पुरुष रेल कर्मचारियों के लिए पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) के नियम
बच्चों के शुरुआती पालन-पोषण में पिताओं की जिम्मेदारी को समझते हुए रेलवे बोर्ड ने पुरुष कर्मचारियों के लिए भी एक विशेष अवकाश का प्रावधान किया है।
- 15 दिन की छुट्टी: दो से कम जीवित बच्चों वाले नियमित पुरुष रेल कर्मचारी (अप्रेंटिस सहित) को अपने बच्चे के जन्म के समय 15 दिन की Paternity Leave मिलती है। इस दौरान उन्हें पूरा वेतन दिया जाता है।
- कड़ी समय-सीमा (The 6-Month Window): इस छुट्टी को लेकर रेलवे का एक बहुत ही सख्त नियम है। यह छुट्टी पत्नी की डिलीवरी (संभावित तारीख) से 15 दिन पहले से लेकर बच्चे के जन्म की तारीख से 6 महीने के भीतर ही ली जा सकती है। यदि इन 6 महीनों के भीतर कर्मचारी ने यह छुट्टी नहीं ली, तो यह अपने आप लैप्स (समाप्त) हो जाती है। इसे बाद के लिए बचाकर नहीं रखा जा सकता।
- लीव अकाउंट पूरी तरह सुरक्षित: 15 दिन की यह पितृत्व छुट्टी कर्मचारी के खाते की LAP या LHAP में से नहीं काटी जाती। इसे एक बार में ही (Single Spell) पूरा लेना होता है। सामान्यतः काम का कितना भी दबाव हो, प्रशासन इस छुट्टी को देने से मना नहीं करता।
- अस्थाई या कैजुअल लेबर के लिए नियम: जिन कैजुअल पुरुष मजदूरों को रेलवे में टेंपरेरी स्टेटस (Temporary Status) मिल चुका है और उन्होंने अपनी सेवा की कुछ बुनियादी शर्तें पूरी कर ली हैं, वे भी अपने दो से कम जीवित बच्चों के जन्म के 135 दिनों के भीतर इस 15 दिन की पितृत्व छुट्टी का लाभ उठा सकते हैं।
बच्चा गोद लेने पर मिलने वाली छुट्टी (Child Adoption Leave) के कायदे
यदि कोई रेल कर्मचारी समाज कल्याण या व्यक्तिगत कारणों से किसी अनाथ या नवजात बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेता है, तो रेलवे उसे भी जैविक माता-पिता की तरह ही छुट्टियां प्रदान करता है।
- महिला कर्मचारियों के लिए 135 दिन की छुट्टी: दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला रेल कर्मचारी यदि 1 वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को कानूनी रूप से गोद (Adopt) लेती है, तो उसे बच्चे की परवरिश के लिए प्राकृतिक मां की तरह ही 135 दिन की Child Adoption Leave मिलती है। इसके दौरान भी पूरा वेतन मिलता है और इसे किसी भी अन्य छुट्टी के साथ जोड़ा जा सकता है।
- अतिरिक्त छुट्टी की आनुपातिक गणना: गोद लेने वाली मां को भी बच्चे की देखभाल के लिए बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के अन्य छुट्टियों को मिलाकर अधिकतम 1 साल तक की अतिरिक्त छुट्टी मिल सकती है।
- बच्चे की उम्र का पेंच: इस 1 साल की अतिरिक्त छुट्टी में एक छोटा सा पेंच है। यदि गोद लिया गया बच्चा नवजात (बिलकुल छोटा) न होकर मान लीजिए 4 महीने का है, तो महिला कर्मचारी को आगे 1 साल की पूरी छुट्टी नहीं मिलेगी। उस 1 साल (12 महीने) की अवधि में से बच्चे की मौजूदा उम्र (4 महीने) घटा दी जाएगी, यानी मां को आगे अधिकतम 8 महीने की ही अतिरिक्त छुट्टी मंजूर की जाएगी।
ऑन-ड्यूटी चोट और दुर्घटनाओं के लिए सुरक्षात्मक छुट्टियां (Disability & Hospital Leave)
