अनुभाग 1: भारतीय रेलवे में ट्रैक मशीनीकरण (Track Mechanization) की पृष्ठभूमि ( UNIMAT and MPT )
इस गाइड में हम UNIMAT and MPT ट्रैक मशीनों के बारे में विस्तार से जानेंगे। भारतीय रेलवे का रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े, जटिल और व्यस्ततम परिवहन प्रणालियों में से एक माना जाता है। इस विशाल नेटवर्क की रीढ़ की हड्डी इसकी पटरियाँ हैं, जिन पर चौबीसों घंटे सुपरफास्ट यात्री ट्रेनें, भारी मालगाड़ियाँ और कंटेनर वैगन दौड़ते रहते हैं…
रेलवे ट्रैक के पूरे नेटवर्क में सबसे नाजुक, सबसे महंगे और सबसे जटिल हिस्से उनके पॉइंट्स, क्रॉसिंग्स और टर्नआउट्स (Points, Crossings & Turnouts) होते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो टर्नआउट्स वे विशेष स्थान या ट्रैक डिवाइस हैं जो रेलगाड़ियों को एक पटरी से दूसरी पटरी पर जाने का रास्ता देते हैं।
इस टेक्निकल गाइड में हम UNIMAT and MPT ट्रैक मशीनों के वर्किंग प्रिंसिपल को विस्तार से समझेंगे
टर्नआउट्स पर पड़ने वाले गतिक बल (Dynamic Forces)
Points and Crossing में होने वाली समस्याएं और Mechanized Maintenance की ज़रूरत
भारतीय रेलवे के टर्न-आउट ट्रैकों पर जब कोई गाड़ी गुज़रती है, तो पॉइंट्स और क्रॉसिंग असेंबलियों पर बहुत भारी मात्रा में लेटरल फोर्सेज (Lateral Forces) यानी तिरछे बल काम करते हैं। क्रॉसिंग के पास रेल की निरंतरता (Continuity) टूटती है, चेक रेल पर कंस्ट्रेनिंग बल काम करते हैं, और पॉइंट्स पर क्रॉस लेवल्स में अंतर आ जाता है। इन सभी कारणों से पॉइंट्स और क्रॉसिंग्स की ट्रैक ज्योमेट्री बहुत तेज़ी से खराब होती है।
आधुनिक भारी ट्रैक संरचना (Heavy Track Structure) और स्लीपरों के बीच की कम दूरी के कारण इन जगहों पर ट्रैक को हाथ से उठाना (Lift), अलाइन करना (Align) और पैक करना बेहद मुश्किल काम है। अगर टर्न-आउट का मेंटेनेंस सही से न हो, तो यह क्षेत्र डिरेलमेंट (Derailment) के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। हाई ट्रैक स्पीड, भारी ट्रैफिक डेंसिटी और ब्लॉक की कम उपलब्धता के कारण आधुनिक कंक्रीट स्लीपरों वाले इन टर्नआउट्स की ज्योमेट्री बनाए रखने के लिए मैनुअल मेंटेनेंस नाकाफी है। इसी मैकेनिक्स को सुधारने के लिए रेलवे UNIMAT जैसी विशेष टैम्पिंग मशीनों का उपयोग करती है।
अपने विशेष डिजाइन और ज्यामिति के कारण, टर्नआउट्स पर सामान्य सीधे ट्रैक (Plain Track) के मुकाबले कई गुना अधिक तनाव पैदा होता है। जब भी कोई भारी इंजन या ट्रेन इन हिस्सों के ऊपर से गुजरती है, तो निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न होती हैं:
- परजीवी कंपन (Parasite Oscillation): खराब ट्रैक ज्यामिति के कारण रोलिंग स्टॉक (ट्रेन के डिब्बों और इंजनों) में असामान्य और खतरनाक कंपन होने लगता है।
- पहियों और पटरियों का घिसाव (Wear and Tear): इस कंपन के कारण पहियों के फ्लैंज और पटरियों के कोनों में बहुत तेजी से घिसाव बढ़ता है, जिससे पटरी टूटने का खतरा रहता है।
- सिग्नल गियर्स पर बुरा असर: टर्नआउट्स के नीचे होने वाली हलचल से पॉइंट रॉडिंग, रेल लुब्रिकेटर और सिग्नलों के नाजुक गियर बुरी तरह प्रभावित होते हैं, जिससे सिग्नल फेल्योर की घटनाएं बढ़ती हैं।
- सवारी की गुणवत्ता में कमी: यात्रियों को झटके महसूस होते हैं और यात्रा की सुरक्षा से समझौता होता है।
हाथों से मेंटेनेंस की सीमाएं और मशीनीकरण की जरूरत
पुराने समय में इन जटिल हिस्सों का रख-रखाव और पैकिंग रेल कर्मचारियों (गैंगमेन) द्वारा फावड़े और बीटर की मदद से हाथों से किया जाता था। पुराने समय में जब लकड़ी या स्टील के हल्के स्लीपर होते थे, तब यह मुमकिन था। लेकिन आधुनिक समय में भारी कंक्रीट स्लीपरों (PSC Sleepers) और भारी रेल प्रोफाइलों (जैसे 52 kg और 60 kg रेल) के आ जाने के कारण अब हाथों से इतनी सटीकता और मजबूती पाना मुमकिन नहीं रह गया है।
कंक्रीट का एक-एक स्लीपर सैकड़ों किलोग्राम भारी होता है, जिसे इंसानी हाथों से उठाकर सही लेवल पर लाना और उसके नीचे गिट्टी की बराबर पैकिंग करना नामुमकिन है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने, ब्लॉक की कमी को पूरा करने और आधुनिक कंक्रीट टर्नआउट्स को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए भारतीय रेलवे में UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन श्रृंखला को शामिल किया गया।
भारतीय रेलवे UNIMAT and MPT Track Machine Guide का महत्व
भारतीय रेलवे में सुरक्षित और सुगम रेल यात्रा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बहुत जरूरी है। इस कार्य में भारतीय रेलवे UNIMAT and MPT Track Machine Guide सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन मशीनों की मदद से ट्रैक की बारीक से बारीक कमियों को सुधारा जाता है, जिससे रेल हादसों का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाता है।
अनुभाग 2: ट्रैक मशीनों का वैश्विक इतिहास और तकनीकी विकास
UNIMAT and MPT वैश्विक इतिहास और तकनीकी विकास
ट्रैक के रख-रखाव को इंसानी हाथों से हटाकर मशीनों पर डालने का विचार रेलवे इंजीनियरिंग के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम था। वैश्विक स्तर पर यह विकास रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि पिछले 100 सालों की रिसर्च और इंजीनियरिंग का नतीजा है।
दुनिया भर में ट्रैक मशीनों के विकास का पूरा सफरनामा निम्नलिखित मुख्य पड़ावों के माध्यम से समझा जा सकता है:
- 1920 का दशक (शुरुआती मैकेनिकल प्रयास): दुनिया भर में सबसे पहला मैकेनिकल ऑफ-ट्रैक टैम्पर (Off-Track Tamper) आजमाया गया था। यह मशीन सीधे पटरियों पर नहीं चलती थी। इसे पटरी के बगल में खड़ा करके सिर्फ स्लीपरों के नीचे गिट्टी की हल्की पैकिंग या री-पैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
- 1945 (पहला ऑन-ट्रैक टैम्पर): स्विट्जरलैंड की प्रसिद्ध कंपनी मटीसा (Matissa) की स्थापना हुई। इस कंपनी ने इतिहास का सबसे पहला ऑन-ट्रैक टैम्पर बनाया, जिसका मॉडल नाम बी-60 रखा गया था। यह मशीन सीधे रेलवे ट्रैक पर खुद चलकर आ-जा सकती थी और पैकिंग कर सकती थी।
- 1953 (प्लासर एंड थ्युरर का उदय): ऑस्ट्रिया के लिंज शहर में प्लासर एंड थ्युरर (Plasser & Theurer) कंपनी ने अपना काम शुरू किया। उन्होंने ऑस्ट्रियन फेडरल रेलवे के लिए पहली हाइड्रोलिक टैम्पिंग मशीन एचजीएल का निर्माण किया। यहीं से ऑन-ट्रैक मशीनों में हाइड्रोलिक पावर का आधुनिक युग शुरू हुआ।
- 1955 (VKR 01 मॉडल): प्लासर कंपनी ने अपनी पहली नियमित उत्पादन लाइन वाली कैंटिलीवर डिजाइन की टैम्पिंग मशीन वीकेआर 01 बाजार में उतारी, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा।
- 1960 ( VKR 04): दुनिया की पहली ऑटोमैटिक लेवलिंग और टैम्पिंग मशीन बनाई गई। यह मशीन न सिर्फ पैकिंग करती थी, बल्कि पटरी को उठाकर खुद-ब-खुद लेवल में लाने में सक्षम थी।
- 1962 (WE 75 स्विच टैम्पर): मोड़ों, पॉइंट और क्रॉसिंग्स के लिए दुनिया की पहली विशेष स्विच टैम्पिंग मशीन बनाई गई। इसमें पहली बार झुकाने वाले (Tilting) टैम्पिंग टूल्स का इस्तेमाल किया गया था, जो टर्नआउट की बाधाओं से बचकर अंदर जा सकते थे।
- 1963 (ऑटोमैटिक लाइनिंग): दोहरे कॉर्ड मापने की तकनीक (Two Chord Measuring Technique) वाली पहली ऑटोमैटिक लाइनिंग मशीन का आविष्कार हुआ, जिसने पटरी के सीधेपन को परफेक्ट किया।
- 1964 (RM 62 बैलास्ट क्लीनर): पटरियों के नीचे की गिट्टी में जमी मिट्टी को साफ करने के लिए पहली हाइड्रोलिक बैलास्ट क्लीनिंग मशीन बनाई गई।
- 1965 (Duomatic तकनीक): काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए पहली बार दो स्लीपरों को एक साथ दबाने वाली डुओमैटिक (Duomatic) मशीन अस्तित्व में आई, जिससे ब्लॉक का समय बचने लगा।
- 1970 (07 सीरीज का आगमन): प्लासर कंपनी ने अपनी प्रसिद्ध 07 सीरीज के तहत पहली आधुनिक लेवलिंग और टैम्पिंग मशीन लॉन्च की, जिसने इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत की।
- 1972 (07-275 टर्नआउट टैम्पर): स्विचों और टर्नआउट्स के लिए विशेष रूप से पहली लेवलिंग, लाइनिंग और टैम्पिंग मशीन 07-275 बनाई गई, जिसने आगे चलकर आधुनिक यूनिमैट सीरीज का आधार रखा।
- 1975 (डायनामिक ट्रैक स्टेबलाइजर): गिट्टी को कड़क करने और मशीन चलने के बाद पटरी को तुरंत ट्रैफिक के लिए सुरक्षित करने के लिए डायनामिक ट्रैक स्टेबलाइजर (DGS) तकनीक का आविष्कार हुआ।
- 1983 (09 CSM सीरीज): लगातार आगे बढ़ते हुए काम करने वाली पहली एक्शन टैम्पिंग मशीन (Continuous Action Tamping Machine) बनाई गई, जिसमें मशीन का चेसिस लगातार चलता था और वर्किंग सैटेलाइट रुक-रुक कर पैक करती थी।
- 1996 (3-स्लीपर टैम्पर): तीन स्लीपरों को एक साथ पैक करने वाली दुनिया की पहली continuous action 3-sleeper टैम्पिंग मशीन अस्तित्व में आई, जिसने उत्पादकता को चरम पर पहुँचा दिया।

अनुभाग 3: भारतीय रेलवे में UNIMAT and MPT का आगमन और टाइमलाइन
भारतीय रेलवे में पटरियों के रख-रखाव को आधुनिक बनाने का काम बहुत ही व्यवस्थित तरीके से शुरू किया गया था। भारत में मशीनीकरण का इतिहास साल 1963 से शुरू होता है, लेकिन पॉइंट्स, क्रॉसिंग्स और स्पॉट अटेंशन के क्षेत्र में UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन का असली सफर इस प्रकार रहा:
UNIMAT मशीन श्रृंखला का भारत में इतिहास
- 07-275 UNIMAT (आगमन वर्ष: 1984): यह भारतीय रेलवे में शामिल होने वाली सबसे पहली पॉइंट्स एंड क्रॉसिंग्स टैम्पिंग मशीन थी, जिसे प्लासर इंडिया द्वारा सप्लाई किया गया था। यह एक 2 एक्सल वाला वाहन था जिसकी अधिकतम ड्राइविंग स्पीड 50 KMPH थी। इसमें केवल 2 टैम्पिंग यूनिट्स थीं जो साइड में खिसक सकती थीं। हर यूनिट में 4 टूल्स (कुल 8 टैम्पिंग टूल्स) होते थे। यह मशीन सिंगल स्लीपर को दबाती थी और एक पूरे टर्नआउट को पैक करने में लगभग 1 घंटा 30 मिनट का समय लेती थी। वर्तमान में यह पुराना मॉडल भारतीय रेलवे के सभी जोनों से पूरी तरह से बंद और अप्रचलित हो चुका है।
- 08-275 UNIMAT या UNIMAT-2S (आगमन वर्ष: 1989-90): तकनीक को बेहतर बनाते हुए 08-सीरीज की पॉइंट्स एंड क्रॉसिंग्स टैम्पिंग मशीन भारत लाई गई, जिसे भारतीय रेलवे में UNIMAT-2S का नाम दिया गया। इस मशीन में कुल 16 टैम्पिंग टूल्स दिए गए जिन्हें काम के दौरान झुकाया जा सकता था। इसमें मुख्य गियरबॉक्स ZF कंपनी का लगाया गया और तीन कैबिन (फ्रंट, रियर और वर्किंग) दिए गए। भारतीय रेलवे में मशीन सीरीज नंबर 8249 से लेकर 8260 तक की सभी मशीनें इसी UNIMAT-2S मॉडल की हैं।
- 08-275 UNIMAT-3S (आगमन वर्ष: 1993-94): टर्नआउट्स के झुके हुए और लंबे स्लीपरों को सुरक्षा देने के लिए नया सुधरा हुआ मॉडल UNIMAT-3S पेश किया गया। इसमें सबसे मुख्य विशेषता यह थी कि इसमें टर्नआउट साइड की तीसरी रेल को उठाने के लिए केंटिलीवर अरेंजमेंट (3rd Rail Lifting) दिया गया था। इसके सभी चारों एक्सल पावर्ड थे और इसकी टैम्पिंग यूनिट झुके हुए स्लीपरों के लिए दोनों तरफ 8.5 डिग्री तक घूम सकती थी। भारतीय रेलवे में मशीन सीरीज नंबर 8261 और उससे ऊपर की सभी मशीनें इसी 3S सीरीज की हैं।
- 08-475 UNIMAT-4S (आगमन वर्ष: 2009): यह भारतीय रेलवे का सबसे आधुनिक और पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टर्नआउट टैम्पर है। इसमें 2 बोगी (2-2 एक्सल) और एक आइडल एक्सल (कुल 5 एक्सल) होते हैं। इसमें पहली बार 3-रेल सिंक्रोनस लिफ्टिंग और 4-रेल टैम्पिंग तकनीक शामिल की गई, जिसके कारण इसका आउटपुट बढ़कर सीधे 2 टर्नआउट प्रति घंटा हो गया। इसमें पूरी तरह से ऑटोमैटिक टैम्पिंग साइकिल दी गई है।
MPT (Multi-purpose Tamper) मशीन श्रृंखला का भारत में इतिहास
- UNIMAT COMPACT / MPT ओल्ड सीरीज (आगमन वर्ष: 1999): ट्रैक पर जगह-जगह आने वाले छोटे-मोटे फॉल्ट्स को ठीक करने (Spot Attention) और इंजीनियरिंग सामान को ले जाने के लिए पुरानी सीरीज के MPT को शामिल किया गया। भारतीय रेलवे में इनका सीरीज नंबर MPT-2000 से MPT-2008 तक है। इसमें 6.5 मीटर लंबे रेल के टुकड़ों को उठाने के लिए 1 टन की क्षमता वाली एक छोटी जिब क्रेन लगी होती थी।
- UNIMAT SH MFI / MPT न्यू सीरीज (आगमन वर्ष: 2012): तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाकर ‘UNIMAT Split Head Multi-Functioning for India’ (MFI) यानी नई सीरीज के MPT को लॉन्च किया गया, जिसका सीरीज नंबर 2009 से 2016 तक है। इसमें पुरानी क्रेन को हटाकर 2 टन की हैवी टेलीस्कोपिक क्रेन दी गई, स्प्लिट हेड टैम्पिंग यूनिट्स लगाई गईं और रोलर क्लैम्प्स की सुविधा दी गई।
- लेटेस्ट MPT स्पेसिफिकेशन (संशोधन वर्ष: 2024): भारतीय रेलवे ने ब्रॉड गेज पटरियों पर आधुनिक कंक्रीट स्लीपर्स वाले टर्नआउट्स, SEJ जॉइंट्स, स्विच एक्सपेंशन जॉइंट्स, ग्लू ड जॉइंट्स और पुलों पर बिना गार्ड रेल हटाए भारी ड्यूटी ऑपरेशन करने के लिए सबसे आधुनिक MPT (Specification No: TM/HM/MPT-367 Rev. 04 of 2024) के तकनीकी मानकों को लागू किया है।
भारतीय रेलवे UNIMAT and MPT Track Machine Guide के मुख्य कार्य
रेलवे ट्रैक के रखरखाव और पॉइंट्स एवं क्रॉसिंग्स की सही सेटिंग के लिए यह गाइड एक बेहतरीन मार्गदर्शिका है। भारतीय रेलवे UNIMAT and MPT Track Machine Guide के नियमों का पालन करके ट्रैक मशीनों की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है बल्कि ट्रैक की उम्र भी लंबी होती है।
अनुभाग 4: UNIMAT and MPT प्री-टैम्पिंग, ड्यूरिंग-टैम्पिंग और पोस्ट-टैम्पिंग की विस्तृत चेकलिस्ट
UNIMAT and MPT प्री-टैम्पिंग आवश्यकताएं और विस्तृत चेकलिस्ट
सर्वश्रेष्ठ मेंटेनेंस प्रैक्टिस (Best Maintenance Practices) और मशीन से सबसे शानदार और सटीक आउटपुट पाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि मशीन चलाने से पहले, उसके संचालन के दौरान और काम खत्म होने के बाद नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए।
हैंडबुक के अनुसार इसकी पूरी व्यावहारिक चेकलिस्ट नीचे दी गई है:
1. टैम्पिंग से पहले की आवश्यकताएं और ऑपरेशन्स (Pre-Tamping Check)
मशीन को ब्लॉक में उतारने से पहले इंजीनियरिंग स्टाफ को निम्नलिखित काम काफी पहले ही पूरे कर लेने चाहिए, ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो:
- गिट्टी का कुशन (Ballast Cushion): मशीन के सही ढंग से काम करने के लिए ट्रैक के नीचे कम से कम 150 mm का साफ गिट्टी का कुशन होना अनिवार्य है। इसके साथ ही कंधों (Shoulders) और स्लीपरों के बीच (Cribs) पर्याप्त गिट्टी होनी चाहिए ताकि पैकिंग के बाद पटरी अपनी जगह पर टिकी रहे।
- डीप स्क्रीनिंग और मटीरियल सर्वे: गिट्टी की डीप स्क्रीनिंग और एक्स्ट्रा गिट्टी डालने (Training out of ballast) का काम पहले ही पूरा हो जाना चाहिए। टर्नआउट के सटीक डिजाइन मापदंडों को पाने के लिए लिफ्टिंग और स्लीव (Lifting & Slew) का विस्तृत सर्वे पहले से किया जाना चाहिए।
- मंजूरियां और ब्लॉक प्लानिंग: कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) से संबंधित टैम्पिंग मशीन को चलाने की लिखित मंजूरी होनी चाहिए और पर्याप्त अवधि का ट्रैफिक ब्लॉक पहले से प्लान होना चाहिए।
- स्लीपर स्पेसिंग: सभी स्लीपरों की स्पेसिंग पूरी तरह से समान (Uniformly Spaced) होनी चाहिए।
- मार्किंग और विजिबिलिटी: मोड़ों की शुरुआत, अंत, ट्रांजिशन कर्व, सुपर-एलिवेशन और स्लीव की मात्रा को स्लीपरों पर साफ-साफ मार्क किया जाना चाहिए ताकि मशीन ऑपरेटर को गाइडेंस मिले।
- फिटिंग्स की मजबूती: पटरी के सभी फिटिंग्स और फास्टेनिंग्स को अच्छे से टाइट किया जाना चाहिए। जो फिटिंग्स खराब या गायब हैं, उन्हें तुरंत बदला जाना चाहिए। स्लीपरों का लेआउट, स्पेसिंग, स्क्वायरिंग और गेज पूरी तरह सही होना चाहिए।
- बाधाओं को हटाना: पटरी पर लगे सभी रेल लुब्रिकेटर, सिग्नल रॉड्स, पॉइंट मशीन के पुर्जे और केबल पाइप जो मशीन के टैम्पिंग टूल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं या रुकावट पैदा कर सकते हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से मार्क करके अस्थाई रूप से हटा देना या रीडायरेक्ट कर देना चाहिए।
- अस्थायी चीजें हटाना: पटरी पर लगी सभी अस्थायी लकड़ी के गुटके (Wooden Blocks) और जॉगल्ड फिशप्लेट (Joggled Fishplates) को टैम्पिंग से पहले हटा देना चाहिए।
- ओएचई अर्थिंग बॉन्ड: इलेक्ट्रिफाइड (OHE) सेक्शन में अर्थिंग बॉन्ड को या तो हटा देना चाहिए या टैम्पिंग के लिए सुरक्षित रूप से एडजस्ट कर देना चाहिए।
- क्रॉसिंग का रीकंडीशनिंग: क्रॉसिंग का जो हिस्सा घिस या टूट गया है (Battered nose), उसे वेल्डिंग के जरिए पहले ही ठीक या रिप्लेस कर देना चाहिए और उसके नीचे के स्लीपरों को दुरुस्त करना चाहिए।
- जनरल लिफ्ट: टर्नआउट और उसके एप्रोच ट्रैक पर हाई पॉइंट्स की पहचान की जानी चाहिए और कम से कम 10 mm का जनरल लिफ्ट फिक्स किया जाना चाहिए।
2. टैम्पिंग के दौरान किए जाने वाले ऑपरेशन्स (During Tamping) UNIMAT and MPT
जब मशीन ब्लॉक के भीतर काम कर रही हो, तो ऑपरेटर और फील्ड स्टाफ को इन बातों का ध्यान रखना होता है:
- मेन लाइन की टैम्पिंग पहले: टर्नआउट को पैक करते समय हमेशा पहले मेन लाइन (Main Line) वाले हिस्से को टैम्प किया जाता है। जब मेन लाइन को उठाया और अलाइन किया जाता है, तो एडिशनल लिफ्टिंग अरेंजमेंट टर्नआउट साइड की पटरी को भी उठाता है।
- लकड़ी के गुटकों का सपोर्ट: लिफ्ट किए गए स्लीपरों के सिरों को पर्याप्त रूप से लकड़ी के गुटकों (Wooden Wedges) का सपोर्ट तब तक दिया जाना चाहिए जब तक कि वहां पूरी तरह से टैम्पिंग या पैकिंग न हो जाए।
- टर्नआउट साइड की पैकिंग: मशीन मुख्य लाइन पर तो लिफ्टिंग, लाइनिंग और टैम्पिंग तीनों काम करती है, लेकिन टर्नआउट साइड पर केवल टैम्पिंग (Packing) की जाती है, बिना लिफ्टिंग और लाइनिंग के।
- स्क्वीजिंग प्रेशर (Squeeding Pressure): अलग-अलग स्लीपरों के हिसाब से हाइड्रोलिक प्रेशर को सेट करना बहुत जरूरी है:
- स्टील ट्रफ (ST) या लकड़ी के स्लीपरों के लिए: 100 से 110 bar (या 110-115 kg/sq.cm)।
- कंक्रीट (PSC) स्लीपरों के लिए: 135 से 150 bar (या 135-140 kg/sq.cm)।
- पेनिट्रेशन असिस्टेंस: यदि गिट्टी बहुत ज्यादा कड़क (Caked Ballast) है और टूल्स को अंदर जाने में दिक्कत हो रही है, तो Mechanical Penetration Assistance System का उपयोग करना चाहिए ताकि टूल्स आसानी से गिट्टी के भीतर धंस सकें।