रेलवे की नौकरी कई मायनों में बहुत जोखिम भरी होती है। हमारे कई ट्रैकमैन, गैंगमैन, पॉइंट्समैन, तकनीशियन और स्टेशन स्टाफ बेहद खतरनाक परिस्थितियों में पटरियों, यार्डों और चलती ट्रेनों के बीच काम करते हैं। ड्यूटी के दौरान होने वाली किसी भी अनहोनी, गंभीर चोट या दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए रेलवे बोर्ड ने कुछ विशेष और बेहद उदार नियम बनाए हैं।
1. हमले या आधिकारिक ड्यूटी के कारण चोट — विशेष विकलांगता अवकाश (Special Disability Leave)
यह छुट्टी उन कर्मचारियों के लिए बनाई गई है जो अपनी सरकारी ड्यूटी निभाने के कारण किसी हादसे या जानबूझकर किए गए हमले का शिकार हो जाते हैं।
- यह छुट्टी कब मिलती है? मान लीजिए रेलवे का कोई टिकट चेकर (TTE) चलती ट्रेन में बिना टिकट यात्रियों को पकड़ रहा है। इस दौरान कोई असामाजिक तत्व अपनी गलती छुपाने के लिए उस टीटीई पर जानलेवा हमला कर देता है और टीटीई गंभीर रूप से घायल या विकलांग हो जाता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को विशेष विकलांगता अवकाश दिया जाता है।
- समय-सीमा और शर्तें: यह छुट्टी रेलवे के अधिकृत मेडिकल बोर्ड या डॉक्टर के सर्टिफिकेट के आधार पर अधिकतम 24 महीने (2 साल) के लिए दी जा सकती है। शर्त यह है कि चोट के कारण पैदा हुई विकलांगता घटना के 3 महीने के भीतर सामने आ जानी चाहिए और कर्मचारी ने इसकी सूचना तुरंत अपने विभाग को दी हो।
- खाता और सीनियरिटी पूरी तरह सुरक्षित: इस पूरी छुट्टी की अवधि को पेंशन, सीनियरिटी और प्रमोशन के लिए ‘ऑन-ड्यूटी’ (Counted as Duty) माना जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह छुट्टी कर्मचारी के निजी लीव अकाउंट (LAP/LHAP) से बिल्कुल नहीं काटी जाती।
- छुट्टी के दौरान वेतन का नियम:
- छुट्टी के पहले 120 दिनों (4 महीने) के लिए कर्मचारी को पूरा औसत वेतन (Full LAP Salary) मिलता है।
- बाकी बची अवधि के लिए कर्मचारी को आधा वेतन (Half Pay) मिलता है। हालांकि, कर्मचारी के पास यह विकल्प होता है कि वह अपने हाफ-पे लीव खाते से दिन कटवाकर बचे हुए समय के लिए भी पूरा वेतन ले सके।
2. ग्रुप सी और डी कर्मचारियों के लिए संजीवनी — अस्पताल अवकाश (Hospital Leave)
यह रेलवे बोर्ड की तरफ से ग्राउंड स्टाफ (मैदानी कर्मचारियों) के लिए बनाया गया सबसे मानवीय और जीवन रक्षक नियम है। यह छुट्टी ग्रुप ए और ग्रुप बी के अधिकारियों को छोड़कर केवल ग्रुप सी (Group C) और ग्रुप डी (Group D) के कर्मचारियों को मिलती है।
- यह छुट्टी कब मिलती है? जब कोई रेल कर्मचारी (जैसे कोई गैंगमैन पटरियों की मरम्मत कर रहा हो या पॉइंट्समैन बोगियों को जोड़ रहा हो) ड्यूटी के दौरान उत्पन्न जोखिमों के कारण अचानक किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार हो जाता है और उसे अस्पताल या मेडिकल ट्रीटमेंट में रहना पड़ता है।
- असीमित अवधि (Unlimited Period) का विशेष अधिकार: अस्पताल अवकाश की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसकी कोई ऊपरी सीमा तय नहीं है। जब तक कर्मचारी अस्पताल में भर्ती है या पूरी तरह ठीक होकर वापस अपने पैरों पर चलने-फिरने लायक नहीं हो जाता, तब तक जोनल रेलवे के जनरल मैनेजर (GM) उसके लिए असीमित दिनों की Hospital Leave मंजूर कर सकते हैं।
- लीव अकाउंट से कोई कटौती नहीं: यह छुट्टी भी कर्मचारी के निजी छुट्टियों के खाते (LAP/LHAP) से बिल्कुल नहीं काटी जाती। इसे अन्य छुट्टियों के साथ मिलाया जा सकता है, बशर्ते कुल मिलाकर लगातार छुट्टी की अवधि 28 महीने से अधिक न हो।
- वेतन की स्थिति: सामान्य नियम के अनुसार, पहले 120 दिनों (4 महीने) के लिए कर्मचारी को पूरा औसत वेतन मिलता है और उसके बाद की अवधि के लिए आधा वेतन मिलता है।
फुल सैलरी जारी रखने की विशेष प्रशासनिक शक्तियां
व्यावहारिक उदाहरण से समझिए: मान लीजिए कोई ट्रैकमैन ड्यूटी के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका इलाज 8 महीने से अस्पताल में चल रहा है। सामान्य नियम के मुताबिक 4 महीने के बाद उसकी सैलरी आधी हो जानी चाहिए, जिससे उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट सकता है।
ऐसी विकट स्थिति को संभालने के लिए रेलवे नियमों के तहत विशेष शक्तियां दी गई हैं। व्यक्तिगत मामलों की गंभीरता को देखते हुए मंडल रेल प्रबंधक (DRM), चीफ वर्कशॉप इंजीनियर (CWE) या जनरल मैनेजर (GM) के पास यह पावर होती है कि वे एकाउंट्स विभाग की सहमति से 120 दिनों की सीमा के बाद भी पीड़ित कर्मचारी को ठीक होने तक 100% फुल सैलरी (Full LAP Salary) देने की विशेष मंजूरी जारी कर सकते हैं।
3. अध्ययन अवकाश — स्टडी लीव (Study Leave) के क्या फायदे हैं?
रेलवे अपने कर्मचारियों को केवल काम तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें अपने ज्ञान और तकनीकी कौशल को बढ़ाने का भी मौका देता है।
- उद्देश्य: रेलवे कर्मचारियों को किसी वैज्ञानिक, तकनीकी समस्या के गहन अध्ययन या किसी विशेष प्रशासनिक ट्रेनिंग (Special Courses) प्राप्त करने के लिए स्टडी लीव दी जा सकती है।
- लीव अकाउंट और वेतन: यह छुट्टी भी कर्मचारी के सामान्य लीव अकाउंट से नहीं काटी जाती। इस दौरान कर्मचारी को तय नियमों के अनुसार स्टडी अलाउंस और वेतन का लाभ मिलता है।
- भविष्य के लाभ: स्टडी लीव की पूरी अवधि को कर्मचारी के प्रमोशन (Promotion), पेंशन (Pension), सीनियरिटी (Seniority) और सालाना वेतन वृद्धि (Increments) के लिए पूरी तरह से ‘एक्टिव सर्विस’ माना जाता है। हालांकि, इस पढ़ाई की अवधि के दौरान खाते में कोई नई हाफ-पे लीव (LHAP) जमा नहीं होती।
छुट्टी के दौरान मिलने वाला वेतन, एडवांस सैलरी और लीव एनकैशमेंट (पैसा) के नियम।
1. छुट्टियों के दौरान मिलने वाला वेतन (Leave Salary) और एडवांस का नियम
जब कोई कर्मचारी छुट्टी पर घर जाता है, तो उसे मिलने वाला वेतन इस बात पर निर्भर करता है कि उसने किस प्रकार का अवकाश लिया है:
- साधारण छुट्टी (LAP) या परिवर्तित छुट्टी (Commuted Leave) पर: कर्मचारी को वही पूरा मूल वेतन और महंगाई भत्ता (Basic Pay + DA) मिलता है जो उसे छुट्टी पर जाने से ठीक पिछले दिन ड्यूटी पर मिल रहा था। यानी सैलरी में ₹1 की भी कटौती नहीं होती।
- हाफ-पे लीव (LHAP) या लीव नॉट ड्यू (LND) पर: कर्मचारी को उसके सामान्य वेतन का ठीक आधा (Half Pay) ही दिया जाता है।
- बिना वेतन की छुट्टी (EOL) पर: इस अवधि का कर्मचारी को कोई भी वेतन या भत्ता नहीं मिलता।
- रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और गार्ड) के लिए विशेष व्यवस्था: ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट और गार्ड्स की लीव सैलरी की गणना में उनके मूल वेतन के साथ रनिंग अलाउंस का एक निश्चित हिस्सा (30% तक) भी जोड़ा जाता है, ताकि छुट्टी के दिनों में उनकी आर्थिक स्थिति पर कोई विपरीत असर न पड़े।
- लीव सैलरी एडवांस का नियम: यदि कोई रेल कर्मचारी किसी बड़े घरेलू काम या लंबी यात्रा के लिए लगातार 30 दिन या उससे अधिक की लंबी छुट्टी पर जा रहा है, तो वह छुट्टी शुरू होने से पहले ही एक महीने के वेतन का एडवांस (Advance Salary) ले सकता है। यह एडवांस उसके नेट वेतन से ज्यादा नहीं हो सकता और इसका पूरा हिसाब कर्मचारी के अगले नियमित वेतन बिल से अपने आप एडजस्ट कर लिया जाता है।
2. नियमित रिटायरमेंट (Superannuation) पर लीव एनकैशमेंट का आधिकारिक फॉर्मूला
जब कोई रेल कर्मचारी अपनी उम्र पूरी करके (60 वर्ष पर) सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होता है, तो रेलवे प्रशासन उसके खाते में जमा बची हुई छुट्टियों के बदले उसे एकमुश्त (Lump-sum) मोटी रकम देता है।
- अधिकतम 300 दिन की सीमा: रिटायरमेंट के समय आपके खाते में जमा अधिकतम 300 दिनों की LAP का ही पूरा नकद भुगतान किया जाता है। यदि आपके खाते में 300 से ज्यादा दिन (जैसे 340 दिन) हैं, तो ऊपर की छुट्टियां लैप्स हो जाएंगी, पैसा केवल 300 दिनों का ही मिलेगा।
- पैसा निकालने का आधिकारिक फॉर्मूला:
लीव एनकैशमेंट निकालने का आधिकारिक सूत्र (Formula):
कैलकुलेशन का तरीका:[(मूल वेतन / Basic Pay) + (महंगाई भत्ता / DA)] ÷ 30 × बची हुई LAP छुट्टियों की संख्या (अधिकतम 300)
उदाहरण के लिए: मान लीजिए रिटायरमेंट के समय आपकी आखिरी बेसिक सैलरी ₹50,000 है और उस समय DA 50% (यानी ₹25,000) है, और आपके खाते में पूरे 300 दिन की LAP बची है:[(50,000 + 25,000) ÷ 30] × 300= [75,000 ÷ 30] × 300= 2,500 × 300= ₹7,50,000 - ध्यान रखने योग्य बात: इस गणना में केवल बेसिक पे और डीए (Basic + DA) ही जुड़ता है। इसमें मकान किराया भत्ता (HRA) या अन्य भत्ते शामिल नहीं होते। इसके लिए कर्मचारी को दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ते, प्रशासन रिटायरमेंट सेटलमेंट के साथ यह पैसा अपने आप जारी करता है।
- LHAP कैश कराने का विशेष नियम: यदि किसी कर्मचारी की रिटायरमेंट के समय 300 दिन की LAP पूरी नहीं हो पा रही है (मान लीजिए केवल 240 दिन ही हैं), तो वह अपने खाते में बची हुई LHAP (हाफ-पे लीव) को भी कैश करा सकता है, ताकि वह अपनी कुल 300 दिनों की वित्तीय सीमा को पूरा कर सके। हालांकि, LHAP के बदले आधा पैसा ही मिलता है।
3. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS), इस्तीफा या बर्खास्तगी पर छुट्टियों का हिसाब
नौकरी के अंत के अलग-अलग तरीकों के हिसाब से लीव एनकैशमेंट के नियम भी बदल जाते हैं:
- VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने पर: यदि कोई कर्मचारी 20 साल की सर्विस पूरी करने के बाद नियम के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement) लेता है, तो उसे भी सामान्य रिटायरमेंट की तरह ही पूरे 300 दिनों की LAP का एनकैशमेंट लाभ मिलता है।