- सामंजस्य: काम के दौरान एसएंडटी (S&T) और इलेक्ट्रिकल स्टाफ को मशीन स्टाफ के साथ लगातार मौजूद रहना चाहिए ताकि सिग्नलों का काम साथ-साथ पूरा हो सके।
3. टैम्पिंग के बाद के जरूरी काम (Post-Tamping Check)
मशीन का काम खत्म होने के बाद ट्रैक को दोबारा सुरक्षित घोषित करने के लिए ये कदम उठाए जाते हैं:
- फिटिंग्स को पूरा करना: टैम्पिंग के दौरान यदि कोई फिटिंग ढीली हुई हो, तो उसे दोबारा पूरी तरह से टाइट किया जाना चाहिए।
- सिस्टम की बहाली: जो भी एसएंडटी (S&T), पॉइंट रॉडिंग या इलेक्ट्रिकल अर्थिंग बॉन्ड काम से पहले हटाए गए थे, उन्हें वापस अपनी जगह पर सुरक्षित रूप से री-स्टोर किया जाना चाहिए।
- ट्रैक पैरामीटर्स की रिकॉर्डिंग: काम के बाद रिकॉर्ड किए गए ट्रैक के आंकड़े (जैसे – अलाइनमेंट, क्रॉस लेवल, अनइवननेस) निम्नलिखित निर्धारित सीमाओं से बाहर नहीं होने चाहिए:
- अलाइनमेंट (Alignment): 1 किलोमीटर में 10 से ज्यादा पीक ±4 mm से बाहर नहीं होने चाहिए, और कोई भी अकेला पीक ±6 mm से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
- क्रॉस लेवल (Cross Level): इसकी सीमा ±6 mm के भीतर होनी चाहिए, इससे ऊपर कोई पीक स्वीकार्य नहीं है।
- अनइवननेस (Unevenness): 1 किलोमीटर में 10 से ज्यादा पीक 6 mm से बाहर नहीं होने चाहिए, और कोई भी अकेला पीक 10 mm से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
अनुभाग 5: UNIMAT and MPT विस्तृत ढांचागत और तकनीकी मुकाबला
रेलवे जूनियर इंजीनियर (JE) और सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) की परीक्षाओं में UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन के बीच का अंतर सबसे महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक माना जाता है। ऊपरी तौर पर ये दोनों मशीनें टर्नआउट्स पर काम करती दिखती हैं, लेकिन इनकी आंतरिक बनावट, काम करने की क्षमता और डिज़ाइन में ज़मीन-आसमान का अंतर होता है।
इन दोनों मशीनों के बीच के तकनीकी और व्यावहारिक अंतर को नीचे दिए गए ठोस और विस्तृत बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
1. मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली (Core Purpose & Application)
- UNIMAT श्रृंखला: इसे विशेष रूप से केवल आधुनिक, भारी और संवेदनशील टर्नआउट्स (Points and Crossings) की पूरी री-लाइनिंग, परफेक्ट लेवलिंग और कड़क टैम्पिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मुख्य फोकस बड़े रेलवे स्टेशनों के यार्ड और क्रॉसओवर पॉइंट्स को दुरुस्त रखना है।
- MPT श्रृंखला: यह एक बहु-उद्देशीय (Multi-Purpose) मशीन है। इसका प्राथमिक काम स्पॉट टैम्पिंग (Spot Tamping या Spot Attention) है। यानी, पूरे ट्रैक पर जहाँ-जहाँ अचानक गिट्टी ढीली हो जाए या कंक्रीट के स्लीपर बैठ जाएं, यह मशीन वहाँ जाकर केवल उसी हिस्से को ठीक करती है। इसके अलावा यह प्लेन ट्रैक और टर्नआउट दोनों पर काम कर सकती है।
2. कैबिन की संख्या और डिज़ाइन (Cabins Structure) UNIMAT and MPT
- UNIMAT श्रृंखला: इस मशीन में काम की बारीकी और ऑपरेटर की सहूलियत के लिए कुल 3 कैबिन दिए जाते हैं। मशीन के दोनों सिरों पर एक-एक फ्रंट और रियर ड्राइविंग कैबिन होता है, और मशीन के बिल्कुल बीच में एक विशेष वर्किंग कैबिन (Working Cabin) होता है, जहाँ बैठकर ऑपरेटर सीधे ट्रैक और टैम्पिंग टूल्स की हलचल को लाइव देख सकते हैं।
- MPT श्रृंखला: इस मशीन में केवल 2 ही कैबिन (दोनों सिरों पर एंड-कैबिन) दिए जाते हैं। इसमें कोई अलग से तीसरा वर्किंग कैबिन नहीं होता। इसका ऑपरेटर ड्राइविंग सीट से ही वर्किंग एरिया की निगरानी करता है।
3. जिब क्रेन और मटीरियल हैंडलिंग (Jib Crane & Platform)
- UNIMAT श्रृंखला: UNIMAT मशीनों पर भारी मटीरियल ले जाने के लिए कोई ओपन प्लेटफॉर्म या क्रेन नहीं लगी होती है। इसका पूरा चेसिस केवल टैम्पिंग और लिफ्टिंग मैकेनिज्म से भरा होता है।
- MPT श्रृंखला: इसके चेसिस के एक छोर पर कम से कम 7000 mm (7 मीटर) लंबा एक खुला लोडिंग प्लेटफॉर्म होता है। इस प्लेटफॉर्म पर 1 टन (पुरानी सीरीज) या 2 टन (नई सीरीज) की क्षमता वाली एक टेलीस्कोपिक जिब क्रेन (Telescopic Jib Crane) लगी होती है। इसकी मदद से 6.5 मीटर लंबी भारी रेल, 60 kg के भारी CMS क्रॉसिंग या कंक्रीट के भारी स्लीपरों को ट्रैक से सीधे उठाकर मशीन पर लोड और अनलोड किया जा सकता है।
4. कर्मचारियों और औजारों को ले जाने की क्षमता (Staff Carriage Capacity)
- UNIMAT श्रृंखला: यह मशीन अपने साथ एक्स्ट्रा फील्ड स्टाफ या गैंगमेन को साइट पर ले जाने के लिए डिज़ाइन नहीं की गई है। इसमें केवल मशीन ऑपरेटरों के बैठने की जगह होती है।
- MPT श्रृंखला: यह मशीन कार्यस्थल तक जाने वाले 5 से 12 ट्रैकमेन (कर्मचारियों) को उनके भारी औजारों (जैसे क्रो-बार, जैक) और छोटी मशीनों के साथ बहुत आसानी से आरामदायक सीटों पर बैठाकर साइट तक ले जा सकती है।
5. काम करने वाले ऑपरेटर्स की संख्या (Crew Requirements)
- UNIMAT श्रृंखला: इसके वर्किंग कैबिन के जटिल सिस्टम (जैसे लिफ्टिंग हुक कंट्रोल, केंटिलीवर एडजस्टमेंट) को संभालने के लिए काम के दौरान दो ऑपरेटरों की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है।
- MPT श्रृंखला: इसके पूरे टैम्पिंग ऑपरेशन, क्रेन मूवमेंट और ऑटोमैटिक कंट्रोल्स को सिर्फ एक ही ऑपरेटर द्वारा पूरी सटीकता से सिंगल-हैंडेड संभाला जा सकता है।
6. वर्किंग डायरेक्शन (काम करने की दिशा)
- UNIMAT श्रृंखला: इतिहास से लेकर आज तक की सभी UNIMAT मशीनों की काम करने की दिशा हमेशा रिवर्स (पीछे की तरफ) होती है।
- MPT श्रृंखला: पुरानी सीरीज की MPT मशीनों की दिशा भी रिवर्स थी, लेकिन साल 2012 के बाद आई नई सीरीज की सभी MPT मशीनों की काम करने की दिशा हमेशा फॉरवर्ड (आगे की तरफ) होती है।
7. तीसरी और चौथी रेल की क्षमता (3rd & 4th Rail Arrangement)
- UNIMAT श्रृंखला: इसके पास टर्नआउट के साइड वाले हिस्से यानी तीसरी रेल को उठाने और चौथी रेल तक जाकर पैकिंग करने का खास यूनिवर्सल केंटिलीवर सिस्टम होता है। (विशेषकर UNIMAT 4S मॉडल में)।
- MPT श्रृंखला: MPT मशीन में तीसरी रेल को सिंक्रोनस तरीके से उठाने या चौथी रेल तक जाकर टैम्पिंग करने का ऐसा कोई विशेष केंटिलीवर अरेंजमेंट नहीं होता है।
UNIMAT और MPT मशीनों का भारतीय रेलवे में पूरा इतिहास (Chronology)
भारतीय रेलवे में ट्रैक के यंत्रीकरण (Mechanization) की शुरुआत से लेकर अब तक अलग-अलग समय पर आधुनिक मशीनें शामिल की गई हैं, जिनका इतिहास नीचे दिए गए अनुसार है:
- UNIMAT-07-275 (वर्ष 1984): यह भारतीय रेलवे में सप्लाई की गई सबसे पहली 07-सीरीज़ प्रकार की पॉइंट्स और क्रॉसिंग्स टैम्पिंग मशीन थी, जिसे M/S Plasser (India) ने तैयार किया था। (नोट: यह मशीन अब पूरे भारतीय रेलवे में अप्रचलित यानी Obsolete हो चुकी है)।
- 08-275-UNIMAT-2S (वर्ष 1989-90): तकनीक को अपग्रेड करते हुए 08-सीरीज़ की इस पहली मशीन को शामिल किया गया, जिसका मशीन सीरीज़ नंबर 8249 से 8260 तक है।
- UNIMAT 08-275-3S (वर्ष 1993-94): यह 08-सीरीज़ का अगला उन्नत मॉडल था, जिसकी शुरुआत मशीन सीरीज़ नंबर 8261 और उससे ऊपर से हुई थी।
- Multipurpose Tamper – MPT (वर्ष 1999): भारतीय रेलवे में छोटे और विविध मरम्मत कार्यों को गति देने के लिए इसे लाया गया।
- UNIMAT-08-475-4S (वर्ष 2009): आधुनिक भारी कंक्रीट स्लीपर टर्नआउट्स को 3-रेल सिंक्रोनस लिफ्टिंग के साथ टैम्प करने के लिए यह अत्याधुनिक मशीन आई।
- MFI और SHMFI (वर्ष 2012): मल्टीफंक्शन इंडिया (MFI) और स्प्लिट हेड एमएफआई (SHMFI) तकनीक को साल 2012 में शामिल किया गया था।
UNIMAT-2S और UNIMAT-3S का पूरा टेक्निकल स्पेसिफिकेशन डेटा
अगर हम तकनीकी डेटा की बात करें, तो UNIMAT-2S और UNIMAT-3S के बीच काफी अंतर होता है, जिसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:
| तकनीकी पैरामीटर | UNIMAT-2S का डेटा | UNIMAT-3S का डेटा |
|---|---|---|
| कुल लंबाई (Overall Length) | 19,170 mm | 28,370 mm (ओवर सेंटर बफर कपलर) |
| कुल ऊंचाई (Overall Height) | 3,500 mm | 3,743 mm |
| कुल चौड़ाई (Overall Width) | 3,020 mm | 3,000 mm |
| पहिए का व्यास (Wheel Diameter) | 730 mm (घिसने पर मैक्सिमम 680 mm) | 920 mm |
| कुल वजन (Total Weight) | लगभग 44,000 kg (एक्सेल लोड ~11,000 kg) | 84,100 kg |
| इंजन मॉडल (Engine Model) | Cummins NT 855L | Cummins KTA-1150-L या MWM TBD-232-V12 |
| इंजन पावर (Rated Power) | 320 HP @ 2000 RPM | 473 BHP (या 350 kW @ 2100 RPM) |
| गियरबॉक्स ट्रांसमिशन | ZF Hydrodynamic Gearbox | ZF Gearbox Type 4WGII |
| सवारी की गति (Towing Speed) | 40 km/h (ट्रेन फॉर्मेशन में) | 100 km/h |
| एक्सेल की संख्या (Axles) | 4 एक्सेल (जिसमें केवल 3 एक्सेल पावर्ड हैं) | 4 एक्सेल (सभी 4 एक्सेल पावर्ड हैं) |
| टैम्पिंग यूनिट रोटेशन | लेटरल डिस्प्लेसमेंट की सुविधा | दोनों तरफ 8.5 डिग्री तक घूम सकती है |
| वाल्व सिस्टम | लिफ्टिंग-लाइनिंग के लिए 3-स्टेज वाल्व | लिफ्टिंग और Lining के लिए आधुनिक सर्वो वाल्व |
08-275 UNIMAT-2S मशीन की सीमाएं (Limitations) क्या थीं?
UNIMAT-2S एक माइक्रो-प्रोसेसर कंट्रोल टैम्पर होने के बावजूद टर्नआउट्स के मेंटेनेंस में कुछ जगहों पर असफल साबित हो रही थी, जिसकी मुख्य सीमाएं निम्नलिखित थीं:
- सटीकता की कमी: लंबे स्लीपरों वाले टर्नआउट साइड को यह पूरी तरह से लिफ्ट और पैक नहीं कर पाती थी, जिससे ट्रैक ज्योमेट्री में एब्सोल्यूट प्रिसिजन नहीं मिल पाता था।
- स्लीपरों में क्रैक्स का खतरा: लंबे प्रेशराइज्ड कंक्रीट स्लीपरों पर एब्नार्मल बेंडिंग और शेयरिंग टेंशन बनता था, जिससे स्लीपरों में दरारें आने का खतरा रहता था।
- असमान टैम्पिंग: मुख्य ट्रैक और टर्नआउट साइड दोनों की टैम्पिंग समान रूप से और लंबे समय तक टिकी नहीं रह पाती थी।
- सर्वो वाल्व की कमी: इस मॉडल में लिफ्टिंग और लाइनिंग के लिए सर्वो वाल्व (Servo Valves) मौजूद नहीं थे।
इन्हीं बड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए वर्ष 1994 में भारतीय रेलवे में UNIMAT 08-275-3S मॉडल को लाया गया, जिसमें 3rd रेल लिफ्टिंग अरेंजमेंट दिया गया था।
UNIMAT मशीनों के आंतरिक मैकेनिकल कंपोनेंट्स और मुख्य यूनिट्स
मशीन के सही संचालन के लिए इसके मुख्य असेंबली यूनिट्स को समझना ज़रूरी है, जो इस प्रकार हैं:
- Tamping Unit: UNIMAT-2S और 3S दोनों की टैम्पिंग यूनिट बुनियादी रूप से समान होती हैं, लेकिन 3S की यूनिट तिरछे स्लीपरों के लिए 8.5° तक घूम सकती है। इसमें 8 हाइड्रोलिक टूल टिल्टिंग सिलेंडर होते हैं, जो टूल को 15° अंदर और 85° बाहर की तरफ झुका सकते हैं। यह एक बार में केवल एक स्लीपर टैम्प करती है।
- Lifting & Lining Unit: यह एक मोनोब्लॉक टाइप यूनिट होती है, जिसके दोनों तरफ हुक (Hook) और दो-दो डिस्क क्लैंप रोलर (Disc Clamp Roller) दिए होते हैं। स्विच एरिया में हुक को मैनुअली कंट्रोल किया जाता है और प्लेन ट्रैक पर यह ऑटोमैटिक काम करती है।
- ZF Hydrodynamic Gear Box: यह फ्लूइड कपलिंग (Fluid Coupling) के सिद्धांत पर काम करने वाला आधुनिक गियरबॉक्स है। इसमें इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिकली संचालित क्लच होता है जो मशीन को 8 स्पीड (4 फॉरवर्ड और 4 रिवर्स) प्रदान करता है। इसके कारण दोनों केबिन से मशीन चलाना आसान हो जाता है।
- Distribution Gear Box: इसका मुख्य काम पावर ट्रांसमिशन है। यह ZF गियरबॉक्स से पावर लेकर अलग-अलग एक्सेल को कार्डन शाफ्ट (Cardan Shafts) के ज़रिए डिस्ट्रीब्यूट करता है।
- Reduction Gear Box: इसका उपयोग ‘वर्क ड्राइव सिस्टम’ (Working Mode) में स्लीपर-टू-स्लीपर मूवमेंट के समय होता है। यह हाइड्रोलिक मोटर से पावर लेकर आरपीएम (RPM) को कम करता है और ड्राइव को डिस्ट्रीब्यूटर गियरबॉक्स में भेजता है। रनिंग मोड के दौरान इसे ZF गियरबॉक्स से अलग (Disconnect) रखना अनिवार्य है।
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अनुभाग 6: इंजनों की बनावट और विभिन्न मॉडल्स का पावर गणित (Engine & Prime Mover)
UNIMAT और MPT ट्रैक मशीन को भारी कंक्रीट स्लीपरों को उठाने और गिट्टी के कड़े बेड के भीतर टूल्स को धंसाने के लिए अत्यधिक पावर की आवश्यकता होती है। इसके लिए इन मशीनों में दुनिया के सबसे भरोसेमंद और भारी-भरकम डीजल इंजनों (Diesel Engines) का इस्तेमाल किया जाता है।
ऑफिशियल हैंडबुक और RDSO के तकनीकी मानकों के अनुसार, अलग-अलग मॉडल्स के इंजनों का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
1. 08-275 UNIMAT (UNIMAT-2S) का इंजन
- मेक और मॉडल: इस शुरुआती मॉडल में कमिंस (Cummins) कंपनी का NTA 855 L इंजन लगाया गया था।
- बनावट: यह एक वाटर-कूल्ड (Water-cooled), इन-लाइन (In-line) वर्टिकल इंजन है, जिसमें 6 सिलेंडर होते हैं।
- विशेषता: यह इंजन टर्बोचार्जर (Turbocharger) और आफ्टर-कूलर (After-cooler) तकनीक से लैस है, जिससे यह धूल भरे और अत्यधिक गर्म मौसम में भी अपनी पूरी ताकत बनाए रखता है।
- पावर रेटिंग: यह इंजन 2000 RPM पर लगभग 320 HP (हॉर्सपावर) या 235 kW की निरंतर पावर जनरेट करता है। इस इंजन के साथ एक हैवी-ड्यूटी एयर कंप्रेसर सीधे अटैच होता है।
2. 08-275 UNIMAT-3S का इंजन
- पुरानी सीरीज का इंजन: पुराने UNIMAT-3S मॉडल्स में जर्मन तकनीक वाला MWM Engine लगाया गया था। यह एक वाटर-कूल्ड, V-शेप (V-shaped) वाला 12 सिलेंडर का एक बेहद विशाल इंजन था, जो 2000 RPM पर 473 HP की भारी ताकत देता था। इसमें दो टर्बोचार्जर लगे होते थे।
- नई सीरीज का इंजन: मेंटेनेंस और पार्ट्स की उपलब्धता को आसान बनाने के लिए नए UNIMAT-3S मॉडल्स में कमिंस का KTA 1150 इंजन लगाया गया, जो 2000 RPM पर 473 HP की समान पावर देता है।
3. 08-475 UNIMAT-4S का इंजन
- मेक और मॉडल: इस सबसे आधुनिक और हैवी-ड्यूटी मॉडल में कमिंस का KTA-1150-L इंजन फिट किया गया है।
- बनावट: यह एक वाटर-कूल्ड, 6 सिलेंडर इन-लाइन टर्बोचार्ज्ड इंजन है। इसकी क्यूबिक कैपेसिटी 18,450 cc होती है और इसका कम्प्रेशन रेशियो 6.7:1 होता है। इसका फायरिंग ऑर्डर (Firing Order) 1-5-3-6-2-4 होता है।
- पावर रेटिंग: यह इंजन 2100 RPM पर 350 kW (लगभग 473 HP) की जबरदस्त पावर सप्लाई करता है।
- ऑपरेटिंग पैरामीटर्स:
- वाल्व क्लीयरेंस: इनलेट वाल्व के लिए 0.76 mm और एग्जॉस्ट वाल्व के लिए 0.69 mm सेट किया जाता है।
- ल्यूब ऑयल प्रेशर: आइडल स्पीड पर कम से कम 1.5 bar और काम करने की पूरी स्पीड पर यह 7 bar तक पहुँच जाता है।
- अधिकतम पसंदीदा तापमान: इंजन का सुरक्षित ऑपरेटिंग तापमान अधिकतम 95 डिग्री सेल्सियस तक फिक्स किया गया है।
4. एमटीपी (MPT) मशीनों का इंजन स्पेसिफिकेशन
लेटेस्ट रेलवे स्पेसिफिकेशन के अनुसार, MPT मशीनों में भी कमिंस या उसके समकक्ष उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रॉनिक रूप से नियंत्रित (Electronically Controlled) डीजल इंजनों का उपयोग किया जाता है। प्रदूषण नियमों का पालन करने के लिए ये इंजन कम से कम EPA Tier 2, EURO Stage 2, या BS-II मानकों से ऊपर होने अनिवार्य हैं। लगातार 8 घंटे के हैवी ऑपरेशन के लिए इन मशीनों में कम से कम 1400 लीटर की क्षमता वाला एक विशाल ईंधन टैंक (Fuel Tank) दिया जाता है, जिसमें ईंधन का स्तर मापने के लिए पूरी ऊंचाई का साइट-ग्लास गेज लगा होता है।
5. एडिशनल इंजन (Emergency Backup System)
UNIMAT-4S और लेटेस्ट MPT मशीनों में एक सबसे बेहतरीन सुरक्षा फीचर दिया गया है, जिसे अतिरिक्त बैकअप इंजन कहा जाता है।
- मेक और प्रकार: इसमें आमतौर पर हैट्ज (Hatz) या किर्लोस्कर (Kirloskar) कंपनी का DA16 1B 40 मॉडल इंजन इस्तेमाल होता है।
- बनावट: यह 1 सिलेंडर वाला, फोर-स्ट्रोक (Four-stroke), एयर-कूल्ड (Air-cooled) छोटा डीजल इंजन होता है।
- पावर आउटपुट: यह 3000 RPM पर लगभग 6.8 kW की पावर देता है।
- काम: यदि ब्लॉक के बीच में मुख्य इंजन अचानक फेल हो जाए या हाइड्रोलिक पंप फट जाए, तो यह छोटा इंजन बैकअप हाइड्रोलिक पंप को चलाकर पटरी के भीतर धंसे हुए भारी टैम्पिंग टूल्स और लिफ्टिंग यूनिट्स को यांत्रिक रूप से ऊपर उठाकर लॉक कर देता है, ताकि ट्रैक तुरंत खाली किया जा सके और ट्रेनों का एक्सीडेंट न हो।
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अनुभाग 7: UNIMAT and MPT पावर ट्रांसमिशन और ZF गियरबॉक्स का मैकेनिज्म
UNIMAT और MPT ट्रैक मशीन की पावर को इंजन से पहियों तक पहुँचाने के लिए एक बेहद परिष्कृत पावर ट्रांसमिशन सर्किट डिज़ाइन किया गया है। यह सर्किट दो अलग-अलग मोड्स में काम करता है: ट्रैवल मोड (High-speed Traveling) और वर्किंग मोड (Slow Cyclic Movement)।
अत्याधुनिक ZF गियरबॉक्स (ZF Gear Box)
इस पूरी ट्रांसमिशन प्रणाली का सबसे मुख्य हिस्सा ZF गियरबॉक्स है। इसे ट्रैक मशीनों की दुनिया में एक नए युग का गियरबॉक्स माना जाता है।
- कार्य का सिद्धांत: यह गियरबॉक्स फ्लूइड कपलिंग (Fluid Coupling) के सिद्धांत पर काम करता है। इसमें एक बहुत ही शक्तिशाली हाइड्रो-डायनामिक या हाइड्रोलिक क्लच सिस्टम होता है, जिसे इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिकली (Electro-hydraulically) ऑन या ऑफ किया जा सकता है।
- स्पीड विकल्प: यह गियरबॉक्स मशीन को कुल 8 स्पीड प्रदान करता है, जिसमें 4 गियर आगे जाने के लिए (Forward) और 4 गियर पीछे जाने के लिए (Reverse) होते हैं।
- फायदा: इस गियरबॉक्स के आने से पहले पुरानी मशीनों में भारी मैकेनिकल लीवर अरेंजमेंट होता था, जिससे मशीन को दोनों कैबिनों से चलाना बेहद मुश्किल और थका देने वाला होता था। ZF गियरबॉक्स ने इस Cumbersome (जटिल) व्यवस्था को हटाकर ड्राइविंग को पूरी तरह से आसान और सुखद बना दिया है।
पावर डिस्ट्रीब्यूशन का पूरा गणित (Driving vs Working Mode)

इंजन की मुख्य पावर सबसे पहले लचीली कपलिंग या प्रोपेलर शाफ्ट (Cardan Shaft) के माध्यम से मुख्य ZF गियरबॉक्स तक पहुँचती है। इसके बाद पावर कैसे बंटती है, इसे नीचे दिए गए विवरण से समझें:
1. UNIMAT-2S का ट्रांसमिशन:
- ड्राइविंग मोड: यात्रा के दौरान केवल फ्रंट बोगी को ही पावर दी जाती है।
- वर्किंग मोड: काम के दौरान गियरबॉक्स से पावर को डिस्ट्रीब्यूटर गियरबॉक्स (Distribution Gear Box) में भेजा जाता है। वहाँ से कर्डन शाफ्ट्स के जरिए पावर को अलग-अलग एक्सल पर बांटा जाता है। ढलानों पर काम करने के लिए इसके रियर बोगी के एक्सल पर एक अतिरिक्त हाइड्रोलिक मोटर दी जाती है।
2. UNIMAT-3S का ट्रांसमिशन:
- ड्राइविंग मोड: यात्रा के दौरान केवल फ्रंट बोगी पावर्ड होती है और अधिकतमPermissible ट्रैवल स्पीड 60 kmph होती है।
- वर्किंग मोड: काम के दौरान फ्रंट बोगी के साथ-साथ इसका तीसरा एक्सल (Third Axle) भी पूरी तरह पावर्ड हो जाता है। पुरानी 3S मशीनों में ढलानों पर चलने के लिए रियर बोगी के एक्सल नंबर 3 और 4 पर दो हाइड्रोलिक मोटर्स दी जाती थीं।
3. UNIMAT-4S का आधुनिक ट्रांसमिशन:
- इन-बिल्ट डिज़ाइन: इसमें अलग से कोई डिस्ट्रीब्यूटर गियरबॉक्स नहीं होता, बल्कि डिस्ट्रीब्यूटर सिस्टम इसके रिडक्शन गियरबॉक्स के भीतर ही इन-बिल्ट (In-built) होता है।
- ड्राइविंग मोड: यात्रा के दौरान फ्रंट बोगी पावर्ड होती है।
- वर्किंग मोड: काम करते समय इसके फ्रंट बोगी के साथ-साथ रियर बोगी का तीसरा और चौथा एक्सल भी पूरी तरह से पावर्ड मोड में आ जाता है। यानी वर्किंग मोड में यह एक अत्यधिक शक्तिशाली व्हीकल बन जाता है जो टैम्पिंग साइकिल के दौरान लगने वाले अचानक एक्सीलरेशन और हैवी ब्रेकिंग के झटकों को आसानी से झेल लेता है।
अनुभाग 8: कोर टैम्पिंग सिस्टम और नॉन-सिनक्रोनस वाइब्रेशन का सिद्धांत (The Core Tamping Principle)