- नौकरी से इस्तीफा (Resignation) देने पर: यदि कोई कर्मचारी रेलवे की नौकरी से बीच में ही इस्तीफा दे देता है, तो उसे 300 दिनों का लाभ नहीं मिलता। इस स्थिति में लीव एनकैशमेंट का लाभ अधिकतम 150 दिनों की LAP तक ही सीमित कर दिया जाता है।
- सजा के तौर पर अनिवार्य रिटायरमेंट: यदि किसी कर्मचारी को किसी गंभीर विभागीय गलती के कारण सजा के रूप में ‘अनिवार्य रिटायर’ (Compulsory Retirement) कर दिया जाता है, तो भी सक्षम प्राधिकारी दया के आधार पर उसे उसके खाते की बची हुई छुट्टियों का पैसा (अधिकतम 300 दिन तक) मंजूर कर सकता है।
4. सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार (नॉमिनी) को मिलने वाली सहायता
यदि किसी रेल कर्मचारी की सेवा के दौरान (In Service) असमय मृत्यु हो जाती है, तो रेलवे बोर्ड उसके परिवार को तुरंत आर्थिक संबल देने के लिए उसके खाते की सभी बची हुई छुट्टियों (अधिकतम 300 दिन की LAP और बकाया LHAP) का पूरा पैसा नकद भुगतान के रूप में उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर देता है। इस पैसे से पेंशन या ग्रेच्युटी में कोई कटौती नहीं की जाती।
यह पैसा परिवार के सदस्यों को नीचे दिए गए सख्त प्राथमिकता क्रम (Priority List) के आधार पर ही मिलता है:
- पति या पत्नी (Widow / Husband)
- सबसे बड़ा जीवित बेटा (या गोद लिया हुआ बेटा)
- सबसे बड़ी जीवित अविवाहित बेटी
- सबसे बड़ी जीवित विधवा बेटी
- माता या पिता
- 18 वर्ष से कम उम्र का छोटा भाई या अविवाहित बहन
सभी मुख्य छुट्टियां एक नजर में
| छुट्टी का प्रकार | सालाना कोटा | अधिकतम संचय सीमा | एक बार में मंजूरी की सीमा | वेतन की स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| LAP (औसत वेतन छुट्टी) | 30 दिन (15-15 की दो किस्तें) | 300 दिन | 180 दिन | पूरा वेतन मिलता है |
| LHAP (हाफ-पे लीव) | 20 दिन (10-10 की दो किस्तें) | कोई सीमा नहीं (असीमित) | 24 महीने | आधा वेतन मिलता है |
| Commuted (परिवर्तित) | LHAP के खाते से कटती है | कोई सीमा नहीं | मेडिकल सर्टिफिकेट पर | पूरा वेतन (खाते से दुगनी LHAP कटेगी) |
| LND (देय न होने पर) | एडवांस लोन की तरह | पूरी सर्विस में 360 दिन | 90 दिन | आधा वेतन (भविष्य की LHAP से कटेगी) |
| EOL (असाधारण छुट्टी) | कोई कोटा नहीं | नियमों/बीमारी के आधार पर | अस्थाई स्टाफ के लिए सीमाएं | कोई वेतन नहीं मिलता (Leave Without Pay) |
| Maternity (मातृत्व) | बच्चों के जन्म पर | दो जीवित बच्चों तक | 135 दिन | पूरा वेतन मिलता है |
| Paternity (पितृत्व) | बच्चे के जन्म पर | दो जीवित बच्चों तक | 15 दिन (एक बार में) | पूरा वेतन मिलता है |
| Hospital (अस्पताल) | ऑन-ड्यूटी दुर्घटना होने पर | कोई सीमा नहीं (असीमित) | ठीक होने तक (जीएम की मंजूरी) | पहले 120 दिन फुल पे, फिर हाफ पे |
Railway D&AR 1968 और SF 5 Charge Sheet क्या है? नियम, प्रक्रिया और बचाव की पूरी जानकारी
Railway SF-11 Minor Penalty: जानिए माइनर चार्जशीट के नियम, सैलरी पर छुपा हुआ असर और बचाव के तरीके!