UNIMAT और MPT ट्रैक मशीन के संचालन का सबसे मुख्य उद्देश्य पटरियों के नीचे मौजूद गिट्टी (Ballast Bed) को इतनी मजबूती से पैक करना है कि वह हजारों टन भारी ट्रेनों का भार बिना अपनी जगह से डिगे संभाल सके। इसके लिए इन मशीनों में प्लासर एंड थ्युरर द्वारा विकसित किया गया अत्याधुनिक हाई प्रेशर वाइब्रेशन टैम्पिंग सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरा सिस्टम नॉन-सिनक्रोनस प्रेशर वाइब्रेशन टैम्पिंग सिद्धांत (Non-synchronous Pressure Vibration Tamping Principle) पर काम करता है।
नॉन-सिनक्रोनस टैम्पिंग की विशेषताएं
- समान सतह दबाव (Equal Surface Pressure): इस सिद्धांत के अनुसार, गिट्टी के भीतर धंसने वाले सभी टैम्पिंग टूल्स (Tynes) गिट्टी पर एक समान दबाव डालते हैं, भले ही उनकी गति और दूरी एक दूसरे से अलग हो। इससे पूरे स्लीपर के नीचे गिट्टी का घनत्व एक बराबर बैठता है।
- स्वतंत्र गति (Independent Tool Movement): जब टूल्स स्लीपर के दोनों तरफ नीचे जाते हैं, तो गिट्टी के भीतर मौजूद पत्थरों के प्रतिरोध (Ballast Resistance) के आधार पर हर टूल की जोड़ी पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करती है। यदि एक तरफ गिट्टी कम कड़क है, तो वहां का टूल तब तक अंदर दबता रहेगा जब तक कि वहां भी दूसरी तरफ जैसा कड़कपन न आ जाए।
- ऑटोमैटिक प्रेशर स्विच: जैसे ही कोई टूल जोड़ी पहले से तय किए गए स्क्वीजिंग प्रेशर (जैसे कंक्रीट स्लीपर के लिए 135-150 bar) तक पहुंच जाती है, एक सेल्फ-एक्ट्युएटिंग प्रेशर स्विच के कारण वह जोड़ी तुरंत अपनी जगह रुक जाती है। बाकी बचे हुए टूल्स तब तक अपना काम जारी रखते हैं जब तक वे भी उसी प्रेशर को हासिल न कर लें।
- गिट्टी का कड़ा होना: इस नॉन-सिनक्रोनस मोशन के कारण गिट्टी के पत्थर आपस में बहुत मजबूती से लॉक हो जाते हैं, जिससे ट्रैक में दोबारा गड़बड़ी होने की संभावना खत्म हो जाती है।
अनुभाग 9: UNIMAT टैम्पिंग यूनिट्स का तकनीकी विकास (Evolution of UNIMAT Tamping Units)
टर्नआउट्स की बनावट बेहद जटिल होती है क्योंकि वहां मुख्य लाइन की पटरी के साथ-साथ साइड लाइन की पटरियां और चेकमार्क रेल आपस में जुड़े होते हैं। ऐसी जगहों पर सामान्य सीधे ट्रैक जैसी फिक्स टैम्पिंग यूनिट काम नहीं कर सकती। इसलिए UNIMAT मशीनों में समय के साथ टैम्पिंग यूनिट्स में क्रांतिकारी बदलाव किए गए:
1. UNIMAT 2S और UNIMAT 3S की टैम्पिंग यूनिट
- टूल्स की संख्या: इन दोनों मॉडल्स में कुल 16 टैम्पिंग टूल्स लगे होते हैं, जो स्लीपर को दबाने के लिए जोड़ों (Pairs) में काम करते हैं।
- वर्टिकल गाइडिंग कॉलम: इसमें दो स्वतंत्र टैम्पिंग यूनिट्स मशीन के फ्रेम पर वर्किंग एक्सल के ठीक सामने लगी होती हैं। ये यूनिट्स बेहद मजबूत वर्टिकल गाइडिंग कॉलम के सहारे ऊपर और नीचे (Up and Down) मूव करती हैं। इन गाइडिंग कॉलमों को रबर टेपर एडेप्टर पर सपोर्ट दिया जाता है।
- लेटरल मूवमेंट (साइड में खिसकना): टर्नआउट के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँचने के लिए इन दोनों यूनिट्स को भारी हाइड्रोलिक सिलेंडरों की मदद से साइड में (बाईं और दाईं तरफ) खिसकाया जा सकता है।
- टूल्स टिल्टिंग मैकेनिज्म: टर्नआउट के तंग हिस्सों में पॉइंट मशीन की रॉड या रेल जोड़ों की बाधाओं से बचने के लिए इसमें 8 टूल्स टिल्टिंग हाइड्रोलिक सिलेंडर दिए गए हैं। इसकी मदद से हर टैम्पिंग टूल को उसकी सीधी वर्टिकल पोजीशन से 15 डिग्री अंदर की तरफ (Inwards) और 85 डिग्री बाहर की तरफ (Outwards) झुकाया जा सकता है।
- 3S मॉडल का एक्सियल घूर्णन: झुके हुए या तिरछे स्लीपरों (Slanting Sleepers) को परफेक्ट पैकिंग देने के लिए UNIMAT-3S की टैम्पिंग यूनिट को ऑपरेटर की सीट से ही दोनों तरफ 8.5 डिग्री तक अक्षीय रूप से घुमाया (Axial Rotation) जा सकता है।
2. UNIMAT 4S का यूनिवर्सल स्प्लिट हेड सिस्टम (Universal Split Head Tamping)
UNIMAT-4S में दुनिया का सबसे अत्याधुनिक यूनिवर्सल टैम्पिंग यूनिट सिस्टम लगाया गया है, जो टर्नआउट और प्लेन ट्रैक दोनों पर बिना किसी रुकावट के काम करता है:
- स्प्लिट हेड डिज़ाइन (Split Head Type): इसकी टैम्पिंग यूनिट पूरी तरह से 4 अलग-अलग स्वतंत्र भागों में बंटी होती है, जिसमें कुल 16 टिल्टेबल टूल्स लगे होते हैं। ये चारों भाग एक दूसरे से बिल्कुल स्वतंत्र होकर ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं जा सकते हैं।
- टेलीस्कोपिक आर्म्स (Telescopic Jibs): इसके दो बाहरी (Outer) टैम्पिंग भागों को अत्यधिक मजबूत टेलीस्कोपिक आर्म्स पर माउंट किया गया है। काम के दौरान ऑपरेटर इन आर्म्स को बाहर फैलाकर ट्रैक के सेंटर से 200 mm अंदर की तरफ और रिकॉर्ड तोड़ 1500 mm बाहर की तरफ तक खिसका सकता है। इसका मतलब है कि मशीन के केंद्र से यह कुल 3300 mm (3.3 मीटर) का फैलाव हासिल कर सकती है, जिससे टर्नआउट के सबसे लंबे स्लीपरों को भी एक ही बार में आसानी से पैक किया जा सकता है।
- आंतरिक भागों की क्षमता: इसके दो आंतरिक (Inner) भाग गाइडिंग कॉलम पर 200 mm अंदर और 640 mm बाहर तक खिसक सकते हैं।
- तिरछे स्लीपर्स के लिए एडजस्टमेंट: इसके चारों भाग तिरछे स्लीपर्स के लिए ऑपरेटर की सीट से ही 8.5 डिग्री तक घूम सकते हैं। इसके कारण यह मशीन मुख्य ट्रैक के साथ-साथ बगल से निकलने वाले ब्रांचिंग ट्रैक (Branching Track) की भी एक ही ऑपरेशन में टैम्पिंग कर सकती है।
अनुभाग 10: UNIMAT and MPT टैम्पिंग यूनिट और वाइब्रेशन इंजीनियरिंग
UNIMAT and MPT Track Machine Guide के तहत MPT मशीन का टैम्पिंग और वाइब्रेशन का गणित कंक्रीट स्लीपर्स पर स्पॉट अटेंशन (Spot Attention) देने के लिए विशेष रूप से ट्यून किया गया है:
MPT टैम्पिंग यूनिट (पुरानी बनाम नई सीरीज)
- ओल्ड सीरीज MPT (MPT-2000 से 2008): इन पुरानी मशीनों की टैम्पिंग यूनिट में टूल्स को झुकाने (Tool Tilting Facility) की व्यवस्था होती थी और इसमें टैम्पिंग यूनिट को 8.5 डिग्री का एक्सियल मूवमेंट (Axial Movement) दिया जाता था।
- न्यू सीरीज MPT (MPT-2009 से 2012 और 2024 स्पेसिफिकेशन): आधुनिक MPT मशीनों में स्प्लिट हेड (Split Head) टैम्पिंग यूनिट्स दी गई हैं, लेकिन इनमें पुराना 8.5 डिग्री का एक्सियल रोटेशन सिस्टम पूरी तरह हटा दिया गया है। यह डिज़ाइन कंक्रीट स्लीपर्स पर बिना किसी रुकावट के तेज स्पीड से काम करने के लिए अत्यधिक स्थिर और मजबूत साबित हुआ है।
वाइब्रेशन मैकेनिज्म के कड़े आंकड़े (Vibration System Parameters)
गिट्टी को कंक्रीट स्लीपर के नीचे लिक्विफाइड (तरल रूप) करके परफेक्टली सेट करने के लिए एक बहुत ही शक्तिशाली हाइड्रोलिक मोटर द्वारा संचालित एक्सेंट्रिक शाफ्ट (Eccentric Shaft) का उपयोग किया जाता है। पिस्टन रॉड्स इस शाफ्ट की घूमने वाली गति को स्विंग आर्म्स तक पहुँचाती हैं, जिससे टूल्स में तेज कंपन पैदा होता है। इसके निर्धारित आंकड़े निम्नलिखित हैं:
- वाइब्रेशन शाफ्ट की गति (Shaft RPM): इसके वाइब्रेशन शाफ्ट की गति लगभग 2100 RPM (रिवोल्यूशन प्रति मिनट) होती है।
- टूल्स की कंपन आवृत्ति (Frequency): इसके टूल्स (Tynes) की फ्रीक्वेंसी लगभग 35 Hz सेट होती है।
- वाइब्रेशन का आयाम (Amplitude): गिट्टी के पत्थरों को सही जगह सेट करने के लिए वाइब्रेशन का आयाम (Amplitude) लगभग 10 mm फिक्स होता है।
अनुभाग 11: लिफ्टिंग और लाइनिंग यूनिट्स का मोनोब्लॉक डिज़ाइन (Lifting & Lining Unit Mechanics)
ट्रैक की ऊँचाई को सही करने (Leveling) और पटरी के सीधेपन को परफेक्ट करने (Lining) के लिए दोनों मशीनों में एक बेहद भारी और गतिशील यूनिट लगी होती है, जो टैम्पिंग यूनिट के ठीक आगे स्थित होती है:
- मोनोब्लॉक टाइप डिज़ाइन (Monoblock Type): इन मशीनों में लिफ्टिंग और लाइनिंग यूनिट पूरी तरह से मोनोब्लॉक डिज़ाइन की होती है। काम की जरूरत के हिसाब से यह पूरी यूनिट रेल की दिशा में आगे या पीछे ±200 mm तक खिसक (Displace) सकती है।
- ट्रैक उठाने के दो साधन (Hooks & Rollers): पटरी को ऊपर उठाने के लिए इस यूनिट के दोनों तरफ Lifting Hook और दो-दो Disc Clamp Rollers (रोलर क्लैम्प) दिए होते हैं।
- प्लेन ट्रैक पर: रोलर क्लैम्प्स का इस्तेमाल पूरी तरह से ऑटोमैटिक मोड में किया जाता है, जो पटरी को पकड़कर ऊपर उठाते हैं। (नोट: पुरानी सीरीज की MPT मशीनों में रोलर क्लैम्प नहीं होते थे, लेकिन नई सीरीज MPT में यह सुविधा दी गई है)।
- टर्नआउट और स्विच एरिया में: जहाँ रोलर क्लैम्प्स बाधाओं के कारण पटरी को नहीं पकड़ पाते, वहाँ विशेष Lifting Hooks का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें ऑपरेटर मैनुअली कंट्रोल करता है।
- हाइड्रोलिक लिफ्टिंग सिलेंडर: मशीन के चेसिस से जुड़े दो भारी हाइड्रोलिक सिलेंडर और उनके पिस्टन रॉड्स सीधे लिफ्टिंग क्लैम्प के फ्रेम से जुड़े होते हैं, जो पूरी पटरी को ऊपर खींचते हैं।
- पूर्णतः ऑटोमैटिक लाइनिंग: लाइनिंग की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटिक होती है। इसमें Passer & Theorem One Chord System तकनीक का उपयोग करके पटरी के अलाइनमेंट की गलतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से पकड़ा जाता है और कंट्रोल यूनिट को भेजा जाता है। इसके बाद एक अत्यधिक सटीक हाइड्रोलिक सर्वो-वाल्व (Servo Valve) लाइनिंग सिलेंडर के प्रेशर को नियंत्रित करके पटरी को सही जगह खिसका देता है। जैसे ही पटरी अपनी टारगेट पोजीशन पर पहुँचती है, लिफ्टिंग और लाइनिंग अपने आप रुक जाती है।
- मोड़ पर लचीलापन (Curved Track Capability): यह लिफ्टिंग/लाइनिंग यूनिट सभी दिशाओं में पूरी तरह से गतिशील (Mobile) होती है। इसके कारण जब मशीन ट्रैक पर चलती है, तो यह मोड़ों (Curves) के हिसाब से खुद को बिना पटरियों पर फालतू का कड़क दबाव डाले बहुत आसानी से ढाल लेती है।
अनुभाग 12: हाइड्रोलिक सिस्टम और विभिन्न पंपों की संपूर्ण सूची (The Hydraulic System & Pumps List)
UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन के हर एक भारी और संवेदनशील मूवमेंट को कंट्रोल करने के लिए हाइड्रोलिक पावर (Hydraulic Power) का इस्तेमाल किया जाता है। चाहे स्लीपर के नीचे गिट्टी दबाना हो, कंक्रीट स्लीपर सहित भारी ट्रैक को ऊपर उठाना हो, या ट्रैक को साइड में खिसकाना हो—सब कुछ इसी सिस्टम से होता है। इन मशीनों में मुख्य रूप से 3 बड़े हाइड्रोलिक सर्किट काम करते हैं: वर्किंग सर्किट, ड्राइविंग सर्किट और प्रोपोरशनल कंट्रोल सर्किट।
इंजन के साथ जुड़े पंप डिस्ट्रीब्यूटर गियरबॉक्स (Pump Distribution Gear Box) के माध्यम से चलने वाले सभी मुख्य हाइड्रोलिक पंपों की सूची और उनके वर्किंग प्रेशर (Working Pressure) का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
- टैम्पिंग यूनिट और स्क्वीजिंग पंप (Squeezing Pump): यह एक अत्यधिक शक्तिशाली ‘वेन पंप’ (Vane Pump) होता है। इसका मुख्य काम टैम्पिंग टूल्स को गिट्टी के भीतर दबाने के लिए लगातार हैवी प्रेशर देना है। इसका वर्किंग प्रेशर कंक्रीट स्लीपरों के लिए 135 से 150 bar के बीच पूरी तरह फिक्स किया जाता है।
- लिफ्टिंग और लाइनिंग पंप (Lifting & Lining Pump): यह एक ‘डबल वेन पंप’ (Double Vane Pump) होता है। इसकी मदद से पटरी को ऊपर उठाने वाले लिफ्टिंग सिलेंडर और पटरी को दाएं-बाएं खिसकाने वाले लाइनिंग सिलेंडरों को ऑयल सप्लाई मिलती है। इसका वर्किंग प्रेशर 140 से 160 bar के बीच सेट रहता है।
- सर्वो कंट्रोल और पायलट पंप (Servo & Pilot Pump): यह एक छोटा लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पंप है। इसका काम लाइनिंग सिस्टम में लगे बेहद नाजुक हाइड्रोलिक सर्वो-वाल्व (Servo Valve) और डायग्नोस्टिक कंट्रोल्स को एक स्थिर (Stable) हाइड्रोलिक सिग्नल देना है। इसका प्रेशर हमेशा 35 bar से 50 bar के बीच फिक्स रखा जाता है।
- हाइड्रोलिक वाइब्रेशन मोटर पंप (Vibration Motor Pump): टैम्पिंग टूल्स के भीतर 2100 RPM का कड़क कंपन पैदा करने के लिए यह पंप सीधे मुख्य हाइड्रोलिक वाइब्रेशन मोटर को हाई-स्पीड ऑयल का फ्लो भेजता है। इसका प्रेशर लगभग 150 bar तक काम करता है।
- जिब क्रेन और प्लेटफॉर्म पंप (केवल MPT मशीन के लिए): MPT मशीन के पिछले हिस्से में लगी 2 टन की टेलीस्कोपिक जिब क्रेन और मटेरियल प्लेटफॉर्म को ऑपरेट करने के लिए अलग से एक ‘गियर पंप’ (Gear Pump) दिया जाता है। इसका वर्किंग प्रेशर 180 bar तक फिक्स किया गया है।
अनुभाग 13: UNIMAT and MPT हाइड्रोलिक एक्यूम्युलेटर और नाइट्रोजन प्रेशर का गणित (Hydraulic Accumulators & Nitrogen Pressure)
जब हाइड्रोलिक लाइन में अचानक तेल का प्रेशर कम होने लगता है या कोई भारी सिलेंडर बहुत तेजी से काम करता है, तो प्रेशर के उस झटके (Shock) को रोकने के लिए मशीनों में हाइड्रोलिक एक्यूम्युलेटर (Accumulator) का उपयोग किया जाता है। यह एक तरह का एनर्जी स्टोरेज डिवाइस है।
इन मशीनों में मुख्य रूप से दो प्रकार के एक्यूम्युलेटर होते हैं और उनके नाइट्रोजन चार्जिंग प्रेशर का पूरा गणित नीचे दिया गया है:
1. ब्लैडर टाइप एक्यूम्युलेटर (Bladder Type Accumulator)
- उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से टैम्पिंग यूनिट के स्क्वीजिंग सर्किट (Squeezing Circuit) में और मुख्य हाइड्रोलिक प्रेशर लाइन में होता है। इसके भीतर एक रबर का ब्लैडर होता है, जिसके अंदर सूखी नाइट्रोजन गैस (Dry Nitrogen Gas) भरी जाती है।
- नाइट्रोजन चार्जिंग प्रेशर: हैंडबुक के कड़े नियमों के अनुसार, सामान्य तापमान पर इसका नाइट्रोजन प्री-चार्ज प्रेशर 70 bar से 80 bar के बीच होना अनिवार्य है। यदि नाइट्रोजन गैस का प्रेशर कम हो जाए, तो टैम्पिंग टूल्स स्लीपर दबाते समय पूरी ताकत नहीं लगा पाएंगे।
2. डायफ्राम टाइप एक्यूम्युलेटर (Diaphragm Type Accumulator)
- उपयोग: इसका साइज छोटा होता है और यह बहुत तेजी से बदलने वाले प्रेशर को तुरंत बैलेंस कर सकता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लाइनिंग सिस्टम के सर्वो-वाल्व सर्किट और इमरजेंसी ब्रेकिंग लाइन में किया जाता है।
- नाइट्रोजन चार्जिंग प्रेशर: सर्वो लाइन की स्थिरता को बनाए रखने के लिए इसका नाइट्रोजन प्री-चार्ज प्रेशर 35 bar से 40 bar के बीच पूरी तरह सेट किया जाता है।
अनुभाग 14: UNIMAT and MPT सोलेनॉइड, सर्वो और प्रोपोरशनल वाल्व
हाइड्रोलिक तेल के प्रवाह (Direction) को सही समय पर और सही मात्रा में सिलेंडरों तक भेजने के लिए UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन में तीन प्रकार के अत्याधुनिक वाल्वों का उपयोग होता है:
- डायरेक्शनल सोलेनॉइड वाल्व (Solenoid Valve): यह एक इलेक्ट्रिकल ऑन-ऑफ (ON-OFF) वाल्व होता है। जब केबिन में बैठा ऑपरेटर कोई बटन दबाता है, तो 24V DC सप्लाई मिलते ही इस वाल्व की कॉइल एक्टिवेट हो जाती है और वह स्पूल को खींच लेती है। इससे तेल तुरंत टैम्पिंग यूनिट को ऊपर या नीचे करने वाले सिलेंडरों में चला जाता है।
- प्रोपोरशनल वाल्व (Proportional Valve): यह साधारण वाल्व की तरह केवल ऑन या ऑफ नहीं होता। इस वाल्व को जितना अधिक करंट (milli-Ampere यानी mA में) दिया जाता है, यह उतना ही अधिक खुलता है। इन मशीनों के ट्रैक लिफ्टिंग सिस्टम में इसका इस्तेमाल होता है ताकि भारी पटरी बिना कोई बड़ा झटका खाए बिल्कुल स्मूथ तरीके से मिलीमीटर की सटीकता में ऊपर उठ सके।
- हाइड्रोलिक सर्वो वाल्व (Servo Valve): यह पूरी मशीन का सबसे महंगा और संवेदनशील वाल्व है। यह सीधे लाइनिंग कंप्यूटर के सिग्नल पर काम करता है। ट्रैक को सीधा करते समय 1 मिलीमीटर से भी कम की गलती को सुधारने के लिए यह वाल्व तेल के फ्लो को बहुत ही सूक्ष्म तरीके से कंट्रोल करके लाइनिंग सिलेंडर को पुश करता है।
अनुभाग 15: UNIMAT and MPT हाइड्रोलिक ऑयल कूलिंग और फिल्ट्रेशन
लगातार 8 से 10 घंटे कड़े ब्लॉक में काम करने के कारण हाइड्रोलिक तेल बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। यदि तेल का तापमान 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाए, तो तेल का गाढ़ापन (Viscosity) खत्म हो जाता है और पंप फटने का खतरा रहता है।
- हाइड्रोलिक ऑयल कूलर (Oil Cooler): तेल को ठंडा रखने के लिए मशीन की छत पर या साइड में एक बहुत बड़ा रेडिएटर और हाइड्रोलिक मोटर से चलने वाला फैन लगाया जाता है। यह सिस्टम तेल के तापमान को हमेशा 45°C से 55°C के सुरक्षित दायरे में बनाए रखता है।
- फिल्ट्रेशन सिस्टम (Filtration): हाइड्रोलिक सिस्टम में यदि धूल का एक छोटा सा कण भी चला जाए, तो सर्वो वाल्व तुरंत जाम हो सकता है। इसलिए इसमें 3 लेवल की कड़क फिल्ट्रेशन होती है:
- सक्शन फिल्टर (Suction Filter): यह हाइड्रोलिक टैंक से पंप में तेल जाने के रास्ते में लगा होता है (100 माइक्रोन)।
- प्रेशर लाइन फिल्टर (Pressure Line Filter): यह पंप से निकलने के बाद सीधे वाल्व की तरफ जाने वाली हाई-प्रेशर लाइन में होता है (10 माइक्रोन)।
- रिटर्न लाइन फिल्टर (Return Line Filter): सिलेंडरों से काम खत्म करके तेल जब वापस टैंक में लौटता है, तो यह उसे पूरी तरह साफ करके टैंक में भेजता है (25 माइक्रोन)।
अनुभाग 15B: UNIMAT and MPT आरडीएसओ मेंटेनेंस शेड्यूल और कड़े वर्किंग आंकड़े (RDSO Maintenance Parameters)
भारतीय रेलवे के आधिकारिक रिसर्च डिज़ाइन्स एंड Standards Organisation (RDSO) के तकनीकी नियमों के अनुसार, हैवी ऑन-ट्रैक मशीनों की लाइफ बढ़ाने और उनके अचानक आने वाले ब्रेकडाउन को रोकने के लिए कुछ बहुत ही कड़े टेस्ट पैरामीटर्स और लुब्रिकेशन नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इस विशेष गाइड के तहत UNIMAT and MPT मशीनों के सुचारू संचालन के लिए जो सबसे मुख्य टेक्निकल, मैकेनिकल और लुब्रिकेशन आंकड़े निर्धारित किए गए हैं, उनका पूरा गहराई से विवरण नीचे दिया गया है:
1. विभिन्न कंपोनेंट्स के लिए हाइड्रोलिक वर्किंग प्रेशर (Recommended Test Pressures) UNIMAT and MPT
मशीन के संचालन के दौरान अलग-अलग सिस्टम को ट्रैक पर सुरक्षित और बिना किसी झटके के चलाने के लिए आरडीएसओ द्वारा निर्धारित हाइड्रोलिक और एयर प्रेशर (बार और किलोग्राम में) इस प्रकार हैं:
- सिस्टम प्रेशर (System Pressure): मशीन के सामान्य ऑपरेशन्स को संभालने के लिए मुख्य सिस्टम प्रेशर की सीमा हमेशा 130 से 140 bar के बीच बनी होनी चाहिए UNIMAT and MPT।
- हाई प्रेशर (High Pressure): ट्रैक को उठाते और लाइनिंग करते समय इस्तेमाल होने वाला हाई प्रेशर पूरी तरह से 150 bar पर फिक्स होना चाहिए।
- वाइब्रेशन प्रेशर (Vibration Pressure): टूल्स को गिट्टी के बेड में 2100 RPM की गति से कंपित करने के लिए 185 bars का अत्यधिक हैवी प्रेशर दिया जाता है।
- टैम्पिंग यूनिट इंटरलॉकिंग प्रेशर: काम खत्म होने के बाद या यात्रा के दौरान यूनिट्स को ऊपर लॉक और पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए 80 bar का प्रेशर आवश्यक है।
- इमरजेंसी पंप प्रेशर: यदि मुख्य इंजन अचानक बीच ट्रैक पर फेल हो जाए, तो बैकअप इमरजेंसी पंप को 130 bar पर काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ताकि टूल्स को ऊपर उठाया जा सके।
- एयर कंडीशनिंग प्रेशर: ऑपरेटर केबिन के भीतर धूल से बचने और एयर कंडीशनिंग (AC) को सुचारू रूप से चलाने के लिए 210 bar का प्रेशर सेट होता है।
- ZF ऑयल प्रेशर: फ्लूइड कपलिंग आधारित आधुनिक गियरबॉक्स के सुचारू क्लच और ड्राइविंग संचालन के लिए 12-14 bar का प्रेशर जरूरी है।
- ब्रेक प्रेशर और एयर प्रेशर: ब्रेक प्रणाली को संचालित करने के लिए मुख्य हाइड्रोलिक ब्रेक प्रेशर 30 से 70 bar और हवा का कुल दबाव (Air Pressure) 6-7 Kg/cm² होना अनिवार्य है।
2. ऑइल फिलिंग और मूल स्टॉक क्षमता (Original Working Stock Capacity) UNIMAT and MPT
मशीन का निर्माण होने के बाद मैन्युफैक्चरर द्वारा पहली बार पूरी मशीन के विभिन्न गियरबॉक्स और टैंकों में भरे जाने वाले तेल और लुब्रिकेंट्स की सटीक मात्रा (लीटर में) नीचे दी गई विस्तृत तालिका के अनुसार होती है:
- मुख्य इंजन ऑयल (Engine Oil): इंजन के सभी पिस्टन और मूविंग पार्ट्स को सुरक्षित रखने के लिए 35 Liters Vivoline 15 W40 (Shell) ग्रेड ऑयल डाला जाता है।
- पावर शिफ्ट गियरबॉक्स (ZF Gear): फ्लूइड कपलिंग आधारित हैवी ट्रांसमिशन के लिए इसमें 62 Liters ZF Servo 15W40 (Shell) ऑयल की आवश्यकता होती है।
- एक्सल गियर बॉक्स (Axle 1 to 4): ट्रैक पर ड्राइविंग लोड को संभालने के लिए चारों एक्सल गियरबॉक्स में 12.5 Liters (प्रत्येक एक्सल में अलग से) Servo G-80W90 (Shell) ऑयल भरा जाता है।
- कार्डन शाफ्ट पावर डिवाइडर: इंजन की पावर को डिस्ट्रीब्यूट करने वाले मुख्य पावर डिवाइडर के लिए 12 Liters Servo G-80W90 (Shell) ऑयल निर्धारित है।
- इंटरमीडिएट ड्राइव शाफ्ट: छोटे कनेक्टिंग ड्राइव शाफ्ट के गियर मैकेनिज्म के लिए 0.35 Liters Servo G-80W90 (Shell) ऑयल का उपयोग होता है।
- मुख्य हाइड्रोलिक ऑयल टैंक: पूरी मशीन के सिलेंडरों और मोटरों की जान यानी इसके मुख्य हाइड्रोलिक टैंक में रिकॉर्डतोड़ 1200 Liters Tellus oil T-68 (Shell) ऑयल भरा जाता है।