चाइल्ड केयर लीव (CCL), सस्पेंशन और पास/पीटीओ के कड़े नियम
पिछले भागों में हमने रेलवे की सभी पारंपरिक और मुख्य छुट्टियों का हिसाब-किताब देख लिया। लेकिन अगर इस लेख को इंटरनेट पर सबसे संपूर्ण और प्रामाणिक बनाना है, तो हमें उन आधुनिक नियमों और विशेष परिस्थितियों को भी समझना होगा जिनसे हर रेल कर्मचारी का कभी न कभी सामना जरूर होता है। आइए इन तीन सबसे महत्वपूर्ण विषयों को व्यावहारिक नजरिए से समझते हैं।
1. बच्चों की परवरिश के लिए सबसे बड़ी राहत — चाइल्ड केयर लीव (CCL)
महिला रेल कर्मचारियों और अकेले दम पर बच्चों को पाल रहे पुरुष कर्मचारियों के लिए यह छुट्टी सबसे बड़ी संजीवनी मानी जाती है। बच्चों की बोर्ड परीक्षाओं, बीमारी या उनके पालन-पोषण के कड़े समय में यह अवकाश बहुत मददगार साबित होता है।
- पूरी सर्विस में 730 दिनों का कोटा: पात्र कर्मचारियों को उनके पूरे सेवाकाल (पूरी नौकरी) के दौरान बच्चों की देखभाल के लिए अधिकतम 730 दिन (पूरे 2 साल) की चाइल्ड केयर लीव (CCL) मिलती है।
- उम्र की सीमा: यह छुट्टी केवल तभी तक ली जा सकती है जब तक कि आपके दो सबसे बड़े बच्चों की उम्र 18 वर्ष से कम हो। (यदि बच्चा दिव्यांग या विशेष है, तो उम्र की यह सीमा लागू नहीं होती, यानी 18 वर्ष के बाद भी मां को यह छुट्टी मिल सकती है)।
- छुट्टी के दौरान वेतन का गणित:
- पहले 365 दिनों (1 साल) की CCL के दौरान कर्मचारी को 100% पूरा वेतन और भत्ते मिलते हैं।
- बाकी के बचे हुए 365 दिनों (दूसरे साल) की CCL के दौरान कर्मचारी को उसके सामान्य वेतन का 80% हिस्सा ही दिया जाता है।
- सालाना सीमा और कड़े नियम: आप जब चाहें तब CCL लेकर घर नहीं बैठ सकते। इसके लिए कुछ कड़े प्रशासनिक नियम तय हैं:
- एक कैलेंडर वर्ष (1 साल) में आप अधिकतम 3 बार ही CCL के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- एक बार में ली जाने वाली CCL की अवधि कम से कम 5 दिन से कम नहीं होनी चाहिए।
- प्रोबेशन पीरियड (शुरुआती नौकरी) के दौरान बहुत ही असाधारण और इमरजेंसी मामलों को छोड़कर सामान्यतः CCL मंजूर नहीं की जाती।
2. सस्पेंशन (Suspension / निलंबन) के दौरान छुट्टियों का हिसाब-किताब
यदि किसी रेल कर्मचारी पर कोई गंभीर विभागीय जांच या कानूनी मामला चल रहा है और प्रशासन उसे कुछ समय के लिए नौकरी से सस्पेंड (निलंबित) कर देता है, तो छुट्टियों को लेकर बहुत बड़े पेंच फंसते हैं:
- क्या सस्पेंशन के दौरान कोई छुट्टी मिल सकती है? इसका सीधा और साफ जवाब है—बिल्कुल नहीं। जब कोई कर्मचारी सस्पेंड होता है, तो वह तकनीकी रूप से ड्यूटी पर नहीं होता बल्कि उसे केवल एक निश्चित निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) मिलता है। चूंकि उसे अपना हेडक्वार्टर छोड़ने की अनुमति नहीं होती, इसलिए सस्पेंशन की अवधि के दौरान कर्मचारी किसी भी प्रकार की साधारण (LAP), मेडिकल या आपातकालीन छुट्टी के लिए आवेदन नहीं कर सकता।