- इंजन कूलिंग एजेंट (Coolant): भयंकर गर्मियों में इंजन के तापमान को 95 डिग्री से नीचे बनाए रखने के लिए 85 Liters कूलिंग एजेंट और पानी का मिश्रण डाला जाता है।
- टैम्पिंग आर्म बेयरिंग ऑयल: लगातार होने वाले हैवी वाइब्रेशन से बेयरिंग को बचाने के लिए आर्म बेयरिंग में 1.2 Liters Tellus oil S-100 Shell ऑयल का इस्तेमाल होता है।
3. तेल की शुद्धता और कड़े रासायनिक मानक (Oil Purity Standards)
आरडीएसओ के कड़े नियमों के अनुसार, यदि हाइड्रोलिक तेल में हल्की सी भी गंदगी या नमी आ जाए तो मशीन के अत्यधिक महंगे सर्वो वाल्व और प्रोपोरशनल वाल्व तुरंत चोक होकर खराब हो सकते हैं। इसलिए तेल की जांच करते समय इन रासायनिक और भौतिक पैरामीटर्स का कड़ाई से ध्यान रखा जाता है:
- मैक्सिमम वॉटर कंटेंट (नमी की मात्रा): हाइड्रोलिक तेल में पानी का अंश बिल्कुल न के बराबर होना चाहिए। तेल में पानी की अधिकतम स्वीकार्य सांद्रता (Concentration) 1000 ppm (यानी कुल वॉल्यूम के हिसाब से मात्र 0.10%) ही हो सकती है। इससे ऊपर पानी होने पर तेल को तुरंत बदला जाता है।
- शुद्धता का स्तर (Purity Target): तेल के भीतर किसी भी प्रकार के महीन घिसाव वाले मेटल के कण न रहें, इसके लिए तेल की शुद्धता को हमेशा अंतरराष्ट्रीय मानक NAS 1638: 7-8 या ISO 4406: 19/16/13 के अनुसार बनाए रखना बेहद जरूरी है।
- एसिड कंटेंट (Total Acid Number – TAN): जब तेल नया और फ्रेश होता है, तो उसका टोटल एसिड नंबर 0.05 mg KOH/g होता है। लगातार काम करने के बाद उपयोग किए जा रहे पुराने तेल के लिए इसकी अधिकतम रासायनिक सीमा 0.05 से 1 mg / KOH/g के बीच ही स्वीकार्य है। यदि एसिडिटी 1 mg से ऊपर चली जाए, तो वह धातु के पाइपों को गलाने लगती है।
भारतीय रेलवे UNIMAT and MPT Track Machine Guide से जुड़े जरूरी निर्देश
फील्ड में काम करने वाले सभी इंजीनियर्स और तकनीशियनों के लिए भारतीय रेलवे UNIMAT and MPT Track Machine Guide के तकनीकी पहलुओं को समझना बेहद आवश्यक है। जब हम इन मशीनों के वर्किंग प्रिंसिपल और डायनेमिक फोर्सेस को सही से समझ लेते हैं, तो ट्रैक पर गोटिक बल (Dynamic Forces) के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अनुभाग 16: UNIMAT and MPT न्यूमेटिक ब्रेक सिस्टम और एयर कंप्रेसर
UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन को 100 kmph की हाई-स्पीड में दौड़ते समय सुरक्षित तरीके से रोकने के लिए और काम के दौरान ट्रैक पर स्थिर रखने के लिए एक अत्यधिक मजबूत न्यूमेटिक ब्रेक सिस्टम (हवा से चलने वाला ब्रेक) दिया जाता है। यह पूरा सिस्टम भारतीय रेलवे के कड़े ब्रेक मानकों के अनुसार काम करता है।
1. एयर कंप्रेसर और प्रेशर का गणित (Air Compressor Specifications)
मशीन में हवा का प्रेशर बनाने के लिए मुख्य इंजन से जुड़ा एक हैवी-ड्यूटी, मल्टी-सिलेंडर एयर कंप्रेसर लगा होता है।
- मुख्य रिज़र्ववायर प्रेशर (MR Pressure): कंप्रेसर हवा को खींचकर मुख्य टैंक (Main Reservoir) में जमा करता है। इसका वर्किंग प्रेशर हमेशा 7.0 से 8.0 kg/sq.cm के बीच बनाए रखा जाता है। जैसे ही प्रेशर 8.0 से ऊपर जाता है, अनलोडर वाल्व (Unloader Valve) एक्स्ट्रा हवा को बाहर निकाल देता है।
- ब्रेक पाइप प्रेशर (BP Pressure): पूरी मशीन और उसके साथ जुड़े वैगनों में ब्रेक को कंट्रोल करने के लिए ब्रेक पाइप का प्रेशर 5.0 kg/sq.cm पर पूरी तरह फिक्स रखा जाता है।
2. ब्रेक लगाने और रिलीज करने का सिद्धांत (Braking Principle)
यह सिस्टम Inverted Braking Principle पर काम करता है, जिसका मतलब है कि सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद सुरक्षित है:
- ब्रेक रिलीज होना: जब ब्रेक पाइप (BP) में पूरा 5.0 kg/sq.cm का प्रेशर भरा होता है, तो मशीन के ब्रेक पूरी तरह से रिलीज (खुले) रहते हैं और पहिया आसानी से घूम सकता है।
- ब्रेक लगना: जब ऑपरेटर कैबिन में लगे ब्रेक हैंडल (A9 Valve) की मदद से ब्रेक पाइप के प्रेशर को कम करता है (Drop करता है), तो ब्रेक सिलेंडर में हवा का प्रेशर जाता है और ब्रेक शू सीधे पहिए से चिपक जाते हैं। ब्रेक सिलेंडर का अधिकतम वर्किंग प्रेशर 3.0 kg/sq.cm से अधिक नहीं होना चाहिए।
अनुभाग 17: UNIMAT and MPT अत्याधुनिक KE डिस्ट्रीब्यूटर वाल्व और प्रोपोरशनल ब्रेकिंग (KE Distributor Valve & Proportional Braking)
इन मशीनों UNIMAT and MPT में ब्रेक को पूरी सटीकता से नियंत्रित करने के लिए जर्मनी की नॉर-ब्रेमसे (Knorr-Bremse) तकनीक पर आधारित अत्याधुनिक KE डिस्ट्रीब्यूटर वाल्व (KE Distributor Valve) लगाया जाता है।
1. KE डिस्ट्रीब्यूटर वाल्व का जादू
यह वाल्व पूरी ब्रेक प्रणाली का दिमाग होता है। यह ब्रेक पाइप में होने वाले मामूली प्रेशर ड्रॉप (Pressure Drop) को भी तुरंत भांप लेता है।
- सेंसिटिविटी: यदि ट्रैक पर चलते समय मशीन अचानक दो भागों में बंट जाए या कोई न्यूमेटिक पाइप फट जाए, तो यह वाल्व ब्रेक पाइप का प्रेशर तुरंत शून्य (0) कर देता है। इससे मशीन में तुरंत इमर्जेंसी ब्रेक (Emergency Brake) लग जाते हैं और कोई बड़ा एक्सीडेंट होने से बच जाता है।
- क्विक रिलीज: यह वाल्व ब्रेक को जितनी तेजी से लगाता है, काम खत्म होने पर उतनी ही तेजी से पूरी हवा को बाहर निकालकर ब्रेक को रिलीज भी कर देता है, जिससे समय की बचत होती है।
2. प्रोपोरशनल ब्रेकिंग मैकेनिज्म (Proportional Braking)
जब मशीन वर्किंग मोड में होती है और एक-एक स्लीपर आगे बढ़कर रुकती है, तब बार-बार ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इसके लिए इसमें प्रोपोरशनल ब्रेकिंग सिस्टम दिया गया है:
- वर्किंग मोड ब्रेक: इसमें हाइड्रोलिक प्रेशर और न्यूमेटिक प्रेशर दोनों मिलकर काम करते हैं। जैसे ही ऑपरेटर टैम्पिंग साइकिल पूरी करता है, प्रोपोरशनल वाल्व ब्रेक सिलेंडर में उतना ही प्रेशर भेजता है जितने की जरूरत मशीन को ठीक स्लीपर के ऊपर रोकने के लिए होती है। इससे मशीन बिना किसी बड़े झटके के बहुत स्मूथली रुकती है।
अनुभाग 18: UNIMAT and MPT इलेक्ट्रिकल कंट्रोल पैनल और 24V DC सर्किट
UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन के भीतर लगे सैकड़ों सोलेनॉइड वाल्व, रिले, कंप्यूटर और सेंसर बिना बिजली के काम नहीं कर सकते। इसके लिए इन मशीनों में एक बेहद जटिल लेकिन सुरक्षित इलेक्ट्रिकल नेटवर्क बिछाया जाता है।
1. मुख्य पावर सोर्स (Battery & Alternator)
- सिस्टम वोल्टेज: इन मशीनों का पूरा कंट्रोल सर्किट 24V DC (डायरेक्ट करंट) पर काम करता है। सुरक्षा के लिहाज से यह वोल्टेज इंसानों के लिए बिल्कुल सुरक्षित है।
- हैवी-ड्यूटी बैटरियां: मशीन को शुरू करने और इंजन बंद होने पर पावर देने के लिए 12V की दो हैवी-ड्यूटी लेड-एसिड बैटरियों को सीरीज (Series) में जोड़कर 24 वोल्ट का सेटअप बनाया जाता है। इनका स्पेसिफिक ग्रेविटी हमेशा 1.220 से 1.240 के बीच होना चाहिए।
- अल्टरनेटर का सेटअप: इंजन चालू होने पर बैटरियों को चार्ज करने के लिए और पूरे पैनल को बिजली देने के लिए मजबूत अल्टरनेटर लगाए जाते हैं।
- UNIMAT 2S और 3S: इनमें 55 एम्पियर के दो अल्टरनेटर होते हैं।
- UNIMAT 4S: इसमें 55 एम्पियर के दो और एक अतिरिक्त 120 एम्पियर का भारी अल्टरनेटर दिया गया है ताकि एडवांस कंप्यूटरों को बिना फ्लक्चुएशन के बिजली मिल सके।
2. इलेक्ट्रिकल कंट्रोल पैनल और वायरिंग सेफ्टी
मशीन के केबिन के भीतर एक बहुत बड़ा मुख्य इलेक्ट्रिकल पैनल बॉक्स होता है, जिसमें सैकड़ों रंग-बिरंगे तार और रिले लगे होते हैं।
- वायर कोडिंग: जैसा कि हमने पहले सेक्शन में जाना था, इसमें कोडिंग बहुत कड़क होती है। उदाहरण के लिए, प्लेसर मशीन की ड्राइंग में ‘b’ का मतलब ब्राउन (Brown) वायर होता है, और ‘OD/OA’ का मतलब अर्थिंग (Earth) पॉइंट होता है।
- MCB और फ्यूज सुरक्षा: हर एक नाजुक इलेक्ट्रॉनिक कार्ड और सोलेनॉइड वाल्व की सुरक्षा के लिए पैनल में विशेष मल्टी-पोल MCB (Miniature Circuit Breaker) और ग्लास फ्यूज लगाए जाते हैं। यदि किसी वाल्व में शॉर्ट सर्किट होता है, तो MCB तुरंत ट्रिप हो जाता है और कीमती इलेक्ट्रॉनिक कार्ड जलने से बच जाते हैं।
अनुभाग 19: UNIMAT and MPT इलेक्ट्रॉनिक कार्ड्स (PCB) और पीएलसी डायग्नोस्टिक सिस्टम (PLC & Electronic Cards)
आधुनिक UNIMAT 4S और लेटेस्ट MPT मशीनों में रिले लॉजिक को हटाकर पूरी तरह से PLC (Programmable Logic Controller) सिस्टम लगा दिया गया है, जो मशीन को पूरी तरह से ऑटोमैटिक बना देता है।
1. प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) की सुरक्षा
मशीन के मदरबोर्ड पैनल में कई नाजुक इलेक्ट्रॉनिक कार्ड्स लगे होते हैं जो सेंसर से आने वाले सिग्नलों (जैसे 4-20 mA या 0-10V) को प्रोसेस करते हैं।
- स्टैटिक चार्ज से सुरक्षा: इन कार्ड्स को कभी भी नंगे हाथों से या गीले हाथों से नहीं छूना चाहिए। इंसानी शरीर में मौजूद स्टैटिक चार्ज (Static Electricity) इन कार्ड्स के भीतर मौजूद माइक्रोप्रोसेसर को तुरंत फूंक सकता है।
- नमी और धूल से बचाव: पैनल बॉक्स के भीतर सिलिका जेल (Silica Gel) के पैकेट रखे जाते हैं ताकि बारिश के मौसम में नमी के कारण कार्ड्स में शॉर्ट सर्किट न हो।
2. ऑटोमैटिक डायग्नोस्टिक और SPS सॉफ्टवेयर
- विजुअल स्क्रीन: ऑपरेटर के सामने कैबिन में एक बड़ी विजुअल डिस्प्ले स्क्रीन होती है।
- फॉल्ट ढूंढना (Troubleshooting): यदि काम के दौरान कोई सोलेनॉइड वाल्व काम करना बंद कर देता है या कोई तार बीच से टूट जाता है, तो स्क्रीन पर तुरंत लाल बत्ती जल जाती है और फॉल्ट का एरर कोड (Error Code) आ जाता है। इससे ऑपरेटर को मल्टीमीटर लेकर घंटों तार ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती, वह सीधे खराब कंपोनेंट तक पहुंचकर उसे 2 मिनट में बदल देता है।
अनुभाग 20: UNIMAT and MPT महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी Ultimate MCQ Question Bank
यह विशेष प्रश्नोत्तरी (Question Bank) पूरी तरह से रेलवे के आधिकारिक वर्किंग पैटर्न और तकनीकी मैनुअल के आधार पर डिजाइन की गई है ताकि आपकी परीक्षाओं और फील्ड नॉलेज को कड़क बनाया जा सके:
Q1. भारतीय रेलवे में कंक्रीट स्लीपर्स वाले टर्नआउट्स की पैकिंग के लिए मुख्य रूप से किस मशीन का उपयोग होता है?
- (A) CSM 09
- (B) UNIMAT Turn-out Tamping Machine
- (C) BCM 80
- (D) DGS 62
- उत्तर: (B) UNIMAT Turn-out Tamping Machine
Q2. लेटेस्ट RDSO स्पेसिफिकेशन 2024 के अनुसार, एक आधुनिक MPT मशीन का अधिकतम एक्सल लोड कितने टन से कम होना चाहिए?
- (A) 18.22 टन
- (B) 20.50 टन
- (C) 22.82 टन
- (D) 25.00 टन
- उत्तर: (C) 22.82 टन
Q3. UNIMAT-4S मशीन टर्नआउट एरिया में काम करते समय एक घंटे में अधिकतम कितना आउटपुट दे सकती है?
- (A) 1 टर्नआउट प्रति घंटा
- (B) 2 टर्नआउट प्रति घंटा
- (C) 4 टर्नआउट प्रति घंटा
- (D) 5 टर्नआउट प्रति घंटा
- उत्तर: (B) 2 टर्नआउट प्रति घंटा
Q4. UNIMAT और MPT ट्रैक मशीनों में वाइब्रेशन शाफ्ट की गति कितनी निर्धारित की गई है?
- (A) 1500 RPM
- (B) 1800 RPM
- (C) 2100 RPM
- (D) 2500 RPM
- उत्तर: (C) 2100 RPM
Q5. कंक्रीट (PSC) स्लीपर्स की टैम्पिंग करते समय हाइड्रोलिक सिस्टम का स्क्वीजिंग प्रेशर कितना सेट किया जाना चाहिए?
- (A) 100-110 bar
- (B) 110-120 bar
- (C) 135-150 bar
- (D) 160-180 bar
- उत्तर: (C) 135-150 bar
Q6. UNIMAT-3S और 4S मॉडल्स में झुके हुए या तिरछे स्लीपर्स (Slanting Sleepers) को दबाने के लिए टैम्पिंग यूनिट को दोनों तरफ कितने डिग्री तक घुमाया जा सकता है?
- (A) 5.5 डिग्री
- (B) 8.5 डिग्री
- (C) 12.0 डिग्री
- (D) 15.0 डिग्री
- उत्तर: (B) 8.5 डिग्री
Q7. आधुनिक MPT मशीन के खुले मटेरियल प्लेटफॉर्म की न्यूनतम लंबाई कितनी होनी चाहिए ताकि 6500 mm की आधी लंबाई की रेल आसानी से आ सके?
- (A) 5000 mm
- (B) 6000 mm
- (C) 7000 mm
- (D) 8000 mm
- उत्तर: (C) 7000 mm
Q8. UNIMAT and MPT मशीनों में लगे फ्लूइड कपलिंग आधारित आधुनिक ZF गियरबॉक्स में कुल कितने गियर स्पीड विकल्प मिलते हैं?
- (A) 4 फॉरवर्ड और 2 रिवर्स
- (B) 4 फॉरवर्ड और 4 रिवर्स (कुल 8 स्पीड)
- (C) 6 फॉरवर्ड और 6 रिवर्स
- (D) केवल 2 स्पीड ऑटोमैटिक
- उत्तर: (B) 4 फॉरवर्ड और 4 रिवर्स (कुल 8 स्पीड)
Q9. मशीनों में लगे ब्लैडर टाइप एक्यूम्युलेटर में सामान्य तापमान पर सूखी नाइट्रोजन गैस का प्री-चार्ज प्रेशर कितना होना अनिवार्य है?
- (A) 20-30 bar
- (B) 35-40 bar
- (C) 70-80 bar
- (D) 100-110 bar
- उत्तर: (C) 70-80 bar
Q10. न्यूमैटिक ब्रेक सिस्टम के तहत मुख्य रिज़र्ववायर (Main Reservoir – MR) का वर्किंग प्रेशर हमेशा कितने दायरे में बनाए रखा जाता है?
- (A) 3.5 से 5.0 kg/sq.cm
- (B) 5.0 से 6.0 kg/sq.cm
- (C) 7.0 से 8.0 kg/sq.cm
- (D) 9.0 से 10.0 kg/sq.cm
- उत्तर: (C) 7.0 से 8.0 kg/sq.cm
Q11. UNIMAT-4S मशीन के बाहरी टैम्पिंग भागों को टेलीस्कोपिक आर्म्स की मदद से मशीन के केंद्र से बाहर की तरफ अधिकतम कितनी दूर तक खिसकाया जा सकता है?
- (A) 500 mm
- (B) 1000 mm
- (C) 1500 mm
- (D) 2000 mm
- उत्तर: (C) 1500 mm
Q12. ट्रैक मशीनों के कंट्रोल पैनल को सुरक्षित और शॉर्ट-सर्किट से दूर रखने के लिए इसमें किस प्रकार के इलेक्ट्रिकल वोल्टेज सिस्टम का उपयोग किया जाता है?
- (A) 12V AC
- (B) 24V DC
- (C) 110V AC
- (D) 230V DC
- उत्तर: (B) 24V DC
Q13. ट्रैक अलाइनमेंट की गलतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से पकड़ने के लिए दोनों मशीनों में किस विशेष कोर्ड तकनीक का उपयोग होता है?
- (A) Two Chord System
- (B) Plasser & Theurer One Chord System
- (C) Three Chord Wireless System
- (D) इनमें से कोई नहीं
- उत्तर: (B) Plasser & Theurer One Chord System
Q14. ब्रेक पाइप (BP) में हवा का फिक्स प्रेशर कितना बनाए रखा जाता है ताकि मशीन के ब्रेक पूरी तरह से रिलीज (खुले) रहें?
- (A) 3.5 kg/sq.cm
- (B) 4.2 kg/sq.cm
- (C) 5.0 kg/sq.cm
- (D) 7.0 kg/sq.cm
- उत्तर: (C) 5.0 kg/sq.cm
Q15. किसी भी ऑन-ट्रैक मशीन को चलाने से पहले स्लीपर के नीचे कम से कम कितने mm का साफ गिट्टी का कुशन (Clean Ballast Cushion) होना आवश्यक है?
- (A) 50 mm
- (B) 100 mm
- (C) 150 mm
- (D) 250 mm
- उत्तर: (C) 150 mm
हाइड्रोलिक, न्यूमेटिक और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम का पूरा डेटा
मशीन का पावर और कंट्रोलिंग सिस्टम तीन बड़े नेटवर्क पर काम करता है:
1. हाइड्रोलिक सिस्टम (Hydraulic System)
मशीन में 3 डबल पंप (Double Pumps) इस्तेमाल होते हैं जो अलग-अलग प्रेशर जेनरेट करते हैं:
- 38×22 GPM पंप: यह पूरे सिस्टम के लिए 120-140 बार का संयुक्त प्रेशर बनाता है।
- 20×17 GPM पंप: इसमें 20 GPM का इस्तेमाल वाइब्रेशन (एक साइड) के लिए 150 बार प्रेशर पर और 17 GPM का इस्तेमाल 3 हाइड्रोलिक कूलर मोटर्स के लिए 150 बार प्रेशर पर होता है।
- 20×22 GPM पंप: 20 GPM का उपयोग दूसरी साइड के वाइब्रेशन (150 बार) और 22 GPM का उपयोग हाई प्रेशर (150 बार) के लिए होता है।
इसके अलावा, इस हाइड्रोलिक नेटवर्क में 7 मोटर्स (2 वाइब्रेशन, 2 ड्राइविंग, 2 ऑयल कूलर, 1 ZF कूलर), 2 ब्लैडर टाइप एक्यूमलेटर (32 लीटर और 20 लीटर), 2 प्रोपोरशनल वाल्व, 43 सोलेनोइड्स और 57 अलग-अलग साइज के सिलेंडर लगे होते हैं।
2. न्यूमेटिक सिस्टम (Pneumatic System)
इसमें 500 cum/minute की क्षमता का 1 कम्प्रेशर, 100 लीटर/इंच के 2 प्रेशर टैंक, 12 इंच व्यास के 2 ब्रेक सिलेंडर, 48 अलग साइज के सिलेंडर और 12 सोलेनोइड्स होते हैं। इसका मुख्य उपयोग ब्रेक सिस्टम, ट्रॉलियों को उठाने/गिराने और लॉक/अनलॉक करने, हॉर्न, डाटम, लाइनिंग-लेवलिंग कॉर्ड टेंशन और वाइपर के संचालन में होता है।
3. इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (PCBs)
मशीन में 12V/180 AH की 2 बैटरियां (सीरीज़ में), Bosch मेक के दो 28V/55A अल्टरनेटर, 3 पेंडुलम और विभिन्न ट्रांसड्यूसर (हाइट, वर्साइन, टैम्पिंग डेप्थ) होते हैं। सिस्टम को कंट्रोल करने के लिए मुख्य इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड्स (PCBs) निम्नलिखित हैं:
- EK 812 SV00 & EK 813 SV00: डीसी से डीसी कनवर्टर (कंट्रोल पैनल बॉक्स B20, B4, B6, B10 में)।
- EK 132 LV00: टैम्पिंग यूनिट का अप/डाउन कंट्रोल।
- EK 2038 LV00: ट्रैक की लाइनिंग कंट्रोल।
- EK 144 LV00: हुक, 3-स्टेज लाइनिंग और लिफ्टिंग कंट्रोल।
- EK 2041 LV00 & EK 2042 LV00: ट्रैक लिफ्टिंग (लेवलिंग कंट्रोल) और पेंडुलम कंट्रोल।
- EK 290 LV00: ओवर-स्लीव कंट्रोल (Over-slew Control)।
अंतिम सारांश और निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में ऑन-ट्रैक मशीनों का योगदान अतुलनीय है। UNIMAT and MPT ट्रैक मशीन की इस विस्तृत और संपूर्ण तकनीकी गाइड के माध्यम से हमने जाना कि कैसे इन मशीनों का हाइड्रोलिक, मैकेनिकल, न्यूमेटिक और इलेक्ट्रिकल सिस्टम आपस में मिलकर पटरियों को एक नया जीवन देता है। जहाँ एक तरफ UNIMAT मशीन जटिल यार्डों और टर्नआउट्स को स्थिरता प्रदान करती है, वहीं दूसरी तरफ MPT मशीन अपने मल्टी-पर्पज डिजाइन और क्रेन की मदद से फील्ड में आने वाले अचानक फॉल्ट्स (Spot Attention) को मिनटों में हल कर देती है। इन मशीनों के कड़े मेंटेनेंस शेड्यूल, प्री-टैम्पिंग चेकलिस्ट और ऑपरेटिंग मानकों का सही ज्ञान ही रेलवे की सुरक्षा को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रख सकता है।
अनुभाग 21: अक्सर पूछे जाने वाले अतिरिक्त प्रश्न UNIMAT and MPT (Advanced FAQs)
- UNIMAT-4S मशीन का कुल वजन कितना होता है?
इस हैवी-ड्यूटी मशीन का कुल वजन लगभग 84,100 किलोग्राम (84.1 टन) होता है। - MPT मशीन पर लगी जिब क्रेन की अधिकतम क्षमता कितनी होती है?
पुरानी सीरीज में यह 1 टन थी, लेकिन नई सीरीज और लेटेस्ट 2024 स्पेसिफिकेशन के अनुसार इसकी क्षमता 2 टन (2 Tonnes) निर्धारित की गई है। - टैम्पिंग के दौरान वाइब्रेशन का आयाम (Amplitude) कितना होता है?
गिट्टी के पत्थरों को सही जगह सेट करने के लिए वाइब्रेशन का आयाम हमेशा 10 mm फिक्स रखा जाता है। - क्या UNIMAT and MPT मशीनें बारिश के मौसम में काम कर सकती हैं?
हाँ, इन मशीनों के नाजुक इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मजबूत वाटरप्रूफ कवर से ढके होते हैं, जिससे ये बारिश में भी सुरक्षित काम कर सकती हैं। - मशीनों में लगे हाइड्रोलिक ऑयल कूलर का क्या काम होता है?
यह तेल के तापमान को हमेशा 45°C से 55°C के सुरक्षित दायरे में बनाए रखता है ताकि तेल का गाढ़ापन खत्म न हो। - UNIMAT मशीन की काम करने की दिशा और MPT की दिशा में क्या अंतर है?
UNIMAT हमेशा रिवर्स (पीछे की तरफ) काम करती है, जबकि नई सीरीज की MPT मशीन हमेशा फॉरवर्ड (आगे की तरफ) काम करती है। - इलेक्ट्रिकल पैनल में लगे MCB का मुख्य काम क्या होता है?
यह शॉर्ट सर्किट या ओवरलोड होने पर बिजली की सप्लाई को तुरंत काट देता है ताकि कीमती इलेक्ट्रॉनिक पीसीबी कार्ड जलने से बच सकें। - शॉर्ट सर्किट होने पर सर्किट में करंट का मान कितना हो जाता है?
शॉर्ट सर्किट होने की स्थिति में करंट का मान अचानक अनंत (Infinite) हो जाता है। - ओपन सर्किट में वोल्टेज का मान कितना मिलता है?
ओपन सर्किट होने पर कटे हुए सिरों के बीच मुख्य सोर्स वोल्टेज के बराबर ही वोल्टेज मिलता है। - मशीन के पहिए घिसने के बाद रेल लेवल से पार्ट्स की न्यूनतम ऊंचाई कितनी होनी चाहिए?
पहिया पूरी तरह घिसने के बाद भी मशीन का कोई भी हिस्सा रेल लेवल से 91 mm से नीचे नहीं आना चाहिए।
पाठकों के लिए संदेश और सुझाव (Join Our Railway Community!)
इंजीनियर भाइयों और दोस्तों, UNIMAT and MPT की यह विस्तृत गाइड आपको कैसी लगी? हमने इस आर्टिकल में रेलवे बोर्ड और आरडीएसओ के नवीनतम नियमों को बहुत ही आसान भाषा में समेटने का प्रयास किया है ताकि आपकी विभागीय परीक्षाओं (JE, SSE, Technician Exams) की तैयारी मजबूत हो सके।
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