- आने वाली छुट्टियों के क्रेडिट पर बुरा असर: सस्पेंशन के दौरान कर्मचारी जितने भी दिन दफ्तर से बाहर रहेगा, उस पूरी अवधि को उसकी सेवा में ‘एक्टिव सर्विस’ नहीं माना जाता। इसका नुकसान यह होता है कि अगली छमाही में जब उसके खाते में 10 दिन की नई हाफ-पे लीव (LHAP) जुड़ने का समय आएगा, तो सस्पेंशन की अवधि का 1/18वां हिस्सा उस क्रेडिट में से काट लिया जाएगा।
3. छुट्टियों के साथ रेलवे पास और पीटीओ (Pass & PTO) को जोड़ने का नियम
रेलवे कर्मचारियों को देश भर में सफर करने के लिए फ्री प्रिविलेज पास और पीटीओ की विशेष सुविधा मिलती है। जब कर्मचारी लंबी छुट्टियों पर घर या घूमने जाते हैं, तो पास के नियम छुट्टियों के साथ सीधे जुड़ जाते हैं।
- पास और छुट्टी का एक साथ आवेदन: यदि कोई कर्मचारी 15 या 20 दिन की लंबी छुट्टी (LAP) लेकर कहीं दूर जा रहा है, तो वह अपने लीव एप्लीकेशन के साथ ही पास के लिए भी अप्लाई कर सकता है।
- प्रिफिक्स और सफिक्स का फायदा: छुट्टी शुरू होने से पहले या खत्म होने के बाद आने वाले जो भी रविवार या सरकारी त्योहार (Prefix/Suffix) होते हैं, उन्हें पास की वैधता (Validity) और यात्रा के समय में जोड़ा जा सकता है। इससे कर्मचारी को यात्रा के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है और उसके खाते से छुट्टियां भी कम कटती हैं।
- छुट्टी के दौरान बीमार होने पर पास का नियम: मान लीजिए कोई कर्मचारी पास लेकर किसी दूसरे शहर घूमने गया और वहां अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गया, जिसके कारण वह तय तारीख पर वापस नहीं लौट सका। ऐसी स्थिति में यदि वह वहां के रेलवे डॉक्टर से सिक मेमो (Sick Memo) प्राप्त कर लेता है, तो उसकी छुट्टी तो मेडिकल में बदल ही जाएगी, साथ ही उसके पास की वैधता अवधि को भी वापसी यात्रा के लिए प्रशासनिक तौर पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
रेल कर्मचारियों के मन में उठने वाले कुछ आम सवाल
सवाल 1: क्या मेरे खाते में 300 से ज्यादा LAP होने पर वह सच में लैप्स हो जाती है?
जवाब: हाँ, नियम के मुताबिक आपके खाते में अधिकतम 300 दिन की LAP ही जमा रह सकती है। हालांकि, हर छमाही (1 जनवरी और 1 जुलाई) को मिलने वाले 15 दिन के एडवांस क्रेडिट को एक अलग बॉक्स में रखा जाता है। अगर आप उस छमाही के दौरान छुट्टियां ले लेते हैं, तो आपका बैलेंस सुरक्षित रहता है, अन्यथा 30 जून या 31 दिसंबर को 300 से ऊपर के दिन अपने आप जीरो हो जाते हैं।
सवाल 2: क्या मैं अपनी कैजुअल लीव (CL) के तुरंत बाद LAP या मेडिकल लीव ले सकता हूँ?
जवाब: बिल्कुल नहीं। कैजुअल लीव (CL) को लंबी छुट्टियों की श्रेणी में नहीं माना जाता। इसलिए आप CL को सीधे LAP, LHAP या कम्यूटेड लीव जैसी छुट्टियों के साथ मिलाकर या आगे-पीछे जोड़कर नहीं ले सकते।
सवाल 3: अगर मैं रेलवे की नौकरी से इस्तीफा देता हूँ, तो मुझे कितने दिनों का लीव एनकैशमेंट मिलेगा?
जवाब: यदि आप अपनी मर्जी से इस्तीफा देते हैं, तो आपको सामान्य रिटायरमेंट की तरह 300 दिनों का लाभ नहीं मिलता। इस्तीफे के मामले में लीव एनकैशमेंट अधिकतम 150 दिनों की LAP तक ही सीमित रहता है।
सवाल 4: पत्नी की डिलीवरी के कितने दिनों के भीतर पेटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) लेना जरूरी है?
जवाब: पुरुष कर्मचारियों को मिलने वाली 15 दिन की पेटरनिटी लीव बच्चे के जन्म की तारीख से 6 महीने के भीतर ही लेनी होती है। यदि इन 6 महीनों के भीतर यह छुट्टी नहीं ली गई, तो यह अपने आप लैप्स हो जाती है।
सवाल 5: चाइल्ड केयर लीव (CCL) एक साल में अधिकतम कितनी बार ली जा सकती है?
जवाब: एक महिला कर्मचारी या एकल पुरुष पिता एक कैलेंडर वर्ष (1 साल) में अधिकतम 3 बार ही CCL का उपयोग कर सकते हैं। साथ ही, एक बार में ली जाने वाली CCL कम से कम 5 दिन की होनी चाहिए।
चलते-चलते: रेल कर्मचारियों के लिए एक जरूरी सलाह
अगर हम इस पूरी बातचीत को समेटकर देखें, तो रेलवे के ये लीव रूल्स साफ तौर पर दिखाते हैं कि विभाग अपने कर्मचारियों की सामाजिक और पारिवारिक जरूरतों को लेकर कितना गंभीर है। चौबीसों घंटे की इस कठिन नौकरी में छुट्टियों का यह गणित न सिर्फ आपको मानसिक शांति देता है, बल्कि सही समय पर सही छुट्टी चुनना आपके भविष्य को सुरक्षित भी करता है।
अक्सर कर्मचारियों के बीच अधूरी जानकारी के कारण गलतफहमियां हो जाती हैं, लेकिन अगर आपको इन बुनियादी बातों का पता है, तो आप बिना किसी तनाव के अपने हक का अवकाश ले सकते हैं और रिटायरमेंट के समय भी मिलने वाले पैसों (लीव एनकैशमेंट) का पूरा फायदा उठा सकते हैं। अपनी छुट्टियों का हिसाब हमेशा अपडेट रखें और जरूरत के समय सही विकल्प चुनें।
एक जरूरी सूचना
इस लेख में दी गई सभी जानकारियां भारतीय रेलवे स्थापना नियमावली के आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों के नियमों पर आधारित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य केवल रेल कर्मचारियों और पाठकों तक छुट्टियों के नियमों की जानकारी को बेहद सरल, आसान और व्यावहारिक भाषा में पहुंचाना है। यह कोई आधिकारिक सरकारी दस्तावेज या कानूनी सलाह नहीं है।
चूंकि रेलवे बोर्ड समय-समय पर प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार अपने नियमों और सर्कुलर में बदलाव या संशोधन (Amendments) करता रहता है, इसलिए किसी भी प्रकार के आधिकारिक प्रशासनिक आवेदन, सेवा संबंधी दावों, या कानूनी विवाद की स्थिति में इस ब्लॉग की जानकारी को अंतिम आधार न मानें। किसी भी आधिकारिक उपयोग के लिए केवल रेलवे बोर्ड (Railway Board) की ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम नीतिगत सर्कुलर, फिजिकल मैनुअल और स्थापना शाखा (Personnel Branch) के प्रामाणिक दस्तावेजों को ही अंतिम सत्य मानें और वहीं से इसकी पुष्टि करें। इस लेख में दिए गए उदाहरण केवल समझाने के उद्देश्य से काल्पनिक रूप से तैयार किए गए हैं।
पूरी जानकारी के लिए आप Ministry of Railways के नियमों को देख सकते हैं